कार्यक्रम १०- आस्ट्रेलिया की स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय सभ्यताएँ
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स्यू सलेमन :
नमस्कार, मैं रेडियो आस्ट्रेलिया से स्यू सलेमन हूँ । आज के कार्यक्रम में हम "आस्ट्रेलिया की स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय सभ्यताएँ" पर किताबों, फिल्म तथा आस्ट्रेलियाई रूल्स फुटबाल के माध्यम से नज़र डालेंगे । आस्ट्रेलियाई संस्कृति के बारे में प्रायः दो परस्पर विरोधी दृष्टिकोण हैं : पहला यह कि इतने नए देश में एक राष्ट्रीय संस्कृति बमुश्किल हो सकती है और दूसरा अधिक सकारात्मक मत यह है कि आस्ट्रेलिया अब न तो ब्रिटेन की एक दूर की बस्ती और न ही अमरीका का शाखा कार्यालय रहा है और यह कुछ नया और अलग बना सकता है, " डाउन अंडर ! "
1988 में जब आस्ट्रेलिया ने यूरोपियाई बसावट के 200 वर्ष पूरे होने को मनाया तो जान रिकर्ड ने " ए कलचरल हिस्ट्री ऑफ आस्ट्रेलिया " प्रकाशित की और उसमें वह यह कहते हैं कि आस्ट्रेलिया के छोटे इतिहास में से अधिकांश भाग एक राष्ट्रीय पहचान की तलाश में खोया हुआ है.....
जान रिकर्ड :
" रिचर्ड वाइट ने अपनी पुस्तक " इनवेंटिग आस्ट्रेलिया " में इसे एक राष्ट्रीय जूनून कहा और विशेषकर, द्वितीय विश्व युद्ध से हम अधिकाधिक इसकी पहचान करने में खोये हुए प्रतीत होते हैं कि वह क्या है जो हमें एक राष्ट्र बनाता है, यह प्रश्न भी क्या हम एक स्वतंत्र राष्ट्र है क्योंकि हमारे यहाँ अभी भी राजतंत्र है । इस तरह यह एक लगातार चलते रहने वाली और दिलचस्प बहस है । "
डेब वरहोवन :
फिल्म उद्योग इस प्रकार के प्रश्नों को उठाने के लिए अपने आप को अच्छी तरह से स्थापित करता है और आस्ट्रेलियाई फिल्म उद्योग कोई अपवाद नहीं है, वास्तव में मैं सोचती हूँ कि इस प्रकार के आत्म मंथन के लिए यह संभवतः श्रेष्ठ उद्योगों में से एक है - क्या हम आस्ट्रेलियाई हैं, क्या हम अंतर्राष्ट्रीय हैं, क्या हमारा अमरीकी सिनेमा जैसे अन्य सफल सिनेमाओं से कोई संबंध है ? और अपने पिछले इतिहास में भी हम ब्रिटिश सिनेमा से किस तरह जुड़े हैं ।
स्यू सलेमन :
डेब वरहोवन मेलबर्न के आर.एम.आई.टी विश्वविद्यालय में सिनेमा अध्ययन पढ़ाती हैं और यह सुझाती हैं कि आस्ट्रेलिया की " पहचान " की तन्मयता उपनिवेश रहे समाजों में आम है ।
डेब वरहोवन :
बिना किसी संदेह के यह वंशावली के बारे में है, मेरा मतलब है कि पहचान के लिए सभी खोज अंत में इस संबंध में होती है कि हम कहाँ से आए थे, हमारा अपने पैतृक लक्षणों अथवा रूप से क्या संबंध है ? आस्ट्रेलियाई सिनेमा के लिए अमरीकी तथा ब्रिटेन के मध्य बातचीत, न केवल हमारी आर्थिक व्यवस्था से बल्कि हमारे इन दो देशों के साथ औपनिवेशिक संबंधों से भी नज़दीकी रूप से जुड़ी है । और अधिकतर लोग यह सोचते है कि हमारा अमरीका के साथ एक औपनिवेशिक संबंध नहीं है, वस्तुतः प्रत्यक्ष तौर पर हमारा अमरीका से कोई राजनैतिक औपनिवेशिक संबंध नहीं है परंतु निश्चित रूप से हमारा अमरीका के साथ कई तरह से आर्थिक औपनिवेशिक संबंध है । और मैं सोचती हूँ कि आस्ट्रेलियाई पहचान की वंशावली की वह समझ काफ़ी महत्वपूर्ण है । यह मुझे फिर यह सोचने के लिए ले जाता है कि सिनेमा की आस्ट्रेलियाई लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका है, वह यह है कि इसके द्वारा ही हम अपने मिथकों के सृजन या हमारी मूल कथाओं को बताते है । अन्य संस्कृतियाँ ऐसा मौखिक इतिहास अथवा साहित्य के द्वारा करती हैं, विभिन्न संस्कृतियों द्वारा अपने मिथकों के सृजन अथवा कहानी की रचना के बारे में बताने के कई अलग-अलग तरीके हैं । ऐतिहासिक रूप में आस्ट्रेलिया एक काफ़ी बाद की संस्कृति है, हम काफ़ी समय तक एक राष्ट्रीय संस्कृति, एक श्वेत राष्ट्रीय संस्कृति के रूप में नहीं विकसित हुए, इसलिए हम अपने उत्पन्न होने की कथाओं के बारे में सोचने के लिए एक तरह से बहुत ही सम्कालीन टेकनोलेजी का प्रयोग या नियोजन कर रहे हैं । "
स्यू सलेमन :
1960 के दशक के अंत के बाद आने वाली आस्ट्रेलियाई सरकारों ने उन फिल्म तथा टेलीविज़न कार्यक्रमों को कुछ वित्तीय सहायता दी है जो आस्ट्रेलियाई पहचान दर्शाते हैं ।
इसीलिए, आस्ट्रेलियाई फिल्में विदेशी विद्यार्थियों का आस्ट्रेलियाई अध्ययनों से परिचय कराने का एक अच्छा तरीका हैं...
जॉन रिकर्ड फिर से, जॉन ने हार्वड विश्वविद्यालय में आस्ट्रेलियाई अध्ययन पढ़ाया था ।
जॉन रिकर्ड :
" मैंने जान-बूझकर एक दूसरे से बिल्कुल अलग वाली पाँच आस्ट्रेलियाई फिल्मों के अंशों को चुना है जैसे कि एक अंश "गैल्लीपोली " जैसी फिल्म से और दूसरा "प्रिसिला, क्वीन ऑफ द डेज़र्ट " जैसी फिल्म से ।
स्यू सलेमन :
और उनके लिए जिन्होंने यह फिल्में नहीं देखी हैं, संभवतः आप हमें संक्षेप में उनके मुख्य विषय क्या थे और हम उन्हें सर्वोत्कृष्ट आस्ट्रेलियाई फिल्मों के रूप में क्यों देखते हैं, के बारे मे बता सकते हैं ?
जान रिकर्ड :
"गैलीपोली " वस्तुतः 1915 में प्रथम विश्व युद्ध में गैलीपोली अभियान, जो अंततः एक दुर्घटना, एक सैनिक दुर्घटना सिद्ध हुई, के बारे में एक फिल्म है परंतु जिसे इस प्रकार के किसी युद्ध में भिड़न्त का आस्ट्रेलियाई सैनिक के प्रथम अनुभव और जहाँ एक प्रकार से आस्ट्रेलियाई "योद्धा " की उत्पत्ति हुई के रूप में देखा जाता है ।
स्यू सलेमन :
क्या सर्वोत्कृष्ट आस्ट्रेलियाई गुंडे की परीक्षा ली गई और वह निश्चित रूप से "योद्धा " के लिए योग्य पाए गए ।
जान रिकर्ड :
फिल्म यह स्पष्ट कर देती है । फिल्म आपको योद्धा के दो रूप दिखाती है - गाँव का लड़का जो पूर्णतः शालीन तथा बहुत ही निषकपट तथा एक कुलीन प्रकार का था, काफ़ी कुछ कुलीन ग्रामीण की प्रतिमा जैसा, पर उसका साथी, सबसे अच्छा साथी, शहर का गुण्डा था जिसकी भूमिका मेल गिबसन द्वारा अदा की गयी है । और वे दो एक इस प्रकार की साझेदारी बनाते हैं जिसने आस्ट्रेलियाई संस्कृति के इन दो तत्वों को एक साथ उभारा ।
स्यू सलेमन :
क्या हम यह नहीं कह सकते कि वे दोनों सबसे अच्छे दोस्त थे ?
जान रिकर्ड :
जी हाँ, सबसे अच्छे दोस्त और फिल्म गाँव से आए जवान लड़के की दुखद मृत्यु के साथ समाप्त होती है जबकि दूसरा पात्र उस संदेश को लाने का प्रयास कर रहा है जो उस डिवीज़न अथवा कंपनी को बचा सकता था तथा सुस्पष्ट रूप में लड़ाई को शुरू होने से रोकने के लिए समय पर संदेश को पहुँचा पाने में असफल होता है भले ही इसमें उसकी अपनी कोई गलती नहीं थी । इस तरह यह फिल्म उस संदर्भ में " ग्रामीण ", "योद्धा " का वास्तविक आहवान था । "प्रिसिला, क्वीन ऑफ द डेज़र्ट " इसके बिल्कुल अलग थी क्योंकि यह ड्रैग क्वीनों के बारे में है जो जंगल में जा रहे होते हैं कि उन्हें एक शराब घर में ब्रोकन हिल का अदभूत दृश्य देखने को मिलता है, शुरू में ड्रैग क्वीन इस मधुशला में आते हैं ओर स्थानीय लोगों को पूर्णतः विस्मित कर देते हैं परंतु अंत में उनकी स्वीकृति हासिल कर लेती है । इस प्रकार आप जानेंगे कि यह एक सुखद अहसास करवाने वाली फिल्म है जबकि उसी समय यह इरादतन पुरूष रूढ़ियों पर सवाल कर रहे हैं । "
स्यू सलेमन :
आस्ट्रेलियाई समाज का बढ़ता हुआ शहरीकरण तथा सांस्कृतिक विविधता ने फिल्मकारों को उपयोग के लिए नए क्षेत्र दिए हैं ।
विक्की पील :
" 1980 के दशक के अंत से तथा 1990 के दशक के प्रारम्भ से हमने उप-नगर के मिथकशास्त्र तथा पुरूषों की कहानी से हटती हुई प्रवृत्ति और शहरी कहानियों को उभरते हुए देख रहे हैं और "डेथ इन ब्रंज़विक ", "द कासल, " "रॉम्पर स्टॉम्पर " बहुत हद तक शहर पर आधारित फिल्में हैं । और यह वस्तुतः सही है क्योंकि आस्ट्रेलिया मूल रूप में एक शहरी राष्ट्र है । "
स्यू सलेमन :
मोनेश विश्वविद्यालय में आस्ट्रेलियाई अध्ययनों हेतु राष्ट्रीय केन्द्र से डॉ. विक्की पील ।
विक्की पील :
" हम प्रवास तथा आप्रवासी के अनुभवों को पहले कभी न दिखाए गए तरीकों से दिखाया जाते हुए भी पाते हैं, उदाहरण के लिए "लुकिंग फॉर एलीब्रेंडी " जैसी फिल्में । और हम स्वदेशी आस्ट्रेलियाई लोगों को फिल्मों में लेखन, निर्माण तथा अदाकारी में उन रूपों में देख रहे हैं जिसमें हमने उन्हें आज से पाँच से दस वर्ष पूर्व भी नहीं देखा था। "रैबिट प्रूफ फेन्स ", " आस्ट्रेलियन रूलस " जैसी फिल्में स्वदेशीय आस्ट्रेलियाई लोगों को 1980 से पूर्व के आम रूढ़ीवादी चित्रण से अलग आलोक में प्रस्तुत करती हैं ।
स्यू सलेमन :
जैसे-जैसे समाज स्वयं आस्ट्रेलियाई लोगों की विविध प्रकृत्ति को और प्रतिबिम्बित करता है, स्वदेशी आस्ट्रेलियाई तथा हाल ही में आने वाले दोनों ही, वह हमारी फिल्मों में प्रतिबिंबित होता है और मैं अनुमान लगाती हूँ कि ये वे विषय है जिसमें विदेशी दर्शक भी अपने नस्लीय विविध समाज में अपने को उनके जैसा ही महसूस कर सकते हैं, क्या ऐसा नहीं है । मैं "स्ट्रिक्टली बॉलरूम " के बारे में सोच रही हूँ जो कि मैं मानती हूँ जब पहली बार फ़्रास में केन्स में दिखायी गयी तो यह काफ़ी आकर्षण का केन्द्र बनी ?
विक्की पील :
" स्ट्रिक्टली बॉलरूम " मुख्य रूप से बुराई पर अच्छाई की विजय की कहानी है और यह एक सार्वभौमिक विषय है । यह एक जवान लड़के स्कॉट की कहानी है जो पैन पैसिफिक बालरूम डान्सिंग चैम्पियनशिप जीतने के लिए निकलता है और वह अपने माता-पिता तथा उसके नृत्य की शैली को प्रभावित करने वाली शक्तियों का विरोध करते हुए अंततः फ्रेन नाम के स्पेनिंश लड़की जो एक आस्ट्रेलियाई प्रवासी है तथा उसके सपनों की रानी है, के साथ नृत्य करता है । "
(संगीत : जॉन पॉल यंग का लव इज़ इन दी एयर )
स्यू सलेमन :
जहाँ आस्ट्रेलिया का यूरोपियाई बस्तियों का इतिहास बहुत पुराना नहीं है वहीं सिनेमा के इतिहास में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण है - यह अधिक लोगों को पता नहीं है कि आस्ट्रेलिया ने 1906 में विश्व की पहली फीचर फील्मों में से एक "द स्टोरी ऑफ कैली गैंग " का निर्माण किया, जो एक देहात में घूमने वाले के बारे में थी जो एक लोक नायक बन गया ।
20वीं सदी के पहले भाग में आस्ट्रेलिया का एक छोटा परंतु सफल फिल्म उद्योग था परंतु द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से 1960 के दशक तक अधिकांश विदेशी स्वामित्व वाले सिनेमा समूहों ने छोटी आस्ट्रेलियाई फिल्मों के प्रदर्शन तक को असंभव बना दिया जैसाकि विक्की पील स्पष्ट करते हैं :
विक्की पील :
"निश्चित रूप से 1959 से 1966 तक की अवधि में आस्ट्रेलिया में कोई फीचर फिल्में नहीं बनी थी और यह मुख्यतः निधियों तथा वितरण की समस्याओं के कारण था । 1940 में रिज जैसे वितरण गृहों का मुद्दा भी था जो निर्माण प्रक्रियाओं में बिल्कुल भी सहायता नहीं करना चाहते थे, इस तरह आस्ट्रेलियाई भी वास्तव में अब निर्माण में सहायता करने के इच्छुक नहीं थे ।
स्यू सलेमन :
क्या वह थोड़ा बहुत इस कारण से था कि 20वीं सदी में लंबी अवधियों तक आस्ट्रेलियाई अधिक सर्वदेशीय संस्कृति के लिए इंग्लैण्ड या किसी अन्य देश की ओर देखते थे जिसे हमने " सांस्कृतिक घिघिआना " का नाम दिया है, और वे स्थानीय उत्पाद को घटिया मानते थे । आप क्या सोचती हैं कि इसमें बदलाव कब आया ?
विक्की पील :
समूची 20वीं सदी के दौरान इस मुद्दे के कुछ पहलुओं को निश्चित रूप से उठाया जाता रहा है, एक ऐसी समझ कि आस्ट्रेलिया का उद्योग घटिया फिल्मों का निर्माण कर रहा है जो अमरीकी आयात की फ़िल्मों की ख़ूबियों के कारण है । वितरण गृह जनता तथा सरकार को यह बता रहे थे कि जनता यही देखना चाहती थी । क्या वास्तव में ऐसा मामला था या नहीं का अच्छी तरह से परीक्षण नहीं किया गया था क्योंकि उद्योग 1970 के दशक से पूर्व 20वीं सदी के अधिकांश काल में अव्यवस्था में था । "
स्यू सलेमन :
1970 के दशक में फिल्म उद्योग पुनर्जीवित हुआ जब आस्ट्रेलियाई सरकार ने स्थानीय फिल्म तथा टी.वी. निर्माताओं की सक्रिय रूप से सहायता करनी शुरू की ।
1970 से आस्ट्रेलिया ने 630 फीचर फिल्मों का निर्माण किया है और अब कई स्थानीय अभिनेता, निर्माता तथा टेकनीशियनस ने हॉलीवुड में नाम कमाया है ।
1998 से 1999 तक आस्ट्रेलिया का कुल फिल्म निर्माण 678 मिलियन डॉलर का था परंतु नब्बे के दश्क में वृद्धि मुख्यतः हॉलीवुड की उन फिल्मों के निर्माण से हुई है जो आस्ट्रेलिया में बनाई गई थी : मिशन इम्पासिबल दो तथा दी मैट्रिक्स जैसी फिल्में जो उचित रूप से बहु पहचान के बारे में थी ।
वे ऐसी फिल्में हैं जो स्थानीय तथा वैश्विक के मध्य अंतर को धुंधला कर देती हैं और मैंने जॉन रिकर्ड से पूछा कि क्या हम अब भी आस्ट्रेलियाई फिल्मों के बारे में बात कर सकते हैं ।
जान रिकर्ड :
" हमने कुछ बहुत अच्छे निर्देशक दिए हैं और उनमें से कई काम करने के लिए विदेशों में चले गए हैं और कोई उन्हें इसके लिए दोष नहीं दे सकता है । पर फिर भी हम अभी भी नए निर्देशक उत्पन्न करते रहते हैं जो रोचक फिल्में बना रहे हैं । अब यह तथ्य कि हम हालीवुड की फिल्मों को यहाँ बनाने के लिए एक उद्योग विकसित कर रहे हैं, जैसा कि आपने " दि मैट्रिक्स" का उल्लेख किया जो मूलतः आस्ट्रेलिया में बनाई गई हॉलीवुड की एक फिल्म है, आस्ट्रेलिया के लिए यह कर सकना कि हॉलीवुड वास्तव में फिल्में यहाँ बनाए तथा स्थानीय तकनीशनों आदि को लगाए आर्थिक रूप से काफ़ी महत्वपूर्ण हो सकता है परंतु इसके साथ यह खतरा भी है कि यह हमारे अपने देश के उद्योग में कमी न कर दें । इसलिए मैं यह सोचता हूँ कि उसे बनाए रखा जाए । अब हमारे निर्देशक आवश्यक तौर पर उस प्रकार की फिल्में नहीं बनाना चाह सकते हैं जिनसे आस्ट्रेलियाई फिल्मों को जाना जाता था जैसे जंगल के बारे में, ऐतिहासिक फिल्में आदि । वे शायद खुद ही वैश्विक विषयों में रूचि अधिक दिखा रहे हैं और यह होता है तो ठीक ही है परंतु यह अभी भी महत्वपूर्ण है कि हमारे पास आस्ट्रेलिया में फिल्म बनाने के अपने तरीके तथा जिस प्रकार की कहानियाँ हम बताना चाहते हैं, की क्षमता हो । "
स्यू सलेमन :
स्थानीय फिल्म तथा टी.वी. उद्योग में इस बात के प्रति बहुत चिंता है कि मुक्त व्यापार के वर्ताकारों ने आस्ट्रेलियाई संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए दी गयी सरकारी आर्थिक सहायता तथा विनियमों को निशाना बनाया है ।
मेलबर्न के स्विनबर्न विश्वविद्यालय से जॉक गिवन आस्ट्रेलियाई फिल्म उद्योग का एक इतिहास लिख रहे हैं.....
जॉक गिवन :
" विश्व व्यापार संगठन जहाँ आस्ट्रेलिया उन 140 देशों में से एक है जो व्यवस्थाओं पर वार्ता करने के लिए फिर से बैठक कर रहे हैं और अमरीका के साथ एक द्विपक्षीय वार्ता के संबंध में चल रही नई वार्ता, मैं सोचता हूँ कि इन दोनों में ही आस्ट्रेलिया पर रियायतें देने के लिए दवाब होगा । आस्ट्रेलिया का फिल्म तथा टी.वी. उद्योग विशेष तौर पर आर्थिक रूप से एक बड़ा उद्योग नहीं है, मैं यह सोचता हूँ कि यह काफ़ी संवेदनशील है और यह अमरीका के साथ द्विपक्षीय समझौते में विशेषकर संवेदनशील है क्योंकि उनके लिए मनोरंजन कार्यक्रम एक बड़ा आर्थिक क्षेत्र है और इस समय विश्व में उनकी सामरिक शक्ति अतुलनीय है । अमरीकियों के साथ इस समय व्यापार करना आसान नहीं होगा ।
स्यू सलेमन :
पर कोई भी, जिसमें अमरीकी भी शामिल है, जिसने आस्ट्रेलियाई के फ़्री टू एयर टेलीविज़न तथा विशेष रूप से व्यावसायिक टी.वी. को देखा कोई सहायता नहीं कर सका तथा यह देखते हुए सोचना छोड़ दिया कि यह लगभग एक के बाद एक अमरीकी धारावाहिक तथा कार्यक्रम है । अमरीकी इससे ज़्यादा क्या चाहते हैं ?
जॉक गिवन :
इस समय फ़्री टू-एयर टेलीविजन में सुबह 6 बजे से रात्रि 12 बजे तक 55 प्रतिशत कार्यक्रम आस्ट्रेलियाई होने चाहिए जिसका अर्थ है कि अमरीका या कोई अन्य देश अधिकतम 45 प्रतिशत तक ले सकता है । स्पष्ट है कि वे इससे कुछ और अधिक पाना चाहेंगे, इसके 55 या 65 अथवा 100 प्रतिशत, यदि संभव हो तो, को पाना पसंद करेंगे । वे यह जानते हैं कि इसकी बहुत संभावना नहीं है कि उन्हें यह मिलेगा परंतु अंतर्राष्ट्रीय रूप में उन प्रतिबंधों का सिद्धान्त जो अमरीकी कार्यक्रमों को टी.वी. सेवाओं पर लाने तथा प्रसारित करने से रोकता है, उनके लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण सिद्धान्त है और वे जहाँ कहीं भी इसे पाएँगे उस पर वार करेंगे । "
स्यू सलेमन :
" आस्ट्रेलिया जैसे छोटे से बाज़ार में बिना किसी निधि के अपनी पहली फिल्म बनाना अथवा अपना पहला उपन्यास प्रकाशित करवाना एक दुष्कर कार्य है ।
और जहाँ आस्ट्रेलियाई कहानी आस्ट्रेलिया के 2 करोड़ के आसपास लोगों के मध्य अपनी जगह बना सकती है वहीं इससे हमेशा पैसे नहीं मिलते ।
इसी तरह जब मैक्स बैरी ने अपने पहले उपन्यास को लिखने का निर्णय किया तो उसने चतुरता से इसे कोका कोला कंपनी पर लिखा । इस तरह एक छोटे आस्ट्रेलिया योद्धा ने अमरीकी बाज़ार में धमाका कर दिया ...
मैक्स बैरी :
" मैं दोपहर के भोजन के समय चुपके से खिसककर अपनी 250 डालर वाली गाड़ी में घुस जाता और वहाँ 40 मिनट बैठकर उपन्यास लिखता और इस तरह मैंने इसे पूरा किया । जब मैंने इसे पूरा कर लिया तो किसी अन्य लेखक की तरह ही मैं किसी भी तरह इसे किसी प्रकाशक को देकर एक दिन अपने आप को किताबों के रैक में देखना चाहता था इसलिए मैनें कुछ आस्ट्रेलियाई प्रकाशकों को अपने उपन्यास की पाण्डुलिपि भेजी थी । उसी समय मैंने सोचा कि क्योंकि यह अमरीका के प्रकार की एक कहानी है तथा यह लॉस एंजलिस में कोका - कोला कंपनी पर ही आधारित है, क्योंकि लॉस एंजलिस यथार्थ के उपर कल्पना तथा आभास के बारे में कहानी गढ़ने के लिए एक आदर्श स्थान था । इसलिए मैंने दर्जनों पत्र अमरीकी साहित्य एजेंटो को भेजे और उनमें से एक ने उत्तर दिया तथा मुझे स्वीकार किया, एक दिन मुझे बुलाया और कहा कि " हे मैक्स, मैं तुम्हारी पुस्तक का प्रतिनिधि बनना चाहता हूँ । " मैं उसके द्वारा एक अमरीकी प्रकाशक के हाथों बिक गया जिसने पुस्तक के पूरे विश्व के अधिकार ले लिए और फिर आस्ट्रेलिया के अधिकार यहाँ के लोगों को ही वापस बेच दिए । इस तरह मैं एक अमेरिकी प्रकाशक के साथ वाला एक आस्ट्रेलियाई लेखक बन गया ।
स्यू सलेमन :
" यह एक हास्य-पुस्तक है, जिसे हम आस्ट्रेलिया में " एक सेंड अप " कहते हैं । " क्या आप यह मानते हैं कि एक आस्ट्रेलियाई लेखक होने से यह अलग दिखती है अन्यथा इसमें ऐसा कुछ नहीं है जिसे आप केवल आस्ट्रेलिया में ही पाते हो ?
मैक्स बैरी :
हाँ, हम इस प्रकार की पुस्तकों को एक " पिस-टेक " कहते हैं और यह उसी प्रकार की पुस्तक है जो अपने हास्य के कारण आस्ट्रेलियाई लोगों को अच्छी लगती है । कुछ लोगों ने मुझे बताया कि उन्होंने इस पुस्तक को पढ़ा और काफ़ी आनंद उठाया, वे यह नहीं जानते थे कि मैं भी एक आस्ट्रेलियाई हूँ क्योंकि पुस्तक में ऐसा पता लगाने के बहुत कुछ नहीं था पर जब उन्हें यह पता लगा तो इससे काफ़ी फर्क पड़ा । उन्होंने हास्य-वृत्ति को पहचाना ।
स्यू सलेमन :
मैक्स मैं सोचती हूँ कि इस पर " सीरप " से थोड़ा सा कुछ सुना जाए जो लोगों को विपणन (यानी मार्केटिंग) को बढ़ाने के प्रकार का मज़ा दे, और इस पुस्तक के पात्रों में से मैं सोचती हूँ " स्नीकी पीट " खुद भी एक विपणन वाला व्यक्ति है तथा वह विपणन क्या है को ऊपरी तरीके से संक्षेप में बताता है ?
मैक्स बैरी :
स्नीकी पीट मेरे संपर्क में आए व्यक्तियों में से सबसे धीर है, यह थोड़ा बहुत तो उसकी अद्भुत संजीव फैशन समझ के कारण है पर मुख्यतः इसलिए है क्योंकि वह कम बोलता है जिससे उसके आस-पास बराबर आत्मविश्वास की एक हल्की रहस्मय हवा बनी रहती है । मैं स्नीकी पीट से कैल स्टेट में अपने अंतिम सत्र के दौरान एक विपणन कार्यक्रम के दौरान मिला और हम दोनों दोस्त बन गए जो उसकी कम बातें करने की आदत को देखते हुए आश्चर्यजनक रूप से सरल था । यह तर्कसंगत था कि हम दोनों एक एल.ए. अपार्टमेंट ढूंढने के लिए अपने संसाधनों को इकट्ठा करें विशेषकर जब स्नीकी पीट के संसाधन मुझसे काफ़ी ज्यादा थे । मैंने कहीं पढ़ा था कि किसी के पास औसतन प्रति वर्ष मिलियन डॉलर कमाने के तीन विचार आते हैं, एक वर्ष में ऐसे तीन विचार जो आपको अरबपति बना सकते हैं । मेरा अनुमान है कि कुछ के पास ऐसे विचार ज़्यादा आते हैं और कुछ के पास कम परंतु यह मानना सुरक्षित रहेगा कि हम में से सबसे मूर्ख को भी अपने जीवनकाल के दौरान कम से कम एक तो ऐसा बड़ा विचार आता होगा । मेरा विचार एक नए कोला के लिए है, यह महत्वपूर्ण है क्योंकि सोडा बाज़ार बहुत बड़ा है । यह इतना बड़ा है कि यदि कोई नया उत्पाद बाज़ार के एक छोटे से भाग में भी कब्ज़ा कर लेता है तो आय लाखों डालर होगी । इसलिए नए कोला का विचार काफ़ी उत्साहवर्धक है । "
स्यू सलेमन :
मैक्स बैरी, एक विपणन वाले व्यक्ति से पूर्णकालिक लेखक बन गए और उनकी अगली पुस्तक " जेनिफर गवर्नमेन्ट " भूमण्डलीकरण के बारे में है । पर उनकी एक "फील-गुड स्टोरी " है जो आस्ट्रेलियाई साहित्य परिश्य में अपवाद है ।
जॉन अरनाल्ड ने आस्ट्रेलियाई प्रकाशन में कार्य किया है और वह मोनेश विश्वविद्यालय में सामाजिक तथा राजनीतिक जाँच विद्यालय के अध्यक्ष है ।
जॉन अरनाल्ड :
" यह एक महान कथा है पर मैं सोचता हूँ कि यह नियम की बजाय अपवाद है और शायद मैक्स की अपनी विपणन पृष्ठभूमि ने उसकी वहाँ सहायता की । आजकल प्रकाशक बिना सिफारिश वाली पाण्डुलिपि को स्वीकार नहीं करते, आपको साहित्यिक एजेंट के माध्यम से ही उनके पास जाना पड़ेगा और कथा साहित्य को प्रकाशित करवा पाना बड़ा ही मुश्किल होता है क्योंकि आस्ट्रेलिया में मांग इसकी कम जनसंख्या को देखते हुए दो अथवा तीन हज़ार प्रतियों की होती है और यही सफलता तथा विफलता के मध्य बारीक रेखा है । और प्रकाशक जिनके साथ लेखा - जोखा रखने वाले व्यक्ति होते हैं तथा जिन्हें बजट का ध्यान रखना होता है अक्सर सुरक्षित उपन्यास छापते हैं पर कभी - कभी अधिक प्रयोग करने वाले मैक्स के जैसे तथा अन्य उपन्यासों को छापते हैं जो अपने दूसरे तथा तीसरे संस्करणों में बहुत अच्छे बिकते हैं । "
स्यू सलेमन :
आप आस्ट्रेलियाई प्रकाशन उद्योग की स्थिति के बारे में क्या कहेंगे, क्या यह वर्तमान में अच्छी है, क्या हमें पर्याप्त आस्ट्रेलियाई शीर्षक देखने को मिल रहे हैं, आस्ट्रेलिया में आस्ट्रेलियाइयों द्वारा साहित्य अथवा तथ्य क्या लिखा जा रहा है ?
जॉन अरनाल्ड :
मैं सोचता हूँ कि यह काफ़ी अच्छी है । कई वर्षों से लोग इंटरनेट तथा इलेक्ट्रोनिक साधनों से किताबों के खत्म होने की संभावना पर चर्चा कर रहे हैं पर आप किताबों की दुकानों में जाइए और वहाँ ढ़ेर सारी आस्ट्रेलियाई किताबें होगी, वहाँ आस्ट्रेलियाई पुस्तक समीक्षा होगी जो पूर्णतः आस्ट्रेलियाई पुस्तकों की समीक्षा करने में समर्पित है, और पुस्तकें, लेखन, काव्य, उपन्यास आदि हमेशा रहेंगे जो कि किसी देश को परिभाषित करने में सहायता करेंगे । यह तर्क अक्सर दिया जाता है कि कोई देश अपने साहित्य से परिभाषित होता है तथा आस्ट्रेलिया की विशेषताएँ इसके साहित्य में ही पाई जा सकती हैं । "
(संगीत : लुसिएनों पावारोटी का नेस्सून डोरमा)
स्यू सलेमन :
फ़ुटबॉल और विशेषकर आस्ट्रेलियाई रूलस फ़ुटबॉल जहाँ एक अण्डाकार गेंद के लिए बड़े आदमी भिड़ते हैं - आस्ट्रेलियाई लोकप्रिय संस्कृति का एक अभिन्न भाग है ।
जॉन अरनाल्ड "संस्कृति " को इस प्रकार परिभाषित करते हैं ....
जॉन अरनाल्ड :
" यह काफ़ी मुश्किल है । रेयमंड विलियम्स ने अपनी पुस्तक " की वर्डस " में संस्कृति को 5 अलग-अलग अर्थ दिए हैं । आपके पास लोकप्रिय संस्कृति, उच्च संस्कृति, सामान्यतः किसी प्रकार की संस्कृति, आस्ट्रेलियाई संस्कृति, अमेरीकी संस्कृति और सांस्कृतिक दृष्टिकोण हो सकता है । मैं सोचता हूँ कि आस्ट्रेलिया में आप संस्कृति को साहित्यिक अथवा सृर्जनात्मक उत्पादन मानते हैं पर आपके पास एक लोकप्रिय संस्कृति भी है और इन दिनों एक विद्या के रूप में सांस्कृतिक अध्ययन पल्प कथा साहित्य, पत्रिकाएँ, चमकीली पत्रिकाएँ, खेल को संस्कृति के एक उदाहरण के रूप में देखने में काफ़ी खुश है । "
(संगीत : क्रिस डोहनी का मोर दैन ए गेम)
स्यू सलेमन :
आस्ट्रेलिया रूलस फ़ुटबॉल को एक स्थानीय, घर में उत्पन्न हुआ खेल माना जाता है ।
भले ही फ़ुटी को क्रिकेट, सॉकर तथा रगबी जैसे खेलों, जिनका समर्थन करने वाले हर जगह हैं, से कड़ी प्रतियोगिता का सामाना करना पड रहा हो । मेलबर्न के लेखक जॉन हार्मस इस खेल के भविष्य के प्रति आश्वस्त हैं क्योंकि सिर्फ इसीलिए कि यह खेल स्थानीय संस्कृति में घुला मिला हुआ है ।
जॉन हार्मस :
" यदि हम वास्तव में पागल उत्सुक फ़ुटी को चाहने वाले हैं और निश्चित रूप से हमारा परिवार ऐसा था तो हम अपने जीवन की घटनाओं को उस समय फ़ुटबॉल में क्या हो रहा था के साथ जोड़ते हैं । इस तरह हमारी कई पारिवारिक यादें फ़ुटबॉल की यादों के साथ जुड़ी हैं और मैं सोचता हूँ कि यह फ़ुटबॉल के लिए हमारी भावनाओं को बढ़ाता है विशेषकर जब आप अपने फ़ुटबॉल क्लब में अपने परिवार के माध्यम से आए हों, जैसा कि आस्ट्रेलिया में कई लोगों के साथ होता है । यह लगभग अनुवांशिक है; यह आपको अपने माता-पिता तथा दादा-परदादाओं से विरासत में मिलता है । इस तरह मैं जिलांग परिवार से हूँ और मैं इसके बारे में अधिक कुछ नहीं कर सकता, यह उन सभी कारणों से मेरा एक भाग है ।
स्यू सलेमन :
अब आप अपने परिवार के बारे में बताएँ, आस्ट्रेलियाई रूल्स केवल एक खेल से अधिक ही नहीं, कई अंग्रेज-आस्ट्रेलियाई के उस मशहूर गीत के शब्दों में यह उन लोगों के लिए जिन्हें हम अनोखे "नए आस्ट्रेलियाई " अथवा नए आगंतुक कहा करते थे जिसमें मैं सोचती हूँ कि आपके अपने परदादा शामिल होंगे, एक महत्वपूर्ण मनोरंजन बन गया था ?
जान हार्मस :
जी, हाँ । यदि आप निश्चित रूप से 19वीं सदी के मध्य से द्वितीय विश्व युद्ध तक का इतिहास देखें तो आपको अधिकतर एंगलो - सेलटिक देखेंगे, जो उस समय जनसंख्या का प्रमुख घटक थे । और फिर उसके बाद युद्ध पश्चात का प्रवास है । "
(एस.एफ.एक्स. : फ़ुटबॉल दर्शकों की आवाज़)
स्यू सलेमन :
फ़ुटबॉल खिलाड़ी , टोनी लिबराटोर युद्ध पश्चात के इटली प्रवासी का पुत्र है जो दूसरी पीढ़ी के उन आस्ट्रेलियाई लोगों में से एक है जिन्होंन आस्ट्रेलिया रूल्स फ़ुटबॉल को खेला तथा इसमें दिलचस्पी रखी ।
फ़ुटबॉल समर्थकों के लिए वह एक बड़ा ही भावुक दिन था जब " लिब्बा " नाम का खिलाड़ी " द बुलडाग्स " के लिए 17 वर्ष तक खेलने के पश्चात सेवानिवृत्त हुआ ...
(एस.एफ. एक्स : फ़ुटी एफ. एक्स तथा इटली वासी आस्ट्रेलियाई समर्थक)
" शुभकामनाएँ लिब्बा, लिब्बा के साथ बुल्डाग्स का अनुसरण विलक्षण रहा, हमने सबसे छोटा खिलाड़ी खो दिया पर उसका दिल सारे लोगों में सबसे बड़ा था । मैं देख सकता हूँ कि तुम्हारा नाम इतिहास में टेडी विटन के साथ लिखा जाएगा, शुभकामनाएँ लिब्बा, बहुत बढ़िया खेले, हमने तुम्हारे सफर के हर पल का लुत्फ उठाया ।
फ़ुटबॉल समर्थक :
" मैं 1955 में आया था और मैंने 1956 में बैरेकिंग प्रारम्भ की और मैंने कभी ज़्यादा खेल नहीं छोड़े, इस सारे समय के दौरान लगभग 15 से 20 खेल । हमारा डैनी डेलरॉय बुलडाग्स के लिए खेलता था इसलिए हमारा डेलरॉय परिवार है, डैनी डेलरॉय जो खेल रहा है वह हमारा भतीजा है ।
स्यू सलेमन :
तो आपके फ़ुटबॉल क्लब से पारिवारिक संबंध है ...
" और यदि कई गैर-अंग्रेज आस्ट्रेलियाई इस खेल के लिए पागल है तो कई स्वदेशी आस्ट्रेलियाई भी जो इसके श्रेष्ठ खिलाड़ियों में आते हैं । बैरी जूड जो जिनकी अपनी एक मूलनिवासी विरासत है और मोनेश विश्वविद्यालय में स्वदेशी अध्ययन केन्द्र में पढ़ाते हैं, ने फ़ुटबॉल के पहले स्वदेशी सितारों में से एक सिड जैक्सन की जीवनी पर अनुसंधान किया है :
बैरी जुड :
" सिड पश्चिमी आस्ट्रेलिया में रोलैण्ड नामक एक मिशन में बड़ा हुआ था, एक ऐसा स्थान जहाँ खेल को प्रोत्साहित किया जाता तथा जहाँ उस संस्थान में मूलनिवासी बच्चे फ़ुटबॉल खेलने में बहुत अच्छे थे क्योंकि वे लगातार अभ्यास करते रहते और जिस संदर्भ में कई स्वदेशी लोगों को इन मिशन पर लाया जाता उसने फ़ुटबॉल को आकर्षक बना दिया । यह खेल शहर में भी बागों में खेला जाता है और आपको इस खेल को खेलने के लिए अधिक संसाधनों की आवश्यकता नहीं होती बल्कि केवल एक फ़ुटबॉल चाहिए होती है । इस तरह इस संबध में तो मूलनिवासी लोगों के लिए हमारे राष्ट्रीय खेल क्रिकेट के बजाय फ़ुटबॉल खेलना आसान होता है खेल के कई इतिहासकार अब यह मानते हैं कि संभवतः फ़ुटबॉल का हमारा आधुनिक नियमों वाला खेल एक पुराने देसी खेल से निकला हुआ है जिसमें अक्सर तारकोल के साथ भरी हुई पोसम खाल की एक गेंद हुआ करती थी और उस परंपरागत खेल की निश्चित विशेषता ऊपरी चिन्ह् था जो आधुनिक खेल की भी एक विशेषता है । "
(संगीत : ग्रेग चैम्पियन का दैटस द थिंग अबाउट फ़ुटबॉल )
स्यू सलेमन :
बैरी जूड द्वारा सिड जैक्सन की जीवनी ब्लैक तथा ब्ल्यू कहलाती है और उससे पहले जॉन हार्मस फ़ुटबाल के बारे में लिख चुके जिसकी किताब लूज़ मेन एवरीवेयर कहलाती है ।
अगले सप्ताह... "आस्ट्रेलियाई राजनीति का बदलता रूप"
तब तक के लिए मेरा यानी - स्यू सलेमन का नमस्कार...... मेलबर्न के मोनेश विश्वविद्यालय के नेश्नल सेंटर फार आस्ट्रेलियन स्टडीज़ को शैक्षिक सलाह के लिए तथा तकनीकी निर्देशन के लिए रेयान ईगन को मेरा धन्यवाद।
