कार्यक्रम ११- आस्ट्रेलियाई राजनीति का बदलता रूप
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(संगीत : आर्डर इन द हाउस पार्लियामेन्टरी ब्राडकास्टस तथा इफैक्टस फ्रॉम पार्लियामेन्ट से थीम)
संसदीय अध्यक्ष :
"विदेश मंत्री"
नेता 1 :
"अध्यक्ष महोदय मेरे द्वारा कल दिया गया वक्तव्य बिल्कुल सही है और यह एक नीति तथा एक मामला बना रहता है ।
नेता 2 :
"यह मामला रहता है और मैंने जो करने का वादा किया था, वही किया है ।"
" आप एक ढोंगी बातूनी हो ... "
नेता 1 :
यह मेरा उनके प्रति कर्तव्य है, यह मेरा आस्ट्रेलियाई लोगों के प्रति कर्त्तव्य है और यह ... "
अध्यक्ष :
" मंत्री जी, मंत्री सदन के बाहर जाइए।
स्यू सलेमन :
नमस्कार वर्तमान आस्ट्रेलिया में आपके साथ है स्यू सलेमन । आज : आस्ट्रेलियाई राजनीति का बदलता रूप । द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की अधिकतर अवधि में आस्ट्रेलिया में एक बहुत ही स्थिर राजनीतिक व्यवस्था रही है जिसमें दो प्रमुख राजनैतिक पार्टियों का वर्चस्व रहा है : लेबर तथा लिबरल ।
और जहाँ छोटी पार्टियों तथा निर्दलीयों से सम्कालीन राजनैतिक परिदृश्य में कुछ चुनावी अस्थिरता आई है, एक संसदीय स्थिर कारक जो अक्सर विदेशी आगंतुक को चकित करता है वह यह है कि सदन में बहस कितनी तेज़ तथा दंगाई हो सकती है ...
संसदीय मंत्री :
" मंत्री जी क्या यह तथ्य तथा नैतिक रूप से निन्दनीय नहीं है कि यह वक्तव्य बिल्कुल भी सत्य नहीं है । "
मंत्री :
" इस देश के लिए अब वास्तविक प्रश्न यह है कि आप उसका समर्थन क्यों नहीं करेंगे ? आप जानते हैं कि ऐसे दावे संघीय अदालत में किए जा सकते हैं, तो आप क्यों नहीं करते, इस प्रश्न का उत्तर आपको देना ही होगा ? "
मंत्री :
" आप एक बिना साहस वाले नेता हैं और आप यह जानते हैं कि आप अभी तक के सबसे डरपोक नेता हैं ... "
विदेशी दर्शक :
" निश्चित रूप से तेज़ तर्क-वितर्क चल रहा है और इनमें से कुछ तर्क-वितर्क तो बंद दरवाजों के पीछे होंगे ... यहाँ वे खुले आम एक दूसरे पर चिल्लाएँगे और यदि किसी राजनेता को दूसरा राजनेता अच्छा नहीं लगता तो वह ज़रूर उसे यह बताएगा और यह सुनिश्चित करेगा कि जब वो ऐसा करे तो सभी कैमरे उसकी ओर हों ।
दर्शक :
राजनीति में जो वस्तु विशेषकर मेरा ध्यान आकर्षित करती है वह व्यक्तिगत आक्षेपों की मात्रा है । आप स्वीडन में पाएँगे कि आप किसी अन्य राजनेता पर व्यक्तिगत हमला करने की कल्पना नहीं कर सकते, हाँ उसके कथन पर अथवा उसके राजनैतिक तर्कों पर कर सकते हैं, पर इस तरह नहीं जैसा आप यहाँ देख रहे हैं ।
अध्यक्ष :
" मंत्री, मंत्री जी ... "
मंत्री :
" आइए बहस करें, आइए ना, थोड़ी हिम्मत दिखाइए ... "
अध्यक्ष :
" मंत्री वापस अपनी सीट पर बैठ जाएँ । "
मंत्री :
" यह एक कलंक है और उसके लिए सरकार का समर्थन एक कलंक है और प्रधानमंत्री को इस नीच का समर्थन करने के लिए अपने ऊपर शर्मिन्दा होना चाहिए ।
डॉ. निक इकोनोमू :
" हमने एक बहुत ही मुखर बहस देखी जहाँ लोग एक दूसरे पर आक्षेप लगा रहे थे और जैसा कि हम आस्ट्रेलियाई राजनीति में कहते हैं वे आदमी से खेलना पसंद करते हैं, जो कि आस्ट्रेलियाई रूल्स फ़ुटबॉल तथा रगबी की हिंसा को दर्शाने वाला खेल का एक अन्य रूपक है । "
स्यू सलेमन :
मोनेश विश्वविद्यालय के डॉ. निक इकोनोमू जहाँ इस पर सहमत हैं कि संसद आस्ट्रेलियाई समाज तथा खेल को भी प्रतिबिम्बित करती है, यह अन्य वेस्टमिनस्टर संसदीय प्रणालियों से अलग नहीं है ...
डॉ. निक इकोनामू :
" आस्ट्रेलिया में वेस्टमिनस्टर संसदीय प्रणाली है और वेस्टमिनस्टर प्रणाली की प्रकृति ही विरोधात्मक है । निश्चित रूप में जब नेता एक दूसरे पर आक्षेप लगाते हैं तो कुछ आस्ट्रेलियाई विशेषताएँ उभर कर आती हैं, परंतु यदि आप में से कोई ब्रिटिश संसद, कनाडा की संसद, भारतीय संसद, न्यूजीलैण्ड की संसद के कार्य से परिचित है तो आप कई ऐसी वस्तुएँ पाएँगे जो आस्ट्रेलिया जैसी हैं । इस तरह आस्ट्रेलिया की अभद्र व्यवहार करने, व्यक्ति पर राजनीति करने तथा प्रचलित बोलचाल की भाषा का प्रयोग करने की प्रवृत्ति, आदर्शवादी अथवा दार्शनिकों की भाषा नहीं बल्कि आम आदमी की भाषा, हमारे वेस्टमिनस्टर प्रणाली के साथ अच्छी तरह मेल खाती है । यह रोचक है कि आस्ट्रेलियाई संसद में, जिसका प्रसारण समूचे आस्ट्रेलिया में एक अलग संसदीय नेटवर्क पर होता है, कभी- कभी बहस का स्तर इतना गिर जाता है, अपमान इतना शर्मनाक होता है, बाधा डालना इतनी अधिक बार होता है कि श्रोता आस्ट्रेलिया प्रसारण निगम को फोन करके शिकायत करते हैं और इन शिकायतों को सदनों के पीठासीन अधिकारियों को दिया जाता है, प्रतिनिधि सदन के मामलों में अध्यक्ष तथा सेनेट के सभापति, जो सदस्यों से कहेंगे कि देखिए हमें श्रोताओं से शिकायतें मिली हैं जो संसद में बहस के स्तर से खिन्न हैं । मैं सदस्यों से अपने स्तर को ऊंचा उठाने के लिए प्रयास करने का आहवान करता हूँ । इस प्रकार भले ही यह आस्ट्रेलियाई समाज का प्रतिबिम्ब हो कभी-कभी समाज में उनके प्रति थोड़ा-बहुत अविश्वास तथा थोड़ी बहुत निराशा होती है ओर मैं सोचता हूँ कि वह चाहते हैं कि राजनीतिज्ञों को एक आधरभूत तरीके से व्यवहार करना चाहिए । "
स्यू सलेमन :
" प्रधानमंत्री जॉन हार्वड के नेतृत्व वाली वर्तमान संघीय सरकार लिबरल पार्टी तथा नेशनल पार्टी के मध्य गठबधन है ।
इस गठबंधन ने 1996 में आस्ट्रेलियाई राजनीति में एक अन्य प्रमुख शक्ति लेबर पार्टी से सत्ता जीती थी । निक इकोनोमू मुख्य राजनैतिक पार्टियों की विशेषताएँ इस प्रकार बताते हैं ...
डॉ. निक इकोनोमू :
" मैं यह कह कर प्रारंभ करता हूँ कि दलीय राजनीति आस्ट्रेलिया के लिए बहुत महत्वपूर्ण है । पूरा तंत्र पार्टियाँ बनाता है, विशेषकर प्रमुख पार्टियाँ जो तीन हैं । पहली आस्ट्रेलियाई लेबर पार्टी है जो एक ट्रेड यूनियन आधारित पार्टी है, भले ही इसे गैर-यूनियन वाले लोगों से काफ़ी समर्थन मिलता हो । यह हमारी सामाजिक प्रजातंत्र पार्टी है; यह आस्ट्रेलियाई राजनीति के केन्द्र की विरोधी पार्टी मानी जाती है । इसकी सबसे बड़ी विरोधी केन्द्र की समर्थक लिबरल पार्टी ऑफ आस्ट्रेलिया है जिसका गठन द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात किया गया था । इसके अस्तित्व का मुख्य कारण उनके हितों को बढ़ावा देना है जिन्हें वे मध्यम वर्गीय आस्ट्रेलियाई उद्यमी मानते हैं और ट्रेड यूनियन की शक्ति का विरोध करना जिसे वे बहुत अधिक मानते हैं । लेबर तथा लिबरल, दोनों प्रमुख पार्टियाँ हैं तथा इनका आधार शहर में है । लिबरलों को विक्टोरिया के पश्चिमी ज़िले, दक्षिणी आस्ट्रेलिया तथा टेस्मानिया के गाँवों के किसानों का विशेषकर समर्थन है । एक तीसरी पार्टी भी है जिसको मैं समझता हूँ कि उल्लेख करना होगा, वह नेशनल पार्टी है जिसे कंट्री पार्टी भी कहा जाता था । इसके समर्थन करने वाले मतदाताओं का जमावड़ा मररी डार्लिग बेसिन में है जो मुख्यतः क्वीनसलैण्ड, न्यू साउथ वेल्स तथा विक्टोरिया से गुज़रता है । यह एक किसानों की पार्टी है तथा लिबरल पार्टी के साथ गठबंधन में कार्य करती है, यह अपने को एक व्यापार समर्थक, निजी उद्यम की समर्थक पार्टी के रूप में देखती है । उसकी चिंता ट्रेड यूनियन की शक्ति के प्रति भी है भले ही इसका इतिहास एक ऐसी पार्टी का रहा है जिसने कृषि उत्पादन करने तथा उसे बनाए रखने के लिए अर्थव्यवस्था में सरकार के व्यापक हस्तक्षेप की वक़ालत की थी, विशेषकर उस समय के दौरान जब चीज़ों के अंतर्राष्ट्रीय मूल्य में काफ़ी उतार-चढ़ाव आ रहे थे । ये तीन प्रमुख पार्टियाँ हैं जिनके लिए अधिकतर आस्ट्रेलियाई, 80 से 90 % के बीच वोट देते हैं । "
स्यू सलेमन :
" आस्ट्रेलिया की राजनीतिक स्थिरता प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के बड़े भाग में प्रभुत्व तथा इसकी संघीय राजनीतिक प्रणाली के कार्य करने के कारण भी है ।
जहाँ कैनबरा में संघीय सरकार आय तथा सामान्य बिक्री कर या जी.एस.टी. दोनों के लिए प्रमुख कर संग्रहकर्ता है, वहीं "राजकोषीय संघवाद " की प्रणाली यह सुनिश्चित करती है कि राष्ट्रीय सरकार, सरकारी सेवाओं को बहुत कम बसे हुए राज्यों तथा साथ ही पूर्वी तट के ऊपर तथा नीचे बसे राज्यों, जहाँ अधिकाँश आस्ट्रेलियाई रहते हैं, के लोगों में एक समान रूप से बाँटें ।
न्यू साउन वेल्स विश्वविद्यालय से राजनीतिक वैज्ञानिक, डॉ. एलैन थॉमसन...
डॉ. एलैन थॉमसन :
" हमारे यहाँ लंबे समय से राजकोषीय समकरण की एक प्रणाली है जो बहुत आडम्बरी लगने वाला शब्द है जिसका मूल रूप में अर्थ यह होता है कि पिछले 100 वर्षों से सरकार इस विचार के लिए प्रतिबद्ध है कि प्रत्येक व्यक्ति जहाँ कहीं भी वह रहता हो, चाहे वह दूर-दराज़ के गाँव में हो अथवा उत्तरी प्रदेश में या पर्थ में, उसे सरकारी सेवाएँ समान स्तर तथा समान लागत, अथवा वह समान लागत के जितनी निकट हो सके, पर मिलेंगी । आप अमीरों से लेकर कम समर्थ व्यक्तियों को दे रहे हैं, इस प्रकार पैसा, करों का पैसा कहें, जो मूल रूप से सिडनी, जो कि एक बड़े आर्थिक केन्द्रों में से है, से उगहाया गया है को केवल इस प्रकार ही फिर से बाँटा जाएगा कि न्यू साउथ वेल्स, जिस राज्य में सिडनी के कोने-कोने में ही नहीं बल्कि समूचे आस्ट्रेलिया में, राज्य की सीमाओं से परे लोगों की अस्पताल, स्कूल तथा अन्य सरकारी सेवाओं पर पहुँच हो । इस प्रकार सिडनी का पैसा टेस्मानिया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उन्हें भी वे ही सुविधांए मिलें ।"
स्यू सलेमन :
1980 के दश्क से आस्ट्रेलिया की सार्वजनिक नीति पर नव- उदारवाद अथवा जिसे आस्ट्रेलियाई सार्वजनिक बहस में आर्थिक बुद्धिवाद कहा जाता है, का प्रभुत्व है; एक ऐसे तरीके से अर्थव्यवस्था का प्रबंध करना जिसकी विशेषताएँ अधिशेष बजट, करों में कटौती तथा सार्वजनिक व्यय को सीमित करना है ।
पूर्व लेबर प्रधानमंत्रियों, बॉब हॉक तथा पॉल कीटिंग ने 1980 के दशक तथा 1990 के दशक के प्रारम्भ में आस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था के विनियंत्रण तथा इसके उदार बनाए जाने को सुनिश्चित किया ।
1996 में चुनी गई जॉन हावर्ड के नेतृत्व में लिबरल नेशनल पार्टी गठबंधन की सरकार आर्थिक प्रबंधन के प्रति खुले बाज़ार की पद्धति के लिए प्रतिबद्ध है ...
डॉ. एलैन थॉमसन :
" पिछले 20 वर्षों में वह ऐतिहासिक प्रतिबद्धता जिसके बारे में हम में से कई बात कर रहे थे और जिसे आस्ट्रेलिया में राजनैतिक स्थिरता के स्तर में बड़े कारकों में से एक माना जाता था, उसी समकरण को प्रतियोगिता तथा अर्थव्यवस्थाओं को चलाने के इस नए तरीके के नाम पर वापिस लिया जा रहा है । इस तरह हमारे पास सार्वजनिक तथा निजी दोनों क्षेत्रों में वहाँ बड़े स्तर पर की जा रही कटौतियों के उदाहरण हैं जहाँ भारी राज सहायता वाली गैर-आर्थिक सेवाओं को क्षेत्रीय तथा ग्रामीण क्षेत्रों में जाते हुए देखा जा रहा है । इसका परिणाम अस्पताल, स्कूल, चिकित्सा सेवाओं, डाकघर तथा बैंक आदि को बंद करना हुआ है । और इसका परिणाम जैसा कि बताया जा रहा है नेशनल पार्टी, वही जो आस्ट्रेलिया में ग्रामीण इलाकों की पार्टी थी, राष्ट्र की पार्टी, के साथ मतदाताओं का मोह भंग होना है, जो यह महसूस करते हैं उन्हें क्षेत्रीय तथा ग्रामीण आस्ट्रेलिया में धोखा दिया गया है । और इसके प्रति राजनैतिक प्रतिउत्तर अब आ रहा है जहाँ अब सरकार इस विचार पर लौट रही है, यद्यपि वे इस भाषा का प्रयोग नहीं करते, तथा गाँवों को ऐसी सुविधाओं पर एक बार फिर समान पहुँच देने के लिए वास्तव में अन्तर राज सहायता दे रही है । "
स्यू सलेमन :
आर्थिक बुद्धिवाद का मोह दूर होना 1996 में उस समय नाटकीय रूप से स्वयं तब स्पष्ट हुआ जब पॉलीन हैन्सन की वन नेशन पार्टी पहली बार एक शक्ति समझी जाने लगी जैसा कि डॉ. निक इकोनोमू स्पष्ट करते हैं ...
डॉ. निक इकोनोमू :
" इसमें कोई शक नहीं कि ग्रामीण तथा क्षेत्रीय आस्ट्रेलिया ने अपने आप को पुराने दिनों की मध्यस्थता से अलग नीतिगत वाद-विवाद में हारने वाला पाया है क्योंकि मध्यस्थता के अन्तर्गत आप सरकार का व्यापक हस्तक्षेप करवा सकते थे और नेशनल पार्टी अथवा ओल्ड कंट्री पार्टी द्वारा अपनाई गई लोकप्रिय नीतियों में से एक विकेन्द्रीयकरण की थी, जिसमें आप उद्योगों को ग्रामीण तथा क्षेत्रीय केन्द्रों में स्थापित करने के लिए राज-सहायता तथा करों में रियायत की एक श्रृंखला से प्रोत्साहित करे हस्तक्षेप कर सकते थे । वह सब समाप्त हो चुका है, इस सब को राज्य तथा संघ सरकार दोनों द्वारा त्यागा जा चुका है और हम अब बाज़ार अभिमुख पद्धति के बारे में अधिक बात कर रहे हैं ।
स्यू सलेमन :
क्या मतदाता अपने आप को छोडा हुआ महसूस करते हैं ?
डॉ. निक इकोनोमू :
" वह ऐसा महसूस कर रहे हैं और यह कई कारणों में से एक है कि क्यों वन नेशन जैसी पार्टी 1996 में आई और उसने 1998 के संघीय चुनावों में प्रभाव डाला, 2001 के संघीय चुनावों में इसका अधिक प्रभाव नहीं पड़ा परन्तु कुछ राज्यों में वन नेशन ने 2001 में भी काफ़ी अच्छा किया । यह एक ऐसी पार्टी थी जिस पर शुरू में नस्ल तथा आप्रवास पर इसकी स्थिति के कारण ध्यान गया, यह अपनी कई नीतियों में काफ़ी नस्लवादी थी तथा यह आप्रवास की बहुत विरोधी थी, परंतु बहुत ही जल्द इसने प्रमुख पार्टियों के प्रति और आर्थिक बुद्धिवाद, निजीकरण, सरकार के हस्तक्षेप को त्यागना के खिलाफ ग्रामीण तथा क्षेत्रीय असंतोष को उठाया और लोगों ने इसके आहवान का उत्तर दिया । "
स्यू सलेमन :
वन नेशन के पीछे मुख्य व्यक्तित्व पॉलीन हैन्सन 1998 में प्रतिनिध सदन की अपनी सीट गँवा बैठीं और 2001 में जब सेनेट के लिए लड़ीं तो पुनः चुने जाने में असफल रहीं ।
राष्ट्रीय संसद में वन नेशन का एकमात्र सेनेटर है भले ही वह अब एक निर्दलीय के रूप में बैठता है ।
और जहाँ पश्चिमी आस्ट्रेलिया राज्य की संसद में वन नेशन के कुछ सांसद हैं पर उनका राजनैतिक प्रभाव इस तथ्य से निष्प्रभावी हो जाता है कि उस राज्य के सदन में उनसे अधिक ग्रीन तथा पर्यावरण समर्थक हैं ।
ग्रीन तथा निर्दलियों की सफलता के साथ पॉलीन हैन्सन वाली घटना इस मत को प्रतिबिम्बित करती है कि दोनों प्रमुख राजनैतिक पार्टी आपस में निकट आई हैं, विशेषकर आर्थिक मुद्दों पर और मुख्य धारा की राजनीति से मोह भंग होने से विकल्प तलाशने वाले मतदाताओं की संख्या बढ़ी है ।
डॉ. निक इकोनोमू :
" ग्रीनस ने पिछले संघीय चुनाव में काफ़ी अच्छा प्रदर्शन किया इसलिए नहीं कि किसी बड़े पर्यावरणीय मुद्दे पर बहस की जा रही थी इसके विपरीत पर्यावरण तो बहस में बमुश्किल ही आया । बल्कि ग्रीनस ने शरण माँगने वालों को आस्ट्रेलिया आने की अनमुति न देने की लिबरल तथा नेशनल पार्टी की नीति के खिलाफ प्रचार किया और श्री हावर्ड की नीति का विरोध करके पूरे राष्ट्र में लगभग 10 प्रतिशत वोट लिए तथा साथ ही सेनेट की दो सीटें भी जीत गए । इसलिए तर्क यह है कि प्रमुख राजनैतिक पार्टियाँ अभिसारित हो रही हैं तथा इससे मतदाताओं के मध्य असंतोष बढ़ा है और उन्होंने अपना मत कुछ ऐसी सीमांत छोटी पार्टीयों को दिया है । "
डॉ. एलैन थॉमसन :
" 25 प्रतिशत आस्ट्रेलिया अब अपने प्रथम वरीयता मतों में प्रमुख दलों को मत नहीं देता और यहाँ इसे उन श्रोताओं को स्पष्ट किए जाने की आवश्यकता है जो आस्ट्रेलियाई प्रणाली के बारे में कुछ नहीं जानते ।"
स्यू सलेमन :
एलैन थॉमसन स्पष्ट करते हैं कि किस प्रकार लोगों ,द्वारा चुने जाने वाले प्रतिनिधि सदन के लिए मतदान की वरीयता प्रणाली चाहे सरकार हारे या जीते सदन में प्रमुख दलों का प्रभुत्व सुनिश्चित रहता है....
डॉ. एलैन थॉमसन :
" यदि हमारे यहाँ मतदान की अमरीका अथवा ब्रिट्रेन वाली प्रणाली होती, जिसने प्रतिनिधि सभा के लिए आप जाकर केवल जिस व्यक्ति को चुनना चाहते हैं उसके नाम के आगे निशान लगा देते हैं और बस यहीं मतदान का अंत होता है और जिस पर सबसे ज़्यादा निशान लगते हैं वही जीत जाता है, तो हमारी संघीय संसद के प्रतिनिधि सदन में कई छोटे दल तथा निर्दलीय होते । पर क्योंकि हमारे यहाँ वरीयता मतदान की यह असाधारण प्रणाली है जिसमें आप केवल तभी चुने जाते हैं जब आपको 50 प्रतिशत से एक मत अधिक मिले, इस तरह छोटे दलों के मत अंत में उन व्यक्तियों के मध्य वितरित हो जाते हैं जिन्हें उन्होनें अपनी दूसरी अथवा तीसरी प्राथमिकता दी थी जो इस पर निर्भर करता है कि प्रमुख दल उनके मतदान प्रारूप में कहाँ है । इस तरह वरीयता मतदान ने, यदि आप एक स्तर पर यह सुनिश्चित करते हुए कि प्रमुख दलों का संघीय राजनीति में प्रभुत्व बना रहे, राजनीतिक प्रणाली को स्थिर रखने में सहायता की है पर वहीं दूसरी ओर मैं सोचती हूँ कि इसका अर्थ यह भी है कि लोगों का असंतोष इन प्रमुख दलों द्वारा पर्याप्त रूप में महसूस नहीं किया गया है । जूता काट तो रहा है पर बहुत ज़ोर से नहीं काट रहा है और यह आंशिक रूप से मतदान की वरीयता प्रणाली के कारण है । "
स्यू सलेमन :
ऊपरी सदन अथवा सेनेट में यह बिल्कुल अलग कहानी है जहाँ छोटे दलों तथा निर्दलियों के पास वास्तव में शक्ति का संतुलन होता है ।
ऊपरी सदन में निर्वाचित होने में उनकी सफलता काफ़ी तौर पर अनुपातिक मतदान की प्रणाली के कारण है जो सेनेट के चुनाव के लिए कार्य करती है ।
डॉ. निक इकोनोमू :
" ऊपरी सदन सेनेट में हमारे यहाँ अनुपातिक प्रतिनिधित्व है, एक पूर्णतः अलग प्रणाली और सेनेट के चुनावों में इस पर निर्भर करते हुए कि यह एक पूरी सेनेट अथवा आधी सेनेट का चुनाव है, उम्मीदवार को एक सीट जीतने के लिए कुल वोट के लगभग चौदह या सात प्रतिशत वोट जीतने पड़ते हैं । और जैसा कि आप देख सकते हैं कि इसमें पचास प्रतिशत जमा एक से काफ़ी अंतर है, जिसका अर्थ है कि कुछ छोटे दल जिनकी निचले सदन में किसी सीट को जीतने की कोई भी आशा नहीं थी उनके लिए सेनेट में सीट जीतने का वास्तव में मौका है । और इस तरह आस्ट्रेलियाई डैमोक्रैट, वन नेशन तथा ग्रीन, जिनकी निचले सदन में सीट जीतने की कोई आशा नहीं थी, ने वास्तव में सेनेट में सीटें जीतीं । इस तरह उनकी संसदीय मौजूदगी है और यह उन्हें काफ़ी महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनाती है । आस्ट्रेलियाई सेनेट एक बहुत ही शक्तिशाली संसदीय सदन है; कानून आस्ट्रेलियाई संसद से नहीं जा सकते यदि सेनेट सहमत न हो तो । और सेनेट के पास बजट विधेयकों को रोकने की शक्ति है और यह सरकार को समय से पहले चुनाव करवाने के लिए बाध्य कर सकता है, जिससे वास्तव में काफ़ी गंभीर राजनैतिक संकट उत्पन्न हो सकता है, जैसा कि 1975 में हुआ था । इसलिए यह तथ्य कि इन छोटे दलों से सेनेटर चुने जा सकते हैं और वे शक्ति का संतुलन बनाए रखते हैं, काफ़ी महत्वपूर्ण है, इस तरह वे आस्ट्रेलियाई राजनैतिक प्रणाली में महत्वपूर्ण भूमिका वाले बन गए हैं । "
स्यू सलेमन :
छोटे दल कुछ निर्दलियों के साथ सेनेट में शक्ति का संतुलन बनाए रखते हैं और कभी-कभी वे सरकार के विधानों को रोक भी सकते हैं ।
सरकार इससे इतनी खिन्न थी कि प्रधान मंत्री हावर्ड विधान को रोकने की सेनेट की समर्थता को हटाने के लिए संवैधानिक परिवर्तन लाने के लिए 2004 में होने वाले अगले संघीय चुनावों के साथ जनमत संग्रह करवाने पर विचार कर रहे थे ।
यह आश्चर्यजनक नहीं था कि अल्पसंख्यक सेनेट दलों ने यह तर्क देते हुए कि सेनेट एक ऐसा निकाय है जो उस समय की सरकार के प्रति विरोध सन्तुलन हो सकता है, इस विचार का विरोध किया था ।
वस्तुतः
सेनेट को अक्सर समीक्षा का सदन कहा जाता है ।
वस्तुत:
इतिहास दर्शाता है कि किसी भी मामले में आस्ट्रेलियाई जनमत संग्रहों में प्रणाली में परिवर्तन के लिए हिचकते हैं, भले ही संविधान में यह आवश्यकता है कि किसी भी परिवर्तन को एक राष्ट्रीय जनमत-संग्रह द्वारा लोगों के समक्ष रखा जाना चाहिए तथा उनका बहुमत मिलना चाहिए और परिवर्तन कर सकने के लिए इसे अधिसंख्यक राज्यों में भी बहुमत मिलना चाहिए ।
आप रेडियो आस्ट्रेलिया की कढ़ी " वर्तमान आस्ट्रेलिया " के 11वें कार्यक्रम - आस्ट्रेलियाई राजनीति के बदलते रूप को सुन रहे हैं ।
(संगीत : एरिक बोगल की स्क्रैप्स ऑफ पेपर एलबम से गुड बाय लकी कंट्री)
1901 से हुए 44 जनमत संग्रहों में से केवल 8 सफल हुए हैं ।
एक उल्लेखनीय सफलता 1967 का जनमत संग्रह था जिसने स्वदेशी आस्ट्रेलियाई को भी अन्य नागरिकों के समान अधिकार दिए ।
एक उल्लेखनीय असफलता 1999 का गणतंत्र जनमत - संग्रह था ।
आस्ट्रेलिया की गणतंत्र बनने की वांछनीयता और स्वदेशी लोगों के साथ पुनःमिलन के बारे में प्रश्न 1990 के दशक के राष्ट्रीय राजनैतिक एजेंडा में काफ़ी ऊपर थे ।
वस्तुतः
कई आस्ट्रेलियाई लोगों ने इन दोनों मुद्दों को जोड़ दिया क्योंकि आस्ट्रेलिया के गणतंत्र बनने के लिए संविधान अथवा संस्थापना चार्टर को दोबारा से लिखा जाना होता और यह तर्क दिया गया कि यह उस भूमि पर जिसे ब्रिटेन ने 1788 में उपनिवेश बनाया था, स्वदेशी लोगों की मौजूदगी को औपचारिक रूप से मान्यता देने का एक अवसर प्रदान करेगा ।
मरसिया लैंगटन एक स्वदेशी मानव-वैज्ञानिक 1996 में बोलती हुईं...
मरसिया लैंगटन :
" कई आस्ट्रेलियाई लोगों की गणतंत्र की इच्छा में मेल-मिलाप की वास्तविक कुँजी है । यदि आस्ट्रेलियाई लोगों ने ब्रिटेन पर निर्भर एक दूर बसे हुए कृत्रिम देश के उलट राजतन्त्र तथा राजतन्त्रीय दर्शन से अपने संबंध तोड़ कर अपनी पहचान ऐसे लोगों के रूप में बनाई है जो सम्राट की भूमिका का उत्तरदायित्व लेते हैं, तो उन्हें 1788 की स्थितियों तथा अंग्रेज इतिहास के अनुसार नहीं बल्कि वर्तमान स्थितियों के अनुरूप कुछ आधारों वाले राष्ट्र के विचार को विकसित करना पड़ेगा तभी वे नए राष्ट्र के नियमों के समूह के भीतर कुछ सिद्धान्त पा कर उन्हें विकसित कर सकते हैं जो हमारे अस्तित्व के अधिकार को स्वीकार करते हों ।
स्यू सलेमन :
मोनेश विश्वविद्यालय में ऐतिहासिक अध्ययन विद्यालय के प्रोफेसर ग्रेम डेवीसन यह तर्क देते हैं कि पॉल कीटिंग ने प्रधानमंत्री के लिए अपना दावा मेल-मिलाप तथा आस्ट्रेलिया के गणतंत्र बनने के संयुक्त मुद्दे पर किया । पर वह आस्ट्रेलियाई जनता को अपने साथ ले जाने में असफल रहे और कीटिंग लेबर सरकार 1996 का संघीय चुनाव जॉन हावर्ड के लिबरल- नेशनल पार्टी के गठबंधन से हार गयी ।
ग्रेम डेवीसन :
मैं सोचता हूँ कि पॉल कीटिंग आस्ट्रेलियाई राष्ट्रत्व को एक प्रकार नैतिक तत्व देने का प्रयास कर रहा था । मैं सोचता हूँ कि वह आर्थिक सुधार, शेष विश्व के लिए आस्ट्रेलिया को खोले जाने, व्यापार अवरोधों को कम करने, अर्थव्यवस्था को विनियंत्रित करने में शामिल था और उसे उसी नज़रिए से देखा जा रहा था जिससे कई लोगों के मन में यह प्रश्न उठा कि स्वयं राष्ट्र क्या है और उसका गठन इस बिना सीमा वाले विश्व में किस प्रकार किया जाना चाहिए । और मैं सोचता हूँ कि जो उत्तर वास्तव में वह दे रहा था वह यह था कि राष्ट्र क्या है कि समझ सबसे पहले स्वदेशी होने के संस्थापन में रहती है और दूसरा ब्रिटेन के साथ संबंध तोड़ने के लिए आगे और एक कदम बढ़ाना । जैसा कि इसके परिणाम निकले मैं सोचता हूँ कई आस्ट्रेलियाई लोगों के मन में शंकाएँ थीं विशेषकर संवैधानिक मुद्दों पर और उन दो मुद्दों पर प्रगति उतनी तेज़ी से नहीं हुई जितनी, मैं समझता हूँ, उसने सोची थी । "
स्यू सलेमन :
हावर्ड सरकार ने 1999 में जब लोगों से गणतंत्र पर जनमत संग्रह करवाया तो इसने सरल रूप में यह नहीं पूछा कि क्या वे आस्ट्रेलिया को एक गणतंत्र बनाना चाहते हैं बल्कि यह कि क्या आस्ट्रेलिया में साम्राज्ञी के प्रतिनिध गवर्नर-जनरल को संसद द्वारा चुने गए एक आस्ट्रेलियाई राष्ट्राध्यक्ष से प्रतिस्थपित किया जाए ।
गणतंत्र पर राय बँटी हुई थी - कुछ राजतंत्र को बनाए रखना चहते थे, कुछ संविधान में न्यूतम परिवर्तन चाहते थे और कुछ अन्य राष्ट्राध्यक्ष को सीधे चुनना चाहते थे; जबकि मुद्दा यह था कि क्या आस्ट्रेलिया वेस्टमिनस्टर संसदीय प्रजातंत्र बना रहेगा या इसे बदलकर एक अमेरीकी राष्ट्रपति प्रणाली अपनानी चाहिए ।
1999 का जनमत - संग्रह असफल हो गया था ।
परंतु प्रोफेसर ग्रेम डेवीसन यह मानते हैं कि गणतंत्र तथा स्वदेशीय आस्ट्रेलियाई लोगों के साथ मेल-मिलाप की एक औपचारिक प्रक्रिया के मुद्दे कभी भी राजनीतिक एजेंडा से नहीं हटे हैं ।
ग्रेम डेवीसन :
" मैं मानता हूँ कि बड़े भाग में उन्हें टाला गया है, इसलिए मैं सोचता हूँ कि वे मुद्दे, उदाहरण के लिए क्या आस्ट्रेलिया गणतंत्र बनता है या नहीं, निश्चित तौर पर अतत: सामने आएँगे । यह हो सकता है कि 90 के दशक के अंत में लोगों द्वारा कल्पना की गई से समय सीमा अधिक हो, पर यह निश्चित रूप से होगा । क्या स्वदेशी होने को और किस प्रकार से राष्ट्रीय सोच में मिलाया जाएगा, यह मैं सोचता हूँ एक रोचक प्रश्न है । मैं सोचता हूँ कि आस्ट्रेलयाई जिस तरीके से भूमि के साथ एक अलग प्रकार का संबंध पुनःस्थापित करने के लिए देख रहे हैं उसमें कुछ समझ है क्योंकि आस्ट्रेलियाई राष्ट्रीयता की मूल समझ, जो सीमाओं तथा अन्वेषण तथा खोज के हमारे विचारों के चारों ओर बनी थी, वास्तव में यह मानती थी कि सब कुछ यूरोपियाई लोगों ने किया था । और अब हम यह देख रहे हैं कि इनमें से कुछ संबंध काफ़ी अधिक समस्याओं वाले तथा शोषण करने वाले हैं तो फिर हम पर्यावरणीय तथा कुछ रूप में आघ्यात्मिक तौर पर दोनों प्रकार से, भूमि के साथ एक अलग प्रकार के संबंध के प्रारूप के लिए स्वदेशी लोगों की ओर देखते हैं । और मैं सोचता हूँ कि इस अवधि के दौरान हुई अन्य घटनाओं में एक संगठित धर्म का निरंतर कम होना है । मैं सोचता हूँ कि आंशिक रूप से आस्ट्रेलियाई देशीय जातियों की ओर एक प्रकार की आध्यात्मिक प्रेरणा के लिए देखते हैं जिसे मैं खुद अब अत्यधिक समस्या वाली मानता हूँ । "
डौन कैसी :
" गणतंत्र आंदोलन तथा स्वदेशीय मेल-मिलाप दोनों के हितों के लिए और इस तथ्य के कारण कि संविधान में स्वदेशी लोग 40 से 70 हज़ार वर्षों तक इस देश के स्वदेशी निवासी माने गए हैं, उनके हितों के लिए मेरा यह सोचना है तथा दृढ़ मत है कि गणतंत्र की बहस को अलग रखा जाए । "
स्यू सलेमन :
डौन कैसी एक स्वदेशी आस्ट्रेलियाई हैं जो आस्ट्रेलिया के राष्ट्रीय संग्रहालय की निर्देशक हैं तथा जिन्होंने 1991 तथा 1992 के मध्य मेल-मिलाप परिषद के विकास पर कार्य किया था ।
डौन कैसी :
" मेल - मिलाप पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है , हमारे द्वारा इसे एक अलग मुद्दे के रूप में ध्यान देने की और केवल इसी मुद्दे पर ही लोगों का दिल तथा दिमाग जीतने की और इसे गणतंत्र के मुद्दे के साथ महत्वहीन न करने देने की ज़रूरत है । मैं आस्ट्रेलिया के गणतंत्र बनने देने के पक्ष में हूँ परंतु मैं तथा लोग निश्चित रूप से इसके बारे में बहुत ज़्यादा उलझे हुए हैं । अच्छे माने जाने वाले तथा अच्छे शिक्षित लोग यह मानते हैं कि एक गणतंत्र के लिए आस्ट्रेलियाई आंदोलन चाहे वह अच्छा हो या खराब हो, करने पर यदि हम सहमत हो जाएँ तो वह अमरीका जैसा हो सकता है । वे हमें प्रजातंत्रीय समाज होने के कारण प्रत्येक को वोट का अधिकार तथा बिना युद्ध अथवा गृह-युद्ध के विषयों पर विचार-विमर्श करने में समर्थ होने के आधार पर इसलिए मानते हैं क्योंकि हम इंगलैण्ड से निकले हैं । मैं सोचती हूँ कि वे यह नहीं देख पा रहे हैं कि अंततः हम गणतंत्र बन जाएँगे इसलिए बेहतर है कि आप गणतंत्र का श्रेष्ठ रूप क्या है पर बहस तथा विचार-विमर्श करें, यह नहीं कि हम कभी भी गणतंत्र नहीं बनना चाहते हैं "
स्यू सलेमन :
अगले सप्ताह के कार्यक्रम में "दुनिया में आस्ट्रेलिया का स्थान" - वे शक्तियाँ जिन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से आस्ट्रेलियाई विदेश नीति को प्रभावित किया है ।
सर विनस्टन चर्चिल :
" आज मैं आप सभी से भारी तथा दूर गामी सैन्य हार की छाया में बोल रहा हूँ । हम सिंगापुर हार गए हैं । "
ले. जनरल बेन्नेट :
" मुझे उस दोहपर के अंत में आस्ट्रेलियाई शिविरों का दौरा याद है और मैंने हमारे आदमियों का दिल तोड़ देने वाली निराशा महसूस की थी । हमें कभी भी यह नहीं भूलना चाहिए कि अमेरिका के बिना यह युद्ध लंबा तथा खर्चीला होता ।
स्यू सलेमन :
अगले सप्ताह मुझे यानी स्यू सलेमन को इस कार्यक्रम पर मिलें ।
मेलबर्न के मोनेश विश्वविद्यालय के नेश्नल सेंटर फार आस्ट्रेलियन स्टडीज़ को शैक्षिक सलाह के लिए तथा तकनीकी निर्देशन के लिए रेयान ईगन को मेरा धन्यवाद।
