कार्यक्रम २- ग्रैंडस्टैंड से एक दृश्य (बेहतरीन दृश्य)
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एस एफ एक्सः
२००० सिडनी ओलिम्पिक खेलों का ऐ बी सी द्वारा प्रसारण।
फैनफेएर... "आज की रात हम दुनिया के सबसे महान खिलाड़ियों तथा उनके समर्थकों का सिडनी¸ आस्ट्रेलिया में स्वागत करते हैं।"
स्यू सलेमनः
नमस्कार¸ मैं हूँ स्यू सलेमन और मैं 'वर्तमान आस्ट्रेलिया' में आपका स्वागत करती हूँ...
आज¸ 'ग्रैंडस्टैंड से एक दृश्य (बेहतरीन दृश्य)'- सिडनी के २००० के ओलिम्पिक खेलों ने आस्ट्रेलिया को अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक ऊँचा स्थान प्रदान किया। खेलों के उद्घाटन समारोह ने लगभग ३1/2 अरब टेलिविज़न दर्शकों को आकर्षित किया था।
सेमारांच¸ आई ओ सीः
" 'गुडडे सिडनी¸ गुडडे आस्ट्रेलिया'
ऐ बी सी खेल प्रसारणः
"आस्ट्रेलिया अब खड़े होकर सम्पूर्ण विश्व से कहने वाला है कि यह हैं हम और हम ऐसा करते हैं और इसको आप तक स्पष्ट रूप से पहुँचाने की हमें अत्यन्त प्रसन्नता है। इस कार्यक्रम को अब हमें शुरू करना चाहिए और अब यह कार्यक्रम शुरू हो चुका है। क्षेत्र में आस्ट्रेलियाई स्टाकहोरस आ रहे हैं जो सूखे आस्ट्रेलियाई प्राकृतिक दृश्यों से ढके हैं और यह एक मनमोहक दृश्य है।"
"१२० व्हेलरस इस प्रदर्शनी में सम्मिलित हैं¸ वह घोड़ा जिसके सफेद नस्ल के उपनिवेशियों द्वारा किए गए उपयोग से आउटबैक से दूरी की समस्या सुलझ गई और आस्ट्रेलिया की सांस्कृतिक ज़िन्दगी में भावात्मक भूमिका निभाई। और लंबी पंक्तियों में दक्षिण से उत्तर की ओर परिधि में चल रहे हैं।"
"सिडनी सिम्फनि वाद्य-मण्डल के 'मैन फ्राम स्नोई रिवर' की तान पर।"
"यदि आप कल्पना कर सकते हैं सैंकड़ों जस्ता चढ़ी हुई लोहे की चादरों और पुरानी मशीनों की तथा रबर की गेंदों की तरह गोल घूमती हुई पानी की टंकीयों की¸ जिनके अंदर या ऊपर अभिनेता उछल-कूद कर रहे हैं।"
"और लकड़ी के वाद्यों की चादरें और अब इनके प्रेमी झुक कर अभिनेताओं का स्वागत कर रहे हैं।"
"और अब मैदान पर नालीदार लोहे की चादरें बिछा दी गई हैं¸ यह वो सामग्री है जिससे आस्ट्रेलिया के दूर स्थित क्षेत्रों का निर्माण हुआ है।"
स्यू सलेमनः
सिडनी के खेलों के स्वागत तथा अंत के समारोह यहाँ की सांस्कृतिक व्याख्या के बेहतरीन उदाहरण हैं तथा मेलबर्न के मोनेश विश्वविद्यालय के नेश्नल सेंटर फार आस्ट्रेलियन स्टडीज़ के विद्यार्थियों को अक्सर दिखाए जाते हैं।
विद्यार्थीः
"सदा से मेलबर्न में रहने के कारण मैंने बारिश के पानी के टैंक तथा नालीदार लोहे की चादरें कभी नहीं देखीं पर मुझे मालूम है कि यहाँ उपस्थित मेरी सखी ऐसा नहीं कहेंगी क्योंकि वे ग्रामीण क्षेत्र से हैं।
"हाँ¸ मेरा बचपन 'हिल्ज़ होएस्ट' (जिस पर लोग कपड़े सुखाते हैं)¸ घास की कटाई की मशीनों¸ नालीदार लोहे की चादरों तथा बारिश के पानी की टंकियों को देखते हुए बीता है। यह मेरा बचपन था और मेरे लिए आस्ट्रेलिया भी यही है। पर मेरे विचार से सभी लोगों के अपने व्यक्तिगत अनुभवों पर आधारित विचार होते हैं। आज आस्ट्रेलिया के भीतर के क्षेत्रों का शहरीकरण हो रहा है परन्तु अभी भी यहाँ कई लोग पुराने तरीकों से रहना चाहते हैं तथा रहते भी हैं। शायद ग्रामीण इलाकों पर कुछ ज़्यादा ज़ोर दिया गया था परन्तु यह भी आस्ट्रेलिया के महत्वपूर्ण अंग हैं।"
"मैंने ग्रामीण क्षेत्रों के प्रस्तुतीकरण की प्रत्याशा इसलिए नहीं की थी क्योंकि मैं एक वीरान इलाके में बढ़ी हुई हूँ¸ मुझे गर्व महसूस हुआ कि इन क्षेत्रों को भी प्रदर्शन में शामिल किया गया। स्वागत समारोह में 'मैन फराम स्नोई रिवर' के संगीत के साथ घोड़ों के प्रयोग ने मुझे तथा मेरे मित्रों को बहुत प्रभावित किया।"
"पारंपरिक रूप से आस्ट्रेलिया का दुनिया में प्रदर्शन ऐसी छवियों से ही किया जाता है इसलिए इनको स्वागत समारोह में दिखाना ही था। लोगों के लिए हर शहर एक समान होता है परन्तु आस्ट्रेलिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है आउटबैक जिसे सम्पूर्ण दुनिया में दिखाया जाता है और यह बात स्वागत समारोह में स्वाभाविक रूप से सामने आई।"
"इसका बहुत ज़्यादा प्रचार किया गया था¸ जैसे कि ओलिम्पिकस से पहले दिखाए जाने वाले विज्ञापनों में सिडनी शहर¸ समुद्री तटों¸ ओपेरा हाउस तथा सिडनी हारबर ब्रिज के चित्र। आपने स्वागत समारोह में सड़कों पर मशाल घूमाते हुए देखा होगा। लोगों ने भी अपना उत्साह तथा समर्थन दिखाने के लिए मशालों तथा भेंटों का प्रयोग किया।"
(संगीतः औस्सी ऑलस्टारस द्वारा प्रस्तुत औस्सी¸ औस्सी¸ औस्सी)
ग्रेएम डेविसनः "वर्ल्ड कप तथा ओलिम्पिक खेलों में राष्ट्रीय पहचान का इन खेलों द्वारा उल्लेखनीय प्रदर्शन होता है। यह देखा गया है कि खेल एक मिश्रित भाषा की तरह हैं जिससे सम्पूर्ण देश एक-दूसरे को पहचान कर एक-दूसरे से बातचीत करता है। लगभग १०० साल पहले व्यापार मेलों तथा ५० वर्ष पहले युद्ध के दौरान राष्ट्रीय एकता का प्रदर्शन होता है परन्तु आज खेल युद्ध की जगह प्रतिस्थापित हो गए हैं।"
स्यू सलेमनः
आस्ट्रेलियाई राष्ट्रवाद पर ऐतिहासिक स्टडीज़ स्कूल के प्राध्यापक ग्रेएम डेविसन ने बहुत लिखा है।
आस्ट्रेलियाई लोगों ने सदा से खेल को राष्ट्रीय पहचान का एक विभिन्न अंग माना है और सिडनी २००० में यह लोग मैदान के खिलाड़ियों की तरह अंतरराष्ट्रीय दर्शकों से खेल रहे थे...
ग्रेएम डेविसनः
"यह एक बहुत बड़ा अवसर था और अपनी अनुकूल छवि प्रस्तुत करने के लिए आस्ट्रेलिया ने बहुत पैसे खर्चे।
स्यू सलेमनः
अब हम उन छवियों की बात करते हैं¸ आस्ट्रेलियाई होने के नाते हमने उन घोड़ों की उपनिवेशीयों से संबन्धित छवियों तथा विक्टा कम्पनी की घास की कटाई की मशीनों¸ जिससे भूमि को सुन्दर बनाया जाता है¸ की छवियों का आनन्द लिया। परन्तु आपके विचार से विदेशी दर्शकों ने इन चिन्हों से आस्ट्रेलियाई इतिहास की विभिन्न घटनाओं के बारे में क्या जाना होगा ?
ग्रेएम डेविसनः
स्वागत समारोह में 'मैन फराम स्नोई रिवर' तथा घुड़सवारों का प्रयोग आस्ट्रेलिया की मान्य छवियां हैं। आस्ट्रेलियाई इतिहास में यह अत्यन्त महत्वपूर्ण रहे हैं तथा 'बुश' गाथा-गीतों और बैंजो पेटरसन की याद दिलाते हैं। वर्तमान में इसका संबन्ध अमरीकी दर्शकों से है जिनका २००० ओलिम्पिकस में आना बहुत महत्वपूर्ण था। अमरीकी लोग घुड़सवारों तथा जंगली फ़्रंटीयरसमैन से स्वयं को संबन्धित कर सके थे। परन्तु जैसा आपने कहा¸ कई प्रकार की छवियों को प्रस्तुत किया गया था¸ जैसी कि आस्ट्रेलियाई ऐबोरजीनी लोगों से संबन्धित छवियाँ जो अत्यन्त अनोखी थीं। इसका उदाहरण है कि १९५६ में आस्ट्रेलिया में ऐबोरजीनेलिटी (ऐबोरजीनी होने का गुण) को बिल्कुल भी महत्व नहीं दिया गया था। परन्तु अब ऐबोरजीनेलिटी ज़्यादा उल्लेखनीय तथा केंद्रीय रूप धारण कर रही है और इस रूप में अमरीकी संस्कृति के मूलतत्व देखने को मिलते हैं। अमरीकियों को ऐबोरजीनी लोगों के महत्वपूर्ण रूप से देश का हिस्सा बनने के स्वाधीन परिश्रम से अत्यधिक सहानुभूति है। कई अमरीकी व्याख्याकारों को ब्लंडस्टोन बूटस में नाचने वाले लोगों तथा घास काटने वाली मशीनों जैसे आस्ट्रेलियाई चीज़ों से जोड़ने में परेशानी होती है। ऐसा इसलिए नहीं है क्योंकि अमरीकियों को ज़्यादा जानकारी नहीं थी परन्तु इसलिए क्योंकि इस प्रदर्शन में वे अधिक गंभीरता देखना चाहते थे। उन्हें सन्देह था कि यदि आस्ट्रेलिया उद्घाटन समारोह में स्वयं का यह रूप प्रस्तुत करेगा तो इस देश को गंभीरतापूर्वक नहीं लिया जाएगा। उनका मानना था कि स्वयं को एक गंभीर रूप देना आस्ट्रेलियाई लोगों के लिए कठिन था।
स्यू सलेमनः
हाँ¸ आस्ट्रेलियाई होने के नाते हम यह जानते हैं कि हम स्वयं को तथा राजनेताओं और अधिकारियों को भी गंभीरता से नहीं देखते और विचार सुनने पर मुझे याद आ रहा है कि किसी और ने भी इन खेलों पर टिपण्णी देते हुए कहा था कि सिडनी ओलिम्पिक खेलों का प्रारम्भ तथा अंत अनुशासित नहीं था। उनके अनुसार इसमें अराजकता के गुण थे तथा अनौपचारिकता थी। क्या आपके अनुसार यह कथन सत्य है?
ग्रेएम डेविसनः
मेरे विचार से उस समारोह में सिडनी की झलक थी। सिडनी २००० में प्रस्तुत की गई सांस्कृतिक अभिव्यक्ति में सिडनी की संस्कृति की ज़्यादा झलक थी¸ यह बहुत ज़्यादा चमकीला था¸ इसमें दिखावा था तथा इसकी कई परतें थीं। मेरे विचार से यह सब उस समारोह का एक हिस्सा ही थे। अनौपचारिकता यहाँ की परम्परा है। यदि आप याद करें तो '५६ के खेलों के अंतिम समारोह में सभी खिलाड़ी अपनी-अपनी राष्ट्रीय मंडली में नहीं थे¸ बल्कि सभी खिलाड़ी एक साथ चल कर आए थे। यह आस्ट्रेलिया के चरित्र तथा व्यक्तित्व को दर्शाता है¸ आस्ट्रेलियाई लोगों के अपनाए गए निश्चित व्यवहार की यह एक झलक थी। फिर भी अमरीकी व्याख्याकारों ने इस व्यवहार पर आपत्ति प्रकट की थी। मुझे याद है कि उन व्याख्याकारों में से एक का कहना था कि जब वे २००० के खेलों के दौरान शहर में घूम रहे थे¸ तो उन्हें अनौपचारिकता तथा 'नो वरीस' कहने की आदत साफ दिखाई दी। परन्तु 'नो वरीस' वाक्यांश को सुनकर उन्होंने यह जानने का प्रयत्न किया कि क्या इस वाक्यांश के भीतर कोई चिंता या परेशानी छिपी है और क्या यह चिंता इस बात की है कि विदेशी लोग उनके बारे में क्या सोचते हैं तथा क्या वे भी उन्हें उतना ही अच्छा समझते हैं जितना उन्हें लगता है कि वे हैं। सांस्कृतिक आलोचक आर्थर फिलिपस ने इस वाक्यांश का निर्माण कई वर्ष पहले किया था और यह वाक्यांश यह दर्शाता है कि आस्ट्रेलियाई लोगों को दूसरों की उनके बारे में सोच की बहुत चिंता रहती है। यह सुनकर आप कह सकते हैं कि एक राष्ट्र के रूप में आस्ट्रेलियाई लोगों का स्वयं पर कम विश्वास है जिसके दो कारण हैं¸ पहला यह कि आस्ट्रेलिया कई वर्षों तक अपनिवेशीयों के आधीन रहा है तथा दूसरा यह कि आस्ट्रेलिया युरोप से बहुत दूर है¸ आस्ट्रेलिया को अपने कार्यों पर युरोपियों के विचार जानने के लिए कई दिनों तक इंतज़ार करना पड़ता था। इसलिए मुझे लगता है कि अपने बारे में सोच में अभी भी आस्ट्रेलिया में उपनिवेशण के दिनों से छोड़ी गई सोच है। यहाँ के फुटबॉल खिलाडियों के बारे में एक प्रसिद्ध मुहावरा है कि वे सदा दर्शकों के लिए नहीं बल्कि "ग्रैंडस्टैंड" या मंच को ध्यान में रखकर खेलते हैं और यह एक आस्ट्रेलियाई विशेषता है।"
विद्यार्थीः
"मुझे इस देश का नागरिक होने पर गर्व है और मुझे याद है कि जब मैंने वह स्वागत समारोह देखा था तो मैंने भी सोचा था कि हमारे देश के चिन्हों को देखकर दुनिया ने हमारे बारे में क्या सोचा होगा। मैं लोगों से जानना चाहूँगा कि उन्हें क्या समझ आया था¸ क्योंकि कई चिन्ह आस्ट्रेलियाई थे तथा मुझे आश्चर्य होता है कि यदि वे हमारी संस्कृति के बारे में नहीं जानते तो उन्हें यह कैसे समझ आया होगा।"
विद्यार्थीः
"बात यह है कि एक विदेशी नहीं जान सकता कि एक आस्ट्रेलियाई सपने का प्रतिनिधि एक हास्यास्पद कमीज़ वाला पुरूष हाथ में घास काटने वाली मशीन लिए करता था और इसे समझना आसान नहीं है। मुझे अभी यही बात ध्यान में आ रही है।"
विद्यार्थीः
"घास काटना उस एक चौथाई एकड़ ज़मीन के स्वामित्व के सपने का हिस्सा है जिसमें लोग शनिवार की सुबह उठकर¸ घास काटकर¸ गाड़ी धोने के बाद परिवार के साथ समुद्री तट पर जाते हैं¸ बाहर खाना खाते हैं¸ कंगारू देखते हैं तथा घर आ जाते हैं और फिर यही क्रियाएँ रविवार को भी करते हैं।"
ओलिम्पिक खेल समारोहः
"एक छोटी लड़की आस्ट्रेलिया के एक मैदान के बीच में जाकर तौलीये पर¸ अपने नाक पर क्रीम लगाकर सो गई तथा सपने देखने लगी। अपने पहले सपने में वह पानी के नीचे थी तथा सुन्दर मछलियाँ¸ ऑक्टोपस तथा अन्य समुद्री जीव देख रही है।
अब इस सपने से आगे बढ़कर वह एक समारोह में पारंपरिक ऐबोरजीनी स्मोकिंग समारोह देख रही है।
उस छोटी सी लड़की का सपना आगे बढ़कर आस्ट्रेलिया के 'वाईट मैन' तक पहुँच गया है।
विद्यार्थीः
"बहुसंस्कृति पर ज़ोर होने के बावजूद भी ऐसा दिखाने का प्रयत्न किया जाता है कि आस्ट्रेलिया में हर प्रकार का चेहरा देखने को मिलता है। वह सपना देखने वाली लड़की सफेद नस्ल की है¸ उसके बाल भूरे रंग के हैं तथा ऐसा लगता है कि वो किसी उपनगर के एक छोटे से घर से आई है¸ आस्ट्रेलियाई विज्ञापनों में भी यही दिखाया जाता है। जब आप सड़कों पर लगे विज्ञापनों को देखते हैं तो उनमें ज़्यादातर सफेद तथा युरोपीय दिखते हैं¸ हालांकि वह चित्र होता एक साधारण लड़की का है परन्तु उस चित्र में बहुसंस्कृति की झलक देखने को नहीं मिलती।"
विद्यार्थीः
"मुझे कार्यक्रम की शुरूआत बहुत अच्छी लगी क्योंकि इस समारोह में मूलनिवासियों को भी शामिल किया गया था¸ मैं ऐसा इसलिए कह रही हूँ क्योंकि मुझे याद है कि ऐटलांटा के उद्घाटन समारोह में स्वदेशी अमरीकियों का नाम तक नहीं लिया गया था। यहाँ पर हुए समारोह में सोच से काम लिया गया था और मूलनिवासियों को भी सम्मिलित किया गया।"
विद्यार्थीः
"मेरे विचार से सम्पूर्ण समारोह को इस प्रकार दिखाया गया था कि जैसे सारा देश बस यही देखना चाहता हो कि कैथी फ़्रीमैन मशाल जलाएँगी या नहीं¸ सब लोगों को जानने की जिज्ञासा थी कि क्या समारोह के अंत में आस्ट्रेलिया ऐबोरजीनी तथा स्वदेशी लोगों से उनके तथा उनकी संस्कृति के प्रति किए गए व्यवहार की क्षमा माँग रहा हो। परन्तु बाकी सारी दुनिया के लोग हमारे इस समारोह से अत्यन्त प्रभावित हुए थे और यही सोच रहे थे कि अगले ओलिम्पिक खेलों के समारोह में आयोजक देश को बहुत अच्छा प्रदर्शन करना पड़ेगा ताकि वे आस्ट्रेलिया में हुए समारोह की टक्कर का हो। ऐसा लग रहा था कि जैसे सारा देश प्रतीक्षा कर रहा हो कि एक ऐबोरजीनी मशाल जलाएगा या नहीं।"
खेल व्याख्याकारः
"और फिर बारी थी कैथी फ़्रीमैन की और उन्होंने २७वें ओलिम्पिक खेलों की शुरूआत बहते हुए झरने तथा अग्नि के बीच की।"
समाचार प्रस्तुतकर्ताः
"कैथी फ़्रीमैन के लिए यह एक महत्वपूर्ण सप्ताह था। उद्घाटन समारोह से पूर्ण वे आस्ट्रेलिया के घर-घर में प्रसिद्ध थीं और अब चार अरब टेलिविज़न दर्शकों ने उनको मिडिया में तथा दुनिया भर में एक प्रसिद्ध पहचान प्रदान की। जब उनसे पूछा गया कि उनके मशाल जलाने से ऐबोरजीनी समुदाय की स्थिति पर क्या प्रभाव हुआ तो उन्होंने कहा कि¸ "ओ¸ यह ऐबोरजीनी समुदाय के लिए बहुत बड़ा प्रोत्साहन था क्योंकि यह ऐसा पहला महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक दिन था। इसलिए मैं आप सब का धन्यवाद करती हूँ¸ ऐबोरजीनी लोगों को इतना सम्मान देने के लिए।"
लिएन वाइटः
"कैथी फ़्रीमैन का इस कार्य के लिए चुनाव एक अच्छा निर्णय था। यह मशाल सम्बद्धता की पहचान थी¸ देश के जुड़े हुए होने की छाप जो ऐअरस रोक से उलुरू से होती हुई सौ दिन के समय में देश के अनेकों समुदायों से जुड़ती हुई कैथी फ़्रीमैन के 'कोलड्रोन' जलाने तक पहुँची। इस उत्सव ने सम्पूर्ण राष्ट्र को जोड़ दिया था।"
स्यू सलेमनः
लिएन वाइट मोनेश विश्वविद्यालय के नेश्नल सेंटर फार आस्ट्रेलियन स्टडीज़ में पूर्व-स्नातक कार्यक्रम को समन्वित करने का कार्य करती हैं।
खेलों के प्रारम्भ तथा अंत के समारोह तथा 'टोर्च रिले' में स्वदेशी समुदाय पूर्ण रूप से सम्मिलित थे।
लिएन वाइटः
"हैरानी की बात है कि यह ज्वाला उलुरू¸ ऐअरस राक में प्रारम्भ की गई थी तथा १०० दिनों में इसे पूरे देश में घुमाया गया तथा विभिन्न समुदाय इसका हिस्सा बने। संगठनकर्ता भी हैरान थे कि यह मशाल लोकप्रिय हो गई थी तथा देश-भर के विभिन्न लोग¸ सैंकड़ों की तादात में इस उत्सव में एक साथ सम्मिलित हुए थे। आस्ट्रेलिया के मैदान में कैथी फ़्रीमैन द्वारा जल तथा अग्नि जैसे प्राकृतिक तत्वों के बीच 'कोलड्रोन' जलाने पर यह समाप्त हुआ और यह आकृष्ट कर देने वाला दृश्य राष्ट्रीय मानसिकता का एक हिस्सा बन गया है।
स्यू सलेमनः
लिएन¸ आपने आस्ट्रेलियाई लोगों के राष्ट्र की महत्वपूर्ण घटनाओं का उत्सव मनाने के तरीकों पर निरीक्षण किया है। मैं इतिहास में मनाई गईं १८३८¸ १८८८¸ १९३८¸ १९८८ तथा द्वितीय शताब्दी के बारे में सोच रही हूँ। ऐसे स्मरणोत्सव हमारी अपने ही देश के प्रति दृष्टिकोण के बारे में क्या प्रकट करता है?
लिएन वाइटः
१७८८ में ब्रिटिश लैंडिंग का उत्सव ५० साल बाद सन् १८३८ में पहली बार मनाया गया था¸ इसका नाम 'वर्षगाँठ दिवस' रखा गया था तथा इसे पारम्परिक ब्रिटिश तरीकों¸ जैसे कि 'ज्युबीली वाल्टज़'¸ 'रिगेटा' तथा ५० तोपों की सलामी से मनाया गया था।
स्यू सलेमनः
आप केप्टन कुक तथा उनके दल के ब्रिटिश सरकार की ओर से आस्ट्रेलिया पर सिडनी में कब्ज़े के उपलक्ष्य में आयोजित स्मरणोत्सव की बात कर रही हैं?
लिएन वाइटः
"हाँ¸ आस्ट्रेलिया में ब्रिटिश देश के कई गुण हैं तथा यह उत्सव भी ब्रिटिश तरीकों से मनाया गया था।"
१९८८ अभिलेखः
"२६ जनवरी १७८८ को सिडनी बंदरगाह पर पहला बेड़ा उतरा था। आस्ट्रेलिया के आधुनिक इतिहास का प्रारम्भ यहीं से हुआ था।"
"खेलों में हासिल विजय के उत्सव राष्ट्रीय गौरव को दर्शाने के तरीके हैं। अब आस्ट्रेलियाई लोगों का स्वागत एक बहुत बड़े उत्सव के लिए किया जा रहा है¸ वह उत्सव जो एक वर्ष तक चलेगा। आस्ट्रेलिया की दूसरी शताब्दी पूर्ण होने का उत्सव।"
"हमारी सबसे प्राचीन संस्कृति ऐबोरजीनी तथा टोरस स्टरेट द्वीप के लोगों के इतिहास¸ कला तथा शिल्प-कला के क्षेत्रों में देखने को मिलती है¸ एक संस्कृति जिसे १९८८ में सम्मान तथा सक्रिय अभिव्यक्ति प्रदान की गई।"
लिएन वाइटः
"हालांकि देश में बदलाव तथा तरक्की हुई है¸ कई पुराने कार्यक्रमों को फिर से जीवित कर दिया गया था। यह कार्यक्रम सिडनी में आयोजित किए गए थे¸ ब्रिटिश लैंडिंग को अभिनय द्वारा दर्शाया गया¸ बड़े-बड़े जहाज़ों का प्रयोग किया गया तथा कई स्वदेशी लोगों ने इसमें भाग भी लिया। परन्तु १९८८ में स्वदेशी लोगों ने इस दिवस को 'आक्रमण दिवस' कहा। उस दिन एक रोचक घटना घटी¸ एक ऐबोरजीनी¸ बरमन बरनम ने इंगलैंड के एक समुद्री तट पर ऐबोरजीनी झंडा लहराया। डोवर की सफेद चट्टानों पर यह एक प्रतीक था कि इस स्थान पर स्वदेशी आस्ट्रेलियाईयों ने अपने नाम की छाप लगा दी है¸ कि यह भूमि अब उनकी है। यह कार्यक्रम दुनिया भर में टेलिविज़न पर प्रसारित किया गया था तथा इस धारणा में लोगों ने अत्यन्त रूचि दिखाई। दुनिया भर के लोगों को यह एक कल्पनात्मक कथा लगी कि आस्ट्रेलिया केवल २०० वर्ष पुराना देश है।"
स्यू सलेमनः
सिडनी खेलों में ओलिम्पिक मशाल जलाने के लिए कैथी फ़्रीमैन का चुनाव स्वदेशी तथा अन्य आस्ट्रेलियाई लोगों के बीच के मेल-मिलाप का प्रभावशाली प्रतीक था। हालांकि मेल-मिलाप में बढ़ोत्री के समर्थकों में वृद्धि हुई है¸ मोनेश विश्वविद्यालय के स्वदेशी विषय केन्द्र की अध्यक्ष का कहना है कि यह सफर अभी भी बहुत लंबा है।
लिनेट रसलः
"हमने मेल-मिलाप के लिए किए गए कई प्रदर्शन एवं कार्यक्रम देखे हैं¸ हार्बर ब्रिज पर एक प्रसिद्ध प्रदर्शन हुआ था जिसमें सैंकड़ों-हज़ारों लोगों ने भाग लिया था। इसका अर्थ यह निकलता है कि मध्य वर्ग के लोग अब आराम से मानते हैं कि आस्ट्रेलिया एक मेल-मिलाप का राष्ट्र है। परन्तु जब तक ऐबोरजीनी लोगों की न्यून्यतम जीवन प्रत्याशा तथा अधिकतम शिशु मरणशीलता है¸ तब तक मेरे विचार से समानता नहीं हो सकती। हमें भविष्य को सुधारना होगा¸ अच्छी शिक्षा¸ अच्छा स्वास्थ्य तथा ऐबोरजीनी लोगों को अच्छा जीवन देना होगा नहीं तो इस मेल-मिलाप का बिल्कुल भी फायदा नहीं होगा।
स्यू सलेमनः
बिल्कुल¸ सिडनी ओलिम्पिक खेलों में स्वदेशी विषयों तथा ऐबोरजीनी आस्ट्रेलिया का प्रस्तुतीकरण पहले हुए राष्ट्रीय उत्सवों से भिन्न था। इसका उदाहरण है १९८८ का स्मरणोत्सव¸ जब ब्रिटिश लोगों के आस्ट्रेलिया आने या फिर ऐबोरजीनी लोगों की भाषा में ब्रिटिश सरकार द्वारा आस्ट्रेलिया पर कब्ज़े के २०० वर्ष पूर्ण हुए थे। आपको सिडनी ओलिम्पिकस में स्वदेशी लोगों के प्रस्तुतीकरण तथा १९८८ के द्वितीय शताब्दी पूर्ण होने के उपलक्ष्य में मनाए गए उत्सव¸ जिसका विरोध भी किया गया था¸ इन दोनों में आपके अनुसार क्या अंतर या बदलाव था।
लिनेट रसलः
१९८८ तथा २००० के बीच में तीन महत्वपूर्ण घटनाएँ घटीं। पहला¸ हिरासत में ऐबोरजीनी लोगों की मृत्यु से इन लोगों के सामाजिक न्यायों के विषय उभरे तथा राजसी आयोग का गठन हुआ। माबो फैसला तथा अन्य संबंधित कानून भी इसी दौरान बनाए गए। माबो फैसले का संबन्ध ऐडी माबो से है¸ माबो ने अपनी पारम्परिक भूमि से जुड़े होने तथा नेटिव टाईटल के अधिकार की माँग की थी। आस्ट्रेलिया में ऐसा पहली बार हुआ था कि किसी ऐबोरजीनी ने यह अधिकार प्राप्त किया था¸ जिससे २०० वर्ष पुरानी यह भ्रांति टूट गई कि युरोपिए लोग सबसे पहले यहाँ आए थे। "टेररा नलिस" का दावा यानी जब युरोपिए यहाँ आए थे तो यह भूमि खाली थी¸ गलत था। इसलिए द्वितीय शताब्दी तथा ओलिम्पिक खेलों के बीच हवालात में मरने वालों पर रोक लगाने के लिए बना राजसी आयोग¸ माबो फैसला तथा "ब्रिन्गिंग देम होम रिपोट" जिसमें मानवीय अधिकारों तथा समान अवसरों के लिए एक आयोग का गठन किया गया जो अलग किए गए ऐबोरजीनी तथा टोरस स्टरेट द्वीप के परिवारों के लिए बनाया गया था। इन तीन घटनाओं से मेरे विचार से यह साबित हो गया कि अब ऐबोरजीनी लोगों के विषयों को छिपाया या भुलाया नहीं जाएगा। इन तीन घटनाओं ने सम्कालीन मध्य वर्ग की सोच में यह बात डाल दी कि ऐबोरजीनी तथा स्वदेशी लोगों से संबंधित विषय अत्यन्त महत्वपूर्ण हैं तथा इसलिए ओलिम्पिक खेलों में ऐबोरजीनी लोगों को शामिल किया गया।
स्यू सलेमनः
हाँ¸ हाल ही में मैंने मेलबर्न में एक माबो सम्मेलन में भाग लिया था और कई ऐबोरजीनी नेताओं का कहना था कि सफेद नस्ल के आस्ट्रेलियाई लोगों के लिए ऐबोरजीनी लोगों को स्वीकार करना कठिन है। परन्तु इन तीन घटनाओं के बाद स्वीकृति अनिवार्य है।
लिनेट रसलः
अब पीछे मुड़ना असंभव है। पर हाँ¸ कई लोग बल्कि मेरे परिवार के कुछ लोग भी ऐबोरजीनी इतिहास को स्वीकार करने में झिझकते हैं। अस्वीकृति अत्यन्त बलशाली होती है परन्तु अब इसे हराया जा सकता है¸ अब पीछे मुड़कर देखना बहुत कठिन है।"
स्यू सलेमनः
लिनेट रसल¸ मोनेश विश्वविद्यालय के ऐबोरजीनी विषय की अध्यक्ष।
(संगीतः मिडनाईट ओएल द्वारा प्रस्तुत मेरा देश)
अगले सप्ताह के कार्यक्रम में हम 'अधूरे कार्य' पर चर्चा करेंगे- आस्ट्रेलिया के स्वदेशी लोग तथा भूमि अधिकार। आशा है कि आप मेरे- स्यू सलेमन- के साथ अगले सप्ताह रेडियो आस्ट्रेलिया पर होंगे।
