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आस्ट्रेलिया इंडिया काऊन्सिल के सहयोग के द्वारा ।

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कार्यक्रम १३- युवा मंच

:: अंग्रेज़ी में सुनिए - विनडोज़ मिडिया प्लेएर : मिडिया-संबंधित सहायता

स्यू सलेमन:

नमस्कार, मैं रेडिया आस्ट्रेलिया से स्यू सलेमन हमारी कढ़ी वर्तमान आस्ट्रेलिया के अंतिम कार्यक्रम के साथ। आस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री के साथ टॉक बैक क्लासरूम ।

2003 के मध्य में प्रधानमंत्री जॉन हावर्ड ने राष्ट्रीय संसद के बाहर एक अलग तरीके के" प्रश्नकाल" में भाग लिया ।

विद्यार्थियों के प्रश्नों का

संग्रन्थन:

" प्रधान मंत्री महोदय आपसे मेरा पहला प्रश्न ....

" क्या आपके दिमाग में इससे कोई नैतिक चिन्ताएँ उत्पन्न हुई ?"

" क्या आप किसी तरह अपने को उत्तरदायी महसूस करते हैं ... "

"इससे आपको कैसा लगता है ? "

" आपको यह क्यों चुनना पड़ा .... "

" आप व्यक्तिगत तौर पर किन नैतिक मुद्दों से जूझते हैं ? "

स्यू सलेमन:

श्री हावर्ड ए.बी.सी. पर टॉक बैक क्लास रूम नामक कार्यक्रम में भाग लेने वाले पहले आस्ट्रेलियाई नेता नहीं है परन्तु ऐसा पहली बार हो रहा है कि स्थानीय तथा विदेशी विद्यार्थी दोनों के एक पैनल ने अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर अपने प्रश्न केन्द्रित किए हैं ।

आस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री, जॉन हावर्ड आस्ट्रेलियाई तथा अमेरिकी हाई स्कूल के विद्यार्थियों के एक पैनल द्वारा" 11 सितम्बर के बाद विश्व " विषय पर प्रश्न पूछे जाने पर सहमत हुए हैं ।

अन्तर्राष्ट्रीय संबंध द्वारा केनबरा में आस्ट्रेलिया के राष्ट्रीय संग्रहालय में एक विद्यार्थी पैनल तथा दर्शक और वाशिंगटन में स्मिथसोनियन संस्थान में अमेरिकी इतिहास के राष्ट्रीय संग्राहलय में विद्यार्थी इकठ्ठे हुए ।

विद्यार्थी मंच का वित्त-पोषण आस्ट्रेलियाई संग्राहलय तथा राष्ट्रकुल संसदीय शिक्षा कार्यालय द्वारा अपने नागरिक शास्त्र शिक्षा के चालू कार्यक्रम के भाग के तौर पर संयुक्त रूप से किया गया था ।

और 15 तथा 16 वर्ष के साक्षात्कार लेने वालों को सुनना उपस्थित मीडिया के लिए एक शिक्षाप्रद अनुभव था जिनके कैमरे के शटर की आवाज़ को आप पृष्ठभूमि में सुनाई देते हुए देख सकते थे ।

अमेरिकी पैनल में वाशिंगटन डी.सी. से 11वीं कक्षा के विद्यार्थी गॉर्डन सू, लूसी हेग तथा एली गोल्डफार्ब थे और उनके आस्ट्रेलियाई समक्षक में मेलबर्न से 12वीं कक्षा के विद्यार्थी मोशीदी मनका, डेनियल क्विनलिवन तथा एन्न बोयापति, जिसने विद्यार्थी अध्यक्ष के तौर पर कार्यवाही प्रारम्भ की, थे ।

एन्न बोयापति:

मेरा नाम एन्न बोयापति है और टॉक बैक क्लासरूम में आपका स्वागत है । हमारे आज के अतिथि आस्ट्रेलिया के माननीय प्रधानमंत्री जॉन हावर्ड है । प्रधानमंत्री जी आप का स्वागत है ।

जॉन हावर्ड:

धन्यवाद एन्न ।

एन्न बोयापति:

मीडिया ने अमेरिकी प्रधान मंत्री जॉर्ज बुश के साथ आपके नज़दीकी संबंधों पर काफ़ी कुछ कहा है, आप इस संबंध का वर्णन किस प्रकार करेंगे ?क्या आप मित्र हैं, क्या आप दोस्त हैं ?

जॉन हावर्ड:

हम उतने ही निकट हैं जितने कि दो नेता कभी भी हो सकतेहैं । मैं जॉर्ज बुश को व्यक्तिगत रूप से 10 सितम्बर, 2001 से जानता हूँ जिस दिन हमारी पहली बार आमने-सामने मुलाकात हुई थी यद्यपि हमने फोन पर पहले भी बात की थी ।मैंने उन्हें हमेशा ही एक अच्छा, विद्वान, स्नेही व्यक्ति पाया है; मेरी उनके साथ हमारे समान व्यक्तित्व तथा समान राजनीतिक दर्शन के कारण अच्छी बनती है, मैं व्यक्तिगत तौर पर उनसे उनके पूर्ववर्ती की तुलना में शायद थोड़ा अधिक निकट हूँपरन्तु आप इससे यह न समझें कि मेरी उनके पूर्ववर्ती के साथ नहीं बनती थी । मैंने उन्हें एक विद्वान व्यक्ति पाया है भले ही हमारे थोड़े बहुत भिन्न राजनैतिक दृष्टिकोण थेक्योंकि आस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री तथा अमेरिकी राष्ट्रपति का अपने -अपने देशों को सही से चलाने का भी कर्त्तव्य होता है । जॉर्ज बुश के साथ यह विशेषकर आसान है क्योंकि वो मुझे अच्छे लगते हैं ।

एन्न बोयापति:

तो आपके व्यक्तिगत स्तर पर किस प्रकार के मूल्य समान हैं ?

जॉन हावर्ड:

मैं सोचता हूँ कि हम सभी का, हम दोनों का यह दृढ़ मत है कि समाज में सबसे अधिक शक्तिशाली तथा महत्वपूर्ण इकाई परिवार हैं, हम दोनों एक संवेदनशील तरीके से पूंजीवादी प्रणाली, जो इसकी अति को रोकती हो के प्रति काफ़ी गहरी प्रतिबद्धता रखते हैं, परन्तु फिर भी हम उन व्यक्तियों में से हैं जो मुक्त उद्यम बाज़ार प्रणाली पर विश्वास करते हैं ।स्पष्टतः हम दोनों प्रजातांत्रिक प्रक्रिया के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध हैं, भले ही अमेरिकी प्रजातांत्रिक प्रक्रिया आस्ट्रेलिया की प्रक्रिया से बहुत भिन्न है फिर भी मैं यह कह सकता हूँ कि यह उससे कम या ज़्यादा प्रजातांत्रिक नहीं है । ये कुछ मूल्य हैं जो हम दोनों में समान हैं ।

डेनियल क्विनलिवन:

राष्ट्रपति बुश ने यह टिप्पणी की कि आप इस्पात पुरूष हैं । इससे आपको जॉर्ज बुश के साथ अपनी दोस्ती तथा राजनैतिक संबंध में कैसा महसूस होता है ?

जॉन हावर्ड:

देखिए , मुझे व्यक्तिगत तौर पर कुछ ज़्यादा ध्यान नहींदेता । मेरा मतलब है कि उनका यह कहना उनकी दरियादिली थी और परन्तु मैं ऐसा नहीं हूँ कि हर जगह यह भाग-भाग कर बताऊँ कि मैं बहुत बढ़िया या ऐसा ही कुछ हूँ .....

एन्न बोयापति:

आप क्या सोचते हैं कि उन्होंने आप को ऐसा क्यों कहा ?

जॉन हावर्ड:

देखिए, हर कोई वर्णन करने के लिए अलग भाषा का प्रयोग करता है परन्तु स्पष्ट है कि अमरीका के राष्ट्रपति ने इराक पर अमरीका की स्थिति में आस्ट्रेलिया की भागीदारी तथा समर्थन की बहुत सराहना की है । 11 सितम्बर के आक्रमण के बाद विश्व के इतिहास में एक प्रारंभिक क्षण आ रहा था और विशेषकर अमरीका तथा साथ ही राष्ट्रपति बुश उनके द्वारा उठाए गए कदम पर एक अतर्कपूर्ण हमले तथा निन्दा का शिकार हो रहे थे और आस्ट्रेलिया उन बहुत कम देशों में से एक था जिसने पूरे समय अमरीका का साथ दिया । और यह करना ठीक था तथा और वह किसी स्वाभाविक व्यक्ति की तरह, जो वे हैं, अपनी सराहना को व्यक्त कर रहे थे ।

एन्न बोयापति:

तो श्री हावर्ड आप क्या सोचते हैं कि जॉर्ज बुश के साथ आपकी व्यक्तिगत मित्रता अथवा संबंध ने आतंकवाद से लड़ाई के लिए अपनी सेनाएँ भेजने के निर्णय को कितना प्रभावित किया ?

जॉन हावर्ड:

ओह, कोई भी राष्ट्रपति होते तब भी अपनी सेनाएँ भेजते । फिर भी मैं यह सोचता हूँ क्योंकि हमारे अच्छे व्यक्तिगत संबंध हैं इसलिए वह क्या हो रहा है के बारे में हर वक्त मुझे पूरी तरह सूचना देते रहते थे और वह आस्ट्रेलिया के मतों का समर्थन प्राप्त करने की एक वास्तविक प्रक्रिया में भी शामिल हुए और वह अमरीका के साथ हमारे नज़दीकी गठबंधन को बहुत महत्व देते हैं । पर मैं मानता हूँ कि यह संबंध जो आस्ट्रेलिया तथा अमरीका के मध्य चल रहा है, वह उस समय वहाँ के नेताओं के व्यक्तित्व से ऊपर है । हम हमेशा ही नज़दीकी रहेंगे क्योंकि हमारे कई मूल्य समान हैं ...?

गॉडर्न सू:

मैं जानना था कि इराक में सेनाएँ भेजने का आपका मुख्य कारण क्या था । क्या यह व्यापक विनाश के हथियार थे ?

जॉन हावर्ड:

हम निश्चित तौर पर मानते हैं कि इराक के पास व्यापक विनाशके हथियारों की क्षमता तथा कार्यक्रम हैं और मैं अभी भी यही मानता हूँ । मेरा मत तब भी यह था और अभी भी यह है कि यदि इराक जैसे उपद्रवी राष्ट्र को वह हथियार क्षमता बनाए रखने की अनुमति दे दी जाती तो और उपद्रवी राष्ट्र भी उसे पाना चाहेंगे और ये जितने अधिक लिए जाएँगे इसकी उतनी ही अधिक संभावना है कि ये आतंकवादियों के पास पहुँच जाएँगे जो कई देशों के लिए सम्भाव्य खतरा होगा, न केवल आस्ट्रेलिया तथा अमेरिका के लिए ।मैं इससे अब पीछे नहीं हट रहा हूँ पर मैं आगे यह टिप्पणी करना चाहूँगा कि हमारे सैन्य युद्ध में प्रवेश करने से पूर्व हमने उनके दैनीय मानवाधिकार रिकार्ड की ओर इशारा किया । और वे जो हमने अमरीकी, तथा ब्रिटेन वालों ने किया की अब आलोचना कर रहे हैं क्या यह सुझाना चाहते हैं कि यदि सद्दाम हुसैन,यदि वह जीवित है और यह कर सकने में सक्षम है, को वापस लाया जाए तो वह इराकी जनता के लिए बेहतर होगा ? मैं सोचता हूँ कि उन सभी लाशों का मिलना, अत्याचारों की दैनीय करतूतों का पता लगना, जो युद्ध के बाद से हुई हैं, मैं समझता हूँ यह बात सिद्ध करती है ।

एन्न बोयापति:

चलिए अब युद्ध के बारे में बात करते हैं, डैन ?

डेनियल क्विनलिवान:

जॉर्ज बुश की तरह आप भी युद्ध करने के अपने इरादे में ढृढ़ प्रतीत होते हैं और आपके मन में युद्ध की आवश्यकता के बारे में कोई संदेह दिखते हुए प्रतीत नहीं होते । परन्तु यह कार्यवाही करने, सोची-समझी कार्यवाही तथा आतंकवाद से लड़ाई के संबंध में भी आपके दिमाग में कुछ नैतिक चिन्ताएँ जागृत हुई हैं ?

जॉन हावर्ड:

मैं हमेशा सही तथा गलत के संबंध में सोचता हूँ । मैंने सोचा कि यह मात्र एक सैनिक भागीदारी होगी और जो काफ़ी हद तक थी, अन्यथा मैं इसका समर्थन नहीं करता । मैंने सोचा कि इससे मिलने वाले लाभ काफ़ी अधिक होंगे, मेरा मतलब है कि उनमें से एक बहुत स्पष्ट है और हमने काफ़ी प्रगति की है, विश्व ने पिछले कुछ वर्षों में की गई प्रगति की तुलना में पिछले कुछ हफ्तों में मध्य पूर्व शांति समझौते की ओर काफ़ी अधिक प्रगति की है ।यह भी एक मामला हो सकता था कि मध्य एशिया शांति समझौते का मार्ग बगदाद से होकर गुज़रता है और यह मेरी अभिव्यक्ति नहीं है बल्कि एक ब्रिटश लेखक, विलियम शाक्रॉस की अभिव्यक्ति है । मैं सोचता हूँ कि इराक पर विजय, इज़राइल को एक सम्भाव्य खतरे के रूप में इराक को हटाना, इसके साथ आनेवाली प्रतिबद्धताएँ, विशेषकर मध्य पूर्व शांति समझौता प्राप्त करने के लिए राष्ट्रपति बुश की, और उनका जो कुछ वह कर सकते हैं कर गुज़रने का पूर्ण संकल्प और शांति समझौते को प्राप्त करने के लिए उनकी इज़राइल तथा फिलिस्तीन दोनों पर आवश्यक रियायतें देने की आवश्यकता से, इराक में जो हुआ है वह एक महान परम्परा बन सकती है । अब इससे कौन सहमत नहीं होगा कि यह एक अच्छी धटना होगी, न केवल मध्य पूर्व के लिए अपितु पूरे विश्व के लिए भी ।

एन्न बोयापति:

श्री हावर्ड जब हम आतंकवाद के कारणों के बारे में बात कर रहे हैं तो प्रथमतः इस युद्ध में गठबंधन का कितना खर्च हुआ होगा ? वित्तीय लागतों के रूप में इसकी लागत कितनी होगी ?

जॉन हावर्ड:

पर मैं केवल आस्ट्रेलिया के लिए ही उत्तर दे सकता हूँ ।

एन्न बोयापति:

पर यदि आप लगभग, मात्र लगभग लागत बता सकें तो ?

जॉन हावर्ड:

मैं आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री के अतिरिक्त कोई किरदार निभाने का प्रयास नहीं करूँगा, मैं खर्च का उत्तर नहीं दे सकता ।

एन्न बोयापति:

क्या आप अरबों में हुए खर्चे की बात कर रहें हैं ?

जॉन हावर्ड:

हमारी गणनाओं में हमारे द्वारा दी गई राशि 500 से 1 मिलियन और 1 बिलियन डॉलर के बीच कहीं थी, मैं इस समय आपको बिल्कुल सटीकता से नहीं बता सकता परंतु हमारे द्वारा किया गया बजट आवंटन यह था ।

मोशीदी मनका:

यह हमारी विदेशी सहायता की तुलना में कितना है ।

एन्न बोयापति:

मानवीय सहायता पर खर्च करने से इसकी तुलना कैसे की जा सकती है ?

जॉन हावर्ड:

सारी मानवीय सहायता पर खर्च करना ?

मोशीदी मनका:

आतंकवाद से लड़ाई के संबंध में मानवीय सहायता पर ?

जॉन हावर्ड:

थोड़ा रूकिए क्या आप यह पूछ रही हैं कि सारी मानवीय सहायता कितनी थी ? हमने अभी तक इराक में मानवीय सहायता के लिए 10 करोड़ डॉलर दिए हैं । इराक में मानवीय कार्य हर किसी के द्वारा अनुमान लगाए गए जितना बड़ा नहीं है । लोग कहते थे कि वहाँ कई करोड़ शरणार्थी हो जाएँगे, तेल के कुँओं में आग लगा दी जाएगी, टिगरिस यूफरेटस घाटी में बाढ़ आ जाएगी, पर इनमें से कोई भी आपदा घटित नहीं हुई । हम मानवीय सहायता में एक बड़ी भूमिका निभाना जारी रखेंगे और नवीनतम गणनाओं में आस्ट्रेलिया 5वाँ या छठा है, मैं सोचता हूँ कि मानवीय सहायता के लिए दान देने की उदारता में 6ठवें नम्बर पर और नवीनतम सूचना के अनुसार हम कई देशों से आगे हैं जो आस्ट्रेलिया की बहुत निन्दा करते हैं तथा हमसे काफ़ी बड़े हैं इसलिए आस्ट्रेलिया से ज़्यादा दे सकने की स्थिति में हैं । मुझे हमारे द्वारा अदा की जा रही मानवीय भूमिका पर बहुत गर्व है ।

एन्न बोयापति:

संयुक्त राष्ट्र यह सिफारिश करता है कि विकसित देश अपने जीडीपी का दशमलव सात प्रतिशत विदेशी सहायता में दें ।आस्ट्रेलिया मात्र दशमलव 25 प्रतिशत करता है, अमेरिका केवल दशमलव 1 प्रतिशत ।तो आप इन आंकड़ों को यह देखते हुए कि गरीबी आतंकवाद का एक कारण है, कैसे स्पष्ट करेंगे ?

जॉन हावर्ड:

मैं सोचता हूँ कि हमारा 16 करोड़ डॉलर का एक सहायता कार्यक्रम है ।

मोशीदी मनका:

पर मेरे कहने का अर्थ था कि यह संयुक्त राष्ट्र द्वारा विकसित देशों के लिए संस्तुत किए गए से कम है ?

जॉन हावर्ड:

उनके द्वारा कहा गया सब कुछ ठीक नहीं होता, यद्यपि मैं संयुक्त राष्ट्र की भूमिका का बड़ा प्रशंसक हूँ विशेषकर इसकी एजेंसियों का, और मैं सोचता हूँ कि संयुक्त राष्ट्र के वर्तमान महासचिव इस संस्था के संभवतः श्रेष्ठ महासचिव हैं और मैंने उनके साथ पूर्वी टिमोर के संबंध में काफ़ी निकटता के साथ कार्य किया । परन्तु केवल इसीलिए कि संयुक्त राष्ट्र एक आँकड़ा निर्धारित कर देता है का यह अर्थ नहीं है कि वह स्वतः ही पवित्र आदेश हो जाएगा ।

लूसी हेग:

श्री हावर्ड यदि मैं आपके द्वारा पहले कहे गए पर वापस जाऊँ तो आपने उल्लेख किया था कि यदि हम इराक के खिलाफ युद्ध में शामिल नहीं होते तो और उपद्रवी राष्ट्रों को व्यापक विनाश के हथियार संग्रह करने के लिए प्रोत्साहन मिलता ।मैं जानना चाहती हूँ कि आप किन राष्ट्रों के बारे में बात कर रहे हैं और क्या आप सोचते हैं कि भविष्य में वे विश्व आतंकवाद में योगदान देंगे ?

जॉन हावर्ड:

मैं एक सामान्य टिप्पणी कर रहा था । मेरे ज़हन में कुछ देश हैं परन्तु मैं नहीं सोचता कि यदि इस स्तर पर मैं उनका नाम लूँ तो इससे कुछ लाभ होगा क्योंकि जिन देशों का मैं नाम लूँगा उनके प्रति सतर्क रहने की मेरी कुछ ज़िम्मेवारियाँ हैं । परन्तु सिद्धान्त स्पष्ट है कि यदि अन्य उपद्रवी राष्ट्र इराक द्वारा 12 वर्षों से संयुक्त राष्ट्र की अवज्ञा करने और फिर अंत तक दिए गए सभी भाषणों और दी गई तमाम चेतावनियों के बावजूद सद्दाम हुसैन सत्ता में बना रहा, को देखेंगे तो इराक जैसा देश तथा सद्दाम हुसैन जैसे नेता बनने की इच्छा रखने वाले कहेंगे कि हम भी इससे बच जाएँगे और हमें केवल विश्व के मत को ठेंगा दिखाना होगा और अन्त में वे छोड़ देंगे, झुक जाएँगे और मुझे सत्ता में बना रहने देंगे, वे मुझे एक क्रूर तथा तानाशाह की तरह व्यवहार करते रहने देंगे । यह स्पष्ट है कि वे इस प्रकार कर सकते थे ।

एन्न बोयापति:

एली आपका कोई प्रश्न है ?

एली गोलडफार्ब:

हाँ, यदि हम पीछे जाएँ तो आप इराक में युद्ध तथा इसके प्रभाव के बारे में बात कर रहे थे तो क्या आप सोचते हैं कि इससे मध्य पूर्व में शांति प्रक्रिया में परिणाम निकल आएँगे । इस बारे में आप क्या सोचते हैं कि अमरीका तथा आस्ट्रेलिया द्वारा इराक में युद्ध किए जाने के लिए आम सहमति तथा विश्व के मत को नजरअंदाज करने वाली भूमिका से मध्यस्थ शांति प्रक्रियाओं का समर्थन कर रहे देश किस प्रकार प्रभावित होंगे ?क्या आप नहीं सोचते कि आप वहाँ के विश्व समुदाय को अपने से अलग-थलग कर लेंगे और क्या यह एक शांति समझौते की वैद्यता को किसी प्रकार कम करता है ....

जॉन हावर्ड:

एली मैं ऐसा नहीं सोचता कई और देश भी उस स्थिति का समर्थन उसे महत्व देने के बजाय चुपचाप कर रहे थे । आप अपने क्षेत्र को ही लीजिए, यह एशिया प्रशान्त क्षेत्र है, कई लोगों ने ग़लत कहा कि आस्ट्रेलिया एशिया प्रशान्त क्षेत्र के मत को बिगाड़ रहा है । हकीकत यह है कि हमारे तथा अमेरिका के निर्णय को जापान, कोरिया, फिलीपीन्स, सिंगापुर द्वारा समर्थन दिया गया था ।निश्चित रूप से इंडोनेशिया तथा मलेशिया भिन्न थे, चीन ने एक व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया, चीन ने औपचारिक तौर पर इसका समर्थन नहीं किया परन्तु उसने इसे कोई बड़ा मुद्दा नहीं बनाया । अब जहाँ तक मध्य पूर्व का संबंध है महत्वपूर्ण चीज़ यह है कि अब आपके पास समझौते की ओर बढ़ने के लिए यूरोपीय संघ, अमेरिका, रूस तथा संयुक्त राष्ट्र की संयुक्त प्रतिबद्धता है । इसमें कोई शक नहीं कि कई अरब देश सद्दाम हुसैन के जाने से खुश हैं । हमारे विदेश मंत्री हाल ही में मध्य पूर्व से वापस आए हैं और उन्होंने मुझे तथा हमारी संसद को बताया कि यदि आप अन्य देशों में जाएँ और प्रत्येक व्यक्ति, भले ही उन्होंने युद्ध से पूर्व कुछ भी कहा हो, इस पर खुश है कि वह चला गया है । और मैं सोचता हूँ कि यदि आप सभी चीज़ों को एक साथ लें तो अब आपके पास मध्य पूर्व शांति समझौते के लिए पहले से कभी भी एक अधिक अनुकूल माहौल तथा वातावरण है ।

स्यू सलेमन:

आप रेडियो आस्ट्रेलिया सुन रहे हैं- आस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री जॉन हावर्ड के साथ "11 सितम्बर के बाद विश्व "विषय पर टॉक बैक क्लासरूम ।

मोशीदी मनका:

11 सितम्बर के तुरन्त बाद आपकी सरकार ने शरण माँगने वालों तथा आतंकवाद के मध्य संबंध स्थापित कर दिया । आतंकवाद ने हमारी सीमा सुरक्षा को कितना प्रभावित किया है ?

जॉन हावर्ड:

मोशीदी यह कहना सही नहीं है कि हमने एक मज़बूत संबंध स्थापित किया है । हमने ऐसा नहीं किया । मैं सोचता हूँ कि मुझसे एक प्रश्न पूछा गया था और मैंने स्वाभाविक रूप से उत्तर दिया था कि यदि लोग अवैध रूप से किसी देश में प्रवेशकरते हैं और आपको इन लोगों की पृष्ठभूमि के बारे में बहुत कम या कुछ भी पता नहीं होता तो यह संभव है कि वह एक आतंकवादी हो सकता है ...

बीच में टोकना:

आप जानते हैं कि आपने मुझसे एक प्रश्न पूछा और मैं आपको यह उत्तर दे रहा हूँ, मोशीदी यह सुझाना कि हमने एक बड़ा संबंध स्थापित किया था, सही नहीं है । मेरा मतलब था कि जो स्थिति हमने शरण माँगने वालों के प्रति अपनायी वह इसलिए थी कि हमें नहीं पता था कि शरणार्थी इस देश में अंतर्राष्ट्रीय प्रक्रिया के अतिरिक्त नहीं आ सकते हैं ।और मैं एक व्यवस्थित शरणार्थी नीति में विश्वास करता हूँ, और यही तर्क है ।

मोशीदी मनका:

यद्यपि पीटर रीथ ने संबंध स्थापित किया, यह एक उद्धरण है कि शरणार्थियों का प्रवाह " आतंकवादियों के लिए आने की और आतंकवादी गतिविधियों को चलाने के लिए एक चौकी के रूप में हमारे देश का उपयोग करने के लिए एक पाइप लाइन"हो सकती है ।

एन्न बोयापति:

यह पीटर रीथ का एक उद्धरण है और उन्होंने इसको कई बार दोहराया ।

जॉन हावर्ड:

मैं जानता हूँ कि यह वक्तव्य दिया गया था परन्तु मैं दोहराता हूँ कि यदि आप हमारे द्वारा उस समय प्रयोग किए गए तर्कों पर फिर से देंखें तो यह कहना सही नहीं होगा कि हमने एक बड़ा संबंध स्थापित नहीं किया था । परन्तु यह अभी भी मामला है कि यदि आपके यहाँ अवैध आप्रवास है तो वह आतंकवाद के लिए अनुकूल हो सकता है । मैं यह नहीं कह रहा हूँ परन्तु यह हो सकता है । मेरी परिभाषा का अर्थ यह था कि इसकी सम्भावना है ।

एली गोलडफार्ब:

शरणार्थियों तथा आतंकवाद के मध्य संबंध के बिना आस्ट्रेलिया के भीतर बन्दी गृह क्यों हैं ?

जॉन हावर्ड:

क्योंकि हमारी अवैध आप्रवासियों को प्रवेश न करने देने की एक नीति है और बन्दी गृह उस नीति का एक भाग है और मैं कह सकता हूँ कि एक दशक सेअधिक से एक अलग न हो सकने वाला भाग । हमारा यह मत है कि एक राष्ट्र के रूप मे कई अन्य देशों की तुलना में हमारा अप्रवास कार्यक्रम शरणार्थियों का अधिक अनुपात लेता है, हमारे यहाँ एक वर्ष में 12 हज़ार आते हैं । हमारा यह मत है कि यह उचित है कि प्रत्येक व्यक्ति समान प्रक्रिया से आए और उसका मूल्यांकन अंतर्राष्ट्रीय रूप से स्वीकार्य मानदण्डों के अनुसार किया जाए और जो व्यक्ति इस देश में अवैध रूप से आना चाहे वे कानून की प्रक्रिया के अंतर्गत आएगा ।

एन्न बोयापति:

श्री हावर्ड बन्दी गृहों के मुद्दे पर लूसी की विशेष चिन्ताएँ हैं तो लूसी क्या आप कोई प्रश्न पूछना चाहेंगी ?

लूसी हेग:

हाँ, मैं तथा मेरे साथ-साथ कुछ आस्ट्रेलियाई दर्शकों की भी इन बन्दी गृहों में बच्चों के प्रति विशेष चिन्ता है । सी.एन.एन पर एक रिपोर्ट आई थी कि वूमेरा बन्दी गृह में कई बच्चों ने एक आत्महत्या समझौता किया है और अधिक भीड़-भाड होने तथा असंतोष बढ़ने की रिर्पोट भी लगतार आ रही है । क्या यह सत्य है और यह बन्दी बनाए गए बच्चों की स्थिति के बारे में क्या कहता है ?

जॉन हावर्ड:

देखिए हम किसी को बन्दी बनाना पसन्द नहीं करते, यदि आप सोचते हैं कि हमें बन्दी गृह बनाने में आनन्द आता है तो उसका उत्तर है हमें इसमें आनन्द नहीं आता ।हम बन्दी गृह में स्वास्थ्य देख-रेख के अच्छे मानक देते हैं, हम इस तथ्य को लगातार बनाए रखते हैं कि बन्दी गृह आश्रय के तर्कपूर्ण मानक प्रदान करें और हम अच्छा भोजन देते हैं ।और यदि उनकी विश्व के अन्य भागों में इसी प्रकार की व्यवस्थाओं से तुलना की जाए तो भले ही वे अधिक अनुकूल न भी हों तो भी बहुत अच्छे सिद्ध होते हैं । युवा बच्चों के संबंध में हमने वैकल्पिक सामुदायिक आश्रय व्यवस्था प्रदान करने का प्रयास किया है परन्तु इसे बड़े पैमाने पर नहीं किया गया है । इसे बड़े पैमाने पर न किए जाने के कारणों में से एक यह है कि लोग अपने परिवार को पिता के बन्दी गृह में रहने और माता तथा बच्चों के किसी प्रकार के सामुदायिक आश्रय व्यवस्था में रहने से अपने परिवार को बिखरा हुआ पाते हैं । वर्तमान में मैं सोचता हूँ कि लगभग सौ बच्चे हैं, मुझे सटीक आंकड़े के लिए मत टोकिए, परन्तु यह वह परिसर है जो बन्दी बनाए गए हैं । यह संख्या कम हो रही है क्योंकि जो नीतियाँ हम अपना रहे हैं उनसे लोगों के तस्करों में यह संदेश गया है कि लोगों की तस्करी की प्रक्रिया सफल नहीं होती ।

एन्न बोयापति:

फिर से बच्चों के मुद्दे पर श्री हावर्ड, मोशीदी बच्चों को रखे जाने की अवधि कितनी होती है ?

मोशीदी मनका:

हाँ मैं जानती हूँ, हाल ही में फिलिप रड ने यह बताया था कि बच्चों को बन्दी बनाकर रखे जाने की औसत अवधि एक वर्ष 3 माह तथा 17 दिन है, जिसमें से एक बच्चा पोर्ट हैडलैण्ड में कम से कम 5 वर्ष बन्दी रहा ।

जॉन हावर्ड:

क्षमा कीजिए, अंतिम वाक्य क्या था, एक बच्चा कितने दिन ?

एन्न बोयापति:

5 वर्षों तक उसे पोर्ट हैडलैण्ड में बन्दी रखा गया था ।

मोशीदी मनका:

आप इस बारे में क्या सोचते हैं कि 5 वर्षों तक बन्दी गृह में रह रहे बच्चे के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?

जॉन हावर्ड:

देखिए, मैं चाहता हूँ कि यह अन्यथा होता परन्तु जब तक आप उन लोगों को, जो यहाँ अवैध रूप से आते हैं, बन्दी बनाने की नीति को पूर्णतः त्याग नहीं देते, जिसका आस्ट्रेलियाई समुदाय बिल्कुल भी समर्थन नहीं करता, आपको किसी न किसी प्रकार से बन्दी बनाना तो होगा ही और आपको मूल्यांकन की प्रक्रिया जितनी संभव हो सके उतनी जल्दी करने का प्रयास करना चाहिए ।

स्टीफन कटिंग:

प्रधानमंत्री जी मैं जानता हूँ कि आप आज सुबह थोड़ी जल्दी में हैं इसलिए हम मंच के दोनों ओर से एक दो प्रश्न लेंगे । क्या हम प्रारम्भ में यहाँ से कोई प्रश्न पूछ सकते हैं ?

छात्र:

प्रधानमंत्री हावर्ड आपने कहा कि आप इराक से युद्ध के लिए इसलिए तैयार हुए क्योंकि उनके पास, अथवा आपको लगा कि उनके पास, व्यापक विनाश के हथियार थे । क्या मैं आपसे पूछ सकता हूँ कि संयुक्त राज्य अमेरिका के पास कितने परमाणु हथियार है और यह तथ्य कि अमेरिका एक मात्र ऐसा देश है जिसमें युद्ध के समय परमाणु हथियारों का प्रयोग किया है और आप अमेरिका को अपने परमाणु हथियारों को त्याग देने के लिए दवाब क्यों नहीं डालते ?

जॉन हावर्ड:

अमेरिका के पास परमाणु हथियार हैं और उन्हें अतंर्राष्ट्रीय कानून द्वारा इसके लिए प्राधिकृत किया गया है । परमाणु अप्रसार संधि, जिसमें आस्ट्रेलिया भी एक पक्ष है, यह मानती है कि कुछ ऐसे देश हैं जिनके पास परमाणु हथियार हैं और वे इन्हें रख सकते हैं जिसमें अमेरिका भी एकहै । यह पूर्णतः कानूनी है । और परमाणु अप्रसार संधि का सम्पूर्ण आधार इस स्वीकृति पर तैयार हुआ था कि आज अमेरिका, सोवियत संघ, अब रूस, फ़्राँस, चीन तथा ग्रेट ब्रिटेन के रूप में 5 परमाणु शक्तियाँ हैं और व्यावहारिक तौर पर ये देश अपने परमाणु हथियारों से मुक्त नहीं हो सकते थे ।और यह विश्व 40 वर्षों तक परस्पर सुनिश्चित विनाश के सिद्धान्त के द्वारा, अन्य शब्दों में अमरिकी कभी भी सोवियत के विरूद्ध परमाणु हथियारों का उपयोग नहीं करेंगे क्योंकि वे भी इसके प्रतिउत्तर में अमेरिका के विरूद्ध ऐसा कर सकते थे और इसके विपरीत, शांतिपूर्ण रहा ।कई लोग यह तर्क देते हैं कि एतिहासिक रूप से यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के वर्षों से सोवियत संघ के ढहने तक शांति की बड़ी गारण्टियों में सें एक थी । हमें अब विश्व समुदाय के रूप में परमाणु हथियारों का इन 5 देशों से आगे प्रसार रोकना है । मुझे इस बात की चिन्ता है कि भारत तथा पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार हैं, मैं अन्य देशों, विशेषकर उत्तरी कोरिया की परमाणु क्षेत्र में, की क्षमता के बारे में भी चिंतित हूँ और इसीलिए हम सभी उत्तरी कोरियाके बारे में चिंतित हैं क्योंकि उत्तरी कोरिया ने परमाणु अप्रसार संधि के अन्तर्गत वचन का उल्लंघन किया है । मेरा मानना है कि एक आदर्शवादी के रूप में मैं इन सभी को चमत्कारी ढंग से गायब होते हुए देखना चाहूँगा, मैं सोचता हूँ कि हम सभी ऐसा होते हुए देखना चाहते हैं, उन सहित जो अमेरिका के पास है । परन्तु व्यावहारिक रूप से यह होने वाला नहीं है, और व्यावहारिक रूप में हम जिसकी आशा कर सकते हैं वह यह है कि इसके प्रसार को रोका जाए और परमाणु अप्रसार संधि इस मार्ग में एक बड़ा कदम था और इसलिए हम इसे सफल बनाने के उत्सुक हैं ।

स्टीफन कटिंग:

कोई पीछे से एक प्रश्न पूछना चाहता है ।

छात्र:

श्री हावर्ड विश्व की हाल की स्थिति देखते हुए आपने आस्ट्रेलियाई लोगों पर हमलों को रोकने के लिए एक शांतिपूर्ण मेल-मिलाप वाले रुख के बजाए एक आक्रमक सैन्य रुख को क्यों चुना ?

जॉन हावर्ड:

मैं आक्रमक सैन्य रुख के श्रेणीकरण को स्वीकार नहीं करता । इसका अर्थ है कि मेरा यह मत है कि हमारे द्वारा इराक में जो किया गया है उससे मध्य से र्दीघावधि में मध्य पूर्व तथा विश्व एक ज़्यादा सुरक्षित स्थान होगा ।

स्टीफन कटिंग:

एक प्रश्न वहाँ भी है ।

छात्रा:

पूरे साक्षात्कार के दौरान तथा उस प्रश्न के उत्तर में आपने यह बात कही है कि आपने इराकी जनता के जीवन में सुधार किया है और इससे इराक से युद्ध औचित्य पूर्ण ठहरता है । यद्यपि, मैं इससे सहमत हूँ कि यह एक अतिरिक्त लाभ है, क्या यह युद्ध छेड़ने के लिए कोई उचित तर्क है जबकि हम तृतीय विश्व के देशों में हज़ारों लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए पैसे का इस्तेमाल युद्ध में खर्च करने के बजाय सहायता तथा निधियों के द्वारा कर सकते हैं ?

जॉन हावर्ड:

मैं सोचता हूँ, क्या मैं इसका उत्तर दो भागों में दे सकता हूँ, क्या मैं इराक के प्रश्न का उत्तर दूँ । मुझे इसमें कोई शक नहीं कि सद्दाम हुसैन के हटने से इराकी जनता के जीवन में बहुत सुधार हुआ है, और आपने भी स्पष्ट रूप से इसे स्वीकार किया है । और साक्ष्य पहले से ही उभर रहे हैं, यह कठिन होगा परन्तु जैसा कि किसी ने ठीक ही कहा है कि द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात कि यूरोप में परिस्थितियाँ दुष्कर थी परन्तु इसका अर्थ यह नहीं था कि नाटज़ीवाद को समाप्त करना औचित्यपूर्ण नहीं था । तृतीय विश्व के देशों को सहायता के प्रश्न पर सबसे बड़ी समस्या यह है कि ऐसे कई देशों में इस समय उनकी अपनी सीमाओं के भीतर शासन भ्रष्टहै । विभिन्न देशों से भारी मात्रा में सहायता आती है जो उन लक्ष्यों तक नहीं पहुँच पाती जहाँ यह पहुँचनी चाहिए, और हमें शासन के स्तरों में सुधार के लिए विश्व समुदाय के तौर पर और कड़े प्रयास करने होंगे ।

स्टीफन कटिंग:

श्री हावर्ड के कार्यक्रम को देखते हुए हमारे पास आज सुबह प्रश्नों के लिए इतना ही समय है ।मैं श्री हावर्ड को आज सुबह अपना समय देने के लिए हार्दिक धन्यवाद देना चाहूँगा ।मैं यहाँ तथा अमेरिका में हमारे पैनल को भी धन्यवाद देना चाहूँगा और साथ ही मैं स्मिथसोनियन संस्थान तथा अमेरिकी इतिहास संग्राहलय को भी धन्यवाद देना चाहूँगा ।दर्शकों को भी हार्दिक धन्यवाद ।

एफ.एक्स (तालियाँ)

स्यू सलेमन:

आज का टॉक बैक क्लासरूम आस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री जॉन हावर्ड के साथ जून, 2003 में आस्ट्रेलिया के राष्ट्रीय संग्राहलय तथा वाशिंगटन में स्मिथसोनियन संस्थान में अमेरिकी इतिहास के राष्ट्रीय संग्राहलय में दोनो देशों के हाईस्कूल के विद्यार्थियों के मध्य हुआ ।

"टॉक बैक क्लासरूम" आस्ट्रेलियाई प्रसारण निगम के लिए स्टीफन कटिंग द्वारा प्रस्तुत किया गया ।

और इसके साथ ही रेडिया आस्ट्रेलिया की 13 भाग कीकढ़ी वर्तमान आस्ट्रेलिया समाप्त होती है । तो मैं स्यू सलेमन आपको हमारा साथ देनेके लिए धन्यवाद देती हूँ और तकनीकी निर्देशन के लिए रयान इगन तथा क्रिस बेकर को और शैक्षिक सलाह के लिए मोनेश विश्वविद्यालय के नेशनल सेन्टर फॉर आस्ट्रेलियन स्टडीज़ को हार्दिक धन्यवाद देती हूँ ।