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आस्ट्रेलिया इंडिया काऊन्सिल के सहयोग के द्वारा ।

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रेडियो आस्ट्रेलिया का वर्तमान आस्ट्रेलिया

वर्तमान आस्ट्रेलिया की कड़ियों का सारांश पढ़िए और कड़ियों को सुनिए।
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Queensland Rain Forest हालांकि आस्ट्रेलियाई लोगों का सोचना है कि उनके देश की धड़कन दूर स्थित कसबों में है परन्तु आंकड़ों के अनुसार आस्ट्रेलिया की लगभग ८० प्रतिशत जनता शहरों और उपनगरों में रहती है।

शहरी क्षेत्रों के बाहर आस्ट्रेलियाई पर्यावरण के विविध रूप देखने को मिलते हैं। समुद्री किनारों¸ सफ़ेदे के पेड़ों,¸ रेगिस्तान¸ तटिए मैदानी इलाकों और बर्फ से ढके पहाड़ों, की विविधता आस्ट्रेलिया में पाई जाती है।

आस्ट्रेलिया महाद्वीप लगभग अमरीका जितना बड़ा है और यहाँ पर १४ 'वर्ल्ड हेरिटेज लिस्टिड साईटस' जैसे कि ग्रेट बैरियर रीफ़¸ ऐअरस रॉक¸ काकाडू नैश्नल पार्क और ब्लू माउनटेनस हैं।

भीतर के सूखे क्षेत्रों के बावजूद भी ६० प्रतिशत भूमि का प्रयोग खेती और जानवरों के चरने के लिए किया जाता है। पिछले कुछ दशकों से कई खानों की खोज भी की गई है। देश के तटीय मैदानी क्षेत्रों में सबसे अधिक उपजाऊ भूमि और अच्छा वातावरण पाया जाता है¸ इन क्षेत्रों में ही बड़े-बड़े शहर बसाए गए हैं।

आज, देश की लगभग सवा करोड़ जनता विभिन्न राज्यों की राजधानियों और उनके उपनगरीय इलाकों में बसी है। इसके अतिरिक्त लगभग ३५ लाख जनता तटीय नगरों एवं शहरों में और लगभग इतनी ही जनता ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है।

उपनगरीय रहन-सहन

कुछ वर्ष पहले आस्ट्रेलिया में ब्रिटेन के शहरों की तरह तंग एवं ज़्यादा घनत्व घर बनाए जाते थे।

परन्तु १९२० के दशकों के उपरान्त यहाँ उपलब्ध खाली इलाकों को इस्तेमाल करने के बढ़ते हुए आकर्षण के कारण बड़े घरों और उपनगरों का विस्तार हुआ, और इन विकासकार्यों से आस्ट्रेलिया के शहर दुनिया के सबसे विशाल शहरों में से एक हैं। यही कारण है कि आस्ट्रेलिया के लोगों के दिलों में 'एक चौथाई एकड़ के स्वर्ग' का सपना पैदा हुआ।

अब सभी परिवारों का यह उद्देश्य था कि उनके पास १००० वर्ग मीटर की भूमि हो और उस पर एक घर जो ३० वर्ष का कर्ज़, अदा करने के उपरान्त उनका हो जाएगा। इस उपनगरीय रहन-सहन का प्रस्तुतिकरण सम्पूर्ण दुनिया को टेलिविज़न के धारावाहिक 'नेबर्स' के द्वारा किया गया है।

एक घर का स्वामित्व

सामाजिक अन्वेशणकर्ता हयू मैकेय का कहना है कि "अपना घर होना हमारे राष्ट्र की सोच में ही गहरे रूप से बसा है"।

घर का स्वामित्व २१वीं सदी में भी सभी लोगों का एक सपना है। आस्ट्रेलिया के कई युवा अपने माता-पिता का घर छोड़ कर कुछ समय तक शहरों के आस-पास किराए के मकान में रहते हैं और फिर उपनगरों में बस जाते हैं जहाँ सस्ते दामों में वे एक छोटे से बाग़ वाला घर ख़रीदने में समक्ष हों।

हयू मैकेय कहते हैं कि "ज़्यादातर लोग अपने पहले बच्चे के जन्म के उपरान्त किराए के मकान में रहने के स्थान पर अपना घर ख़रीदना पसंद करते हैं।" मैकेय कहते हैं कि¸ "हो सकता है कि पहले वे लोग शहरों के पास रहना पसंद करें परन्तु अपने बच्चों का आस्ट्रेलियाई रूप से पालन पोषण करने के हेतु वे उपनगरों की ओर आकर्षित होते हैं।"

घरों के भीतर और बाहर का जीवन

ब्रिटेन में पैदा हुईं स्यू टर्नबुल¸ जो ला ट्रोब विश्वविद्यालय में मिडिया स्टडीज़ पढ़ाती हैं¸ के अनुसार आस्ट्रेलिया के उपनगर पश्चिम के देशों से भिन्न हैं। उनका मानना है कि आस्ट्रेलियाई लोग घरों के बाहर करने वाली क्रियाएँ पसंद करते हैं।

स्यू टर्नबुल का कहना है कि आस्ट्रेलिया में¸ "आपको बाग़ नहीं बल्कि घर के बाहर मनोरंजन के क्षेत्र मिलेंगे।" उनका कहना है कि¸ "घर के भीतर बने रसोईघर और बाहर बने तंदूर यानि बारबेक्यू में सीधा संबंध होता है¸ जो कि घर के भोजन के साथ­साथ निवासियों के मनोरंजन का एक साधन होता है। इसलिए आस्ट्रेलिया के उपनगरों में रहने वाले लोगों के पास पश्चिमी और स्वदेशी सभ्यताओं का उत्कृष्ट मिश्रण है। जहाँ एक ओर स्वदेशी कसबों की घर के बाहर करने वाली क्रियाओं का चलन है¸ वहीं शहरों की सभ्यता¸ जो कसबों से भिन्न है¸ को भी अपनाया गया है। उपनगरों में इन दोनों का उत्कृष्ट मिलन पाया जाता है।"

स्यू टर्नबुल कहती हैं कि यह ऐसा रहन-सहन है जिसका पालन परिवार के लोग अपने दोस्तों के साथ मिलकर करते हैं¸ परन्तु चारों ओर बनी दीवारों के बीच ताकि पड़ोसी आपको न देख सकें।

पर्यावरण संबंधी विषय

जल

आस्ट्रेलिया धरती का सबसे सूखा हुआ महाद्वीप है और यही सत्य यहाँ पर कई पर्यावरण संबंधी समस्याओं का कारण है। यहाँ पर सूखा पड़ने का खतरा हमेशा लगा रहता है और बहुत कम वर्षा होने के कारण कई क्षेत्रों में खेती करने में बहुत कठिनाई होती है।

पानी के संसाधनों के संरक्षण के लिए राज्य सरकारें कई बार घरों एवं कारखानों पर पानी के अधिक इस्तेमाल पर रोक लगाती हैं। परन्तु पानी के खेलों में रूचि और सुन्दर एवं विस्तृत बाग़ों के शौक़ के कारण आस्ट्रेलियाई लोग दुनिया में पानी का सबसे अधिक उपभोग करते हैं।

अग्नि

नियमित रूप से फैलने वाली झाड़ियों की आग के कारण हज़ारों वर्ग किलोमीटर की खेती एवं जंगल नष्ट हो जाते हैं। सन् १८५० में हुए अन्वेषण के अनुसार लगभग हर १३ वर्ष में आस्ट्रेलिया में भयानक आग अवश्य लगती है। दक्षिणी पूर्व आस्ट्रेलिया में १९३९ की आग¸ जिसमें ७१ लोगों की मृत्यु हुई थी के उपरान्त पर्यावरण की इस समस्या पर गहरा सोच­विचार किया गया है। इतिहासकार टोम ग्रिफिथ्स ने बताया कि कुछ वर्ष पहले बनी रोयल आयोग ने टिपण्णी दी थी कि यूरोपिए लोगों ने ऐबोरजीनी लोगों से कुछ नहीं सीखा।

ग्रिफिथ्स का कहना है कि "ऐबोरजीनी लोग कभी भी झाड़ियों के बीच में नहीं बल्कि उनके बाहर रहते थे और झाड़ियों के आस­पास का रास्ता साफ़ कर देते थे ताकि यदि आग लगे तो फैल न पाए।"

झाड़ियों को जलाना या छोटी झाड़ियों को बढ़ने से पहले ही काट देने जैसे उपाय आजकल वाद-विवाद का मुख्य विषय हैं।

नमक

दो सदियों से झाड़ियों को काटकर युरोपिए ढंग से खेती करने पर आज आस्ट्रेलिया ने समय के साथ बदलने की आवश्यकता को समझा है। किसी समय में महान समझी जाने वाली मरी डारलिंग नदी की योजना आज खतरे में है क्योंकि इसका ज़्यादातर पानी सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

पेड़ों के कटने और अत्यधिक सिंचाई के कारण नमक दूर-दूर तक फैल गया है और इसका प्रभाव ग्रामीण क्षेत्रों पर भी हुआ है।

पर्यावरण में रूचि रखने वाले अभिनेता जैक थोमपसन का कहना है कि¸ "यह आश्चर्य की बात है कि १७८८ से अब तक हमने देश के २० अरब पेड़ काट दिए हैं।" उन्होंने बताया कि¸ "आज हम हर रोज़ एक फुटबाल फील्ड जितना हिस्सा गंवा देते हैं। बढ़ते हुए नमक के कारण आने वाली पीढ़ियों तक आज की एक तिहाई उपजाऊ भूमि बंजर हो जाएगी।"

इन समस्याओं का सामना करने के लिए आस्ट्रेलियाई सरकार १.४ अरब आस्ट्रेलियाई डालर का खर्चा एक सात वर्ष के कार्यक्रम पर कर रही है जिससे बढ़ते हुए नमक को कम और पानी को स्वच्छ किया जाएगा।

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