आस्ट्रेलिया की शिक्षा व्यवस्था¸ जो निजी एवं सरकारी विद्यालयों और संस्थाओं का सम्मिश्रण है¸ दुनिया के उन देशों में से एक है जहाँ लगभग राष्ट्र के सभी लोग शिक्षा प्राप्त करते हैं और जनता के ३१ प्रतिशत प्रौड़ सदस्य विश्वविद्यालय तक शिक्षा प्राप्त कर पाते हैं।
डिस्टेंस तथा बाहरी शिक्षा की योजनाएँ पूर्वस्कूल, प्राथमिक तथा माध्यमिक स्कूलों के अतिरिक्त विश्वविद्यालयों और व्यवसायसंबंधी (वोकेश्नल) पाठ्यक्रमों के स्तर पर भी उपलब्ध हैं।
सन् २००० में आस्ट्रेलिया के विश्वविद्यालयों ने अनुसंधान एवं विकास पर २.८ अरब आस्ट्रेलियाई डालर का खर्चा किया था। इस क्षेत्र में किए जाने वाले खर्चे का यह एक तिहाई हिस्सा है।
पिछले २० वर्षों में आस्ट्रेलिया में पढ़ाई के उद्देश्य से आने वाले अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों की संख्या में भी वृद्धि हुई है।
सम्मिलित होना
नई संस्कृति और अपने देश से भिन्न शिक्षा व्यवस्था के अनुसार स्वयं को उसकी आदत डालना आसान नहीं है¸ विशेषकर कम आयु के विद्यार्थियों अथवा उन विद्यार्थियों के लिए जो पहली बार घर से दूर हुए हैं। दक्षिणी पूर्व ऐशिया से यहाँ आई एक विद्यार्थी ने मेलबर्न विश्वविद्यालय में अपने अनुभव का निम्नलिखित रूप से विवरण किया है।
"वातावरण¸ संस्कृति और कार्यभार की समस्याओं की आदत डालने और पढ़ाई के नए तरीकों तथा नए दोस्तों की आदत डालने में अत्यधिक मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है।"
टिम पेनहाल¸ अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थी एवं विद्वता केन्द्र¸ आर एम आई टी विश्वविद्यालय
परन्तु अब उन्हें यहाँ की आदत पड़ गई है और उन्हें अब बहुत मज़ा आता है।
"यह स्थान बहुसांस्कृतिक है¸ एक महानगर है और जब मैं यहाँ आई थी तो मैं ऐसा ही स्थान चाहती थी। यहाँ का समाज खुले विचारों का है और मैं जहाँ से आई हूँ उसकी तुलना में यहाँ के लोग आपके बारे में न्यायशील नहीं होते।"
शिक्षा का आर्थिक पहलू
आस्ट्रेलिया के सभी लोग 'शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण' से प्रसन्न नहीं हैं। समाजशास्त्र अध्यापक बोब कोनेल¸ जो अमरीका और युरोप के विश्वविद्यालयों में पढ़ा चुके हैं और अब सिडनी विश्वविद्यालय में शिक्षा प्रदान करते हैं¸ का कहना है कि वे आस्ट्रेलिया में शिक्षा को एक "व्यापार" के रूप में नहीं बल्कि एक "सहायक" के रूप में देखना चाहेंगे।
"यदि हम शिक्षा को एक अर्थव्यवस्था के रूप में प्रस्तुत करेंगे तो हम संस्कृतियों के बीच आदानप्रदान नहीं कर सकते। आज कई लोग विकासशील देशों की ओर अधिक ध्यान देना चाहते हैं परन्तु इसे सम्भव बनाने के लिए संस्थापनों में परिवर्तन की आवश्यकता है।"
आज शिक्षा आस्ट्रेलिया का आठवाँ सबसे बड़ा उद्योग है और कई विश्वविद्यालयों की अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों से उपलब्ध होने वाली आय ५० प्रतिशत से अधिक है।
संघर्ष
आस्ट्रेलिया के विश्वविद्यालयों को सन् १९८५ से अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों से भी सामान्य फीस लेने की प्रक्रिया की अनुमति दी गई थी। प्रसिद्ध शिक्षा अनुसंधानकर्ता प्राध्यापक साएमन मारजिनसन का मानना है कि अचानक से विश्वविद्यालयों का अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों से मिलने वाली आय पर निर्भर रहना केवल एक संयोग नहीं है बल्कि इसका कारण है सरकार द्वारा उच्च शिक्षा के क्षेत्र में दी जाने वाली निधि में कटौती।
"सन् १९९० में विश्वविद्यालयों द्वारा १२¸००० विद्यार्थियों से मिलने वाली आय की तुलना में वर्तमान में यह संख्या १¸००¸००० विद्यार्थियों तक बढ़ गई है। हर १० डालरों में से एक डालर अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थी से कमाया जाता है। यह देखते हुए सरकार ने निधि राशि में और भी कटौती की है।"
इस बढ़ती कटौती का सबसे अधिक प्रभाव पृष्ठप्रदेशों पर पड़ा है और फल स्वरूप लोक शिक्षा में कमी हुई है।
यदि आप दूर के प्रदेशों में रहते हैं तो शहरों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का संघर्ष अपनी पसंद के पाठ्यक्रम में प्रवेश प्राप्त करने जैसा कठिन है।
विक्टोरिया के गोलबर्न घाटी के तीव्र खेती एवं उद्यानकृषि के क्षेत्र शेपपारटन के मुख्य अध्यक्ष बिल जबूर का कहना हैः
"इस कार्य में बहुत ज़्यादा खर्चा होता है¸ परिवारों के लिए बच्चों को अपने घर से लगभग २०० किलोमीटर दूर मेलबर्न में पढ़ाना बहुत कठिन होता है। इन स्थानों पर नियमित रूप से सार्वजनिक यातायात उपलब्ध नहीं है। लगभग ढाई घंटे की रेल यात्रा का प्रबंध किया गया है परन्तु प्रतिदिन यात्रा एवं विश्वविद्यालय में पढ़ाई करना अत्यन्त कठिन है।"
जो लोग शहरों में पढ़ाई पूरी करते हैं¸ उन्हें भविष्य में नौकरी भी शहरों में ही मिलती है।
उच्च प्रोद्योगिकी अर्थव्यवस्था
१९९० के दशक में आस्ट्रेलिया की अर्थ व्यवस्था में अत्यधिक बढ़ोत्री हुई। राष्ट्र का आउटपुट प्रति जन अन्य उन्नत देशों की तुलना में अत्यधिक तेज़ी से बढ़ा और मुद्रास्फीति और ब्याज दरों में पिछले ३० वर्षों की तुलना में बहुत कमी हुई है।
इसके साथ-साथ अर्थ-व्यवस्था¸ कृषि¸ खानों की खुदाई और उत्पादन से हट कर तकनीकीकरण की ओर बढ़ी है।
सिडनी और मेलबर्न के आस-पास के आवासी क्षेत्रों में कम्पयूटर संबंधित उद्योगों में बढ़ोत्री हुई है जिसे "नव अर्थ व्यवस्था" का नाम दिया गया है।
इस नई शिक्षित "डिजीटल" पीढ़ी के एक सदस्य ऐलेक्स कुन¸ जो मेलबर्न में स्थित नेटवर्क संबंधित तेज़ रफ़्तार से चलने वाले उपकरणों का निर्माण करने वाली कम्पनी में नौकरी करते हैं¸ का कहना हैः
"आजकल मेरी कम्पनी ऐशिया के बाज़ारों में अपने उत्पादनों को प्रस्तुत कर रही है। मेरा काम इन उत्त्पादनों के प्रदर्शन से पूर्व उनका परीक्षण करना एवं आंतरिक काम-काज की देख-रेख करना है।"
अपनी पीढ़ी के अन्य सदस्यों की तरह ऐलेक्स कम्पयूटरों के ज़माने में पले-बढ़े नहीं हैं। उनका जन्म कम्बोडिया में हुआ था और वे बचपन में अपने परिवार के साथ आस्ट्रेलिया के प्रवासी बन गए थे।
"मेरे माता-पिता के लिए केवल खेती या कारखानों में ही नौकरी उपलब्ध थी परन्तु हमारी पीढ़ी ने विश्वविद्यालयों में पढ़ाई की है और मुझे आशा है कि हमारा भविष्य अच्छा होगा। यह "इन्फ़रमेशन ऐज" है और आज के ज़माने में कुछ भी सम्भव है।"
असामान्य अवसर
हालांकि १९८० के दशक से कम्पयूटर एवं प्रबंधकीय कार्यों में ३० प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई है परन्तु द्वितीय महायुद्ध के उपरान्त उपलब्ध कारखानों की नौकरियाँ अब देखने को नहीं मिलतीं।
इसके अतिरिक्त पिछले कुछ वर्षों में 'फ़ुल टाईम' नहीं बल्कि 'पार्ट टाईम' तथा स्थायी नहीं बल्कि 'केसुअल' रोज़गार में वृद्धि हुई है।
यही कारण है जिससे आस्ट्रेलियाई लोगों का कर्ज़ लेकर अपना घर लेने का सपना और कठिन हो जाता है। भुगोलशास्त्री केविन ओ'कोन्नोर का कहना है कि वर्तमान में रोज़गार की अनियमित बढ़ौत्री हुई है।
"आज के हालात १९५० एवं १९६० के दशकों की तरह हैं जब साधारण उत्पादनीय नौकरियाँ छोटे-छोटे नगरों में उपलब्ध थीं और सबसे अच्छी नौकरियाँ केवल बढ़े शहरों में ही मिलती थीं।"
आज बड़े-बड़े शहरों के बाहर ग्रामीण और अन्य क्षेत्रों के लोग उत्सुक हैं कि नए प्रकार कि नौकरीयों को किस प्रकार उत्पन्न किया जाए।
बदलते समय के साथ यहाँ के लोगों ने आस्ट्रेलिया के पारंपारिक निर्यात जैसे कि खनिज पदार्थ¸ ऊन¸ गेहूँ और गोमांस में कटौती तथा कम्पयूटरों और टेलिविज़न के आयात में बढ़ौत्री देखी है।
यह तुलना अत्यन्त कठोर है। आज एक टन कोयले के दाम में दो सीडीज़ तथा दो टन गेहूँ के दाम में मोबाईल फ़ोन खरीदा जा सकता है।
