कार्यक्रम ४- जंगल से खेतों की ओर
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स्यू सलेमनः
नमस्कार¸ रेडियो आस्ट्रेलिया की इन कड़ियों में आपके साथ स्यू सलेमन- वर्तमान आस्ट्रेलिया...
इस कार्यक्रम में¸ जंगल से खेतों की ओर¸ आज आस्ट्रेलिया के समक्ष खड़े भूमि प्रबन्ध तथा देख-रेख के विषयों पर विचार करेंगे। केवल दो सदियों तक खेती में युरोपिए तरीके अपनाने के लिए काटे गए जंगलों के फल स्वरूप पानी के गुण तत्वों में कमी हुई है तथा मिट्टी भी पहले की भांति उपजाऊ नहीं रही।
जैक थोम्पसनः
"यह सोचकर मैं स्तंभित हो जाता हूँ कि १७८८ से अब तक हमने देश के २० अरब पेड़ काट दिए हैं। आज हम हर रोज़ एक फुटबाल फील्ड जितना हिस्सा गंवा देते हैं। बढ़ते हुए नमक के कारण आने वाली पीढ़ियों तक आज की एक तिहाई उपजाऊ भूमि बंजर हो जाएगी।"
स्यू सलेमनः
भूमि की देख-रेख जैक थोम्पसन का मनपसंद विषय है- आस्ट्रेलिया के सर्वोत्तम अभिनेताओं में से एक¸ 'ग्रीन आस्ट्रेलिया' के लिए जैक ने अपना योगदान न्यू साउथ वेल्स में अपने खेतों पर १८¸००० पेड़ लगाकर दिया है। 'लैंडकेयर आस्ट्रेलिया' नामक संस्था १५ वर्ष पहले स्थापित की गई थी¸ इसका उद्देश्य था आस्ट्रेलिया के खेतों की देख-रेख के लिए नए उपाए खोजना। अब यह संस्था ४¸००० समुदाए दलों तथा ४० प्रतिशत किसानों के सहयोग का दावा करती है।
जैक एक 'लैंडकेयर राजदूत' हैं तथा आपने आस्ट्रेलिया के खेतों की सुरक्षा के लिए केनबेरा स्थित नेश्नल प्रेस क्लब के
समक्ष जागरूती की माँग पेश की...
जैक थोम्पसनः
"मैं गंभीरता से आपसे जागरूक होने का निवेदन करता हूँ। हमारे पर्यावरण की आज जो हालत है¸ उसकी जानकारी मैं आपको देना चाहता हूँ। पर्यावरण की हालत¸ २००१¸ संघ सरकार की रिपोर्ट¸ आप जानते हैं कि इस रिपोर्ट में पर्यावरण की बहुत अच्छी स्थिति बताई जाती है क्योंकि सरकार मानना ही नहीं चाहती कि यह एक बहुत बड़ी समस्या है। यदि सरकार कहे कि हम बहुत बड़ी मुसीबत में हैं तो हमें इस पर सोच विचार करना चाहिए... मेलबर्न में १९८३ की भयानक आँधी तो आपको याद ही होगी¸ इसकी बहुत सुन्दर तस्वीरें ली गईं थीं। खराब भूमि प्रबन्ध तथा सूखे के कारण विक्टोरिया की खेती की मिट्टी नष्ट हो गई थी। जब तेज़ हवा चली तो उसके साथ उपजाऊ मिट्टी भी उड़ गई¸ इस कारण दो करोड़ उपजाऊ मिट्टी आँधी में नष्ट हो गई। उस भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए उपलब्ध की गई पोषक मिट्टी में करोड़ों डालरस का खर्चा हुआ। आप इसका एक हज़ार से गुणा करें तो आपको अंदाज़ा होगा कि हमारे देश की भूमि की क्या हालत हो गई है।"
स्यू सलेमनः संघ सरकार की २००१ की 'पर्यावरण की हालत' रिपोर्ट सन् १९९० से हर ५ वर्ष बाद प्रस्तुत होने वाली कड़ियों में दूसरी रिपोर्ट है।
जैक थोम्पसनः
"जब सन् १९९० में भूमि देख-रेख दशक की घोषणा हुई थी तो उसका लक्ष्य था सन् २००० तक भूमि का निरंतर इस्तेमाल करना। यह समय बीत गया। आपको याद है कि मंत्री ने क्या कहा था? हम उस लक्ष्य को बिल्कुल भी प्राप्त नहीं कर सके। परन्तु अभी भी वो भूमि देख-रेख अभियान अत्यन्त महत्वपूर्ण है तथा हम बदलाव लाने के लिए इसी अभियान का सहारा लेंगे। वे असाधारण पुरूष¸ महिलाएँ तथा बच्चे¸ जो अपने समर्थकों और व्यापारिक तथा सरकारी सलाहकारों के सहयोग से कड़ी मेहनत कर रहे हैं¸ उनकी सहायता से ग्रामीण क्षेत्रों का नया रूप आज सामने आ रहा है।"
स्यू सलेमनः
सन् १९९८ में अंतरराष्ट्रीय लैंडकेयर सचिव की स्थापना हुई जहाँ अच्छी खेती के उपायों का आदान-प्रदान किया जाता था। इसकी एक अध्यक्षा¸ मैरी जोनसन¸ के अनुसार किसानों से बातचीत के दौरान हुए खेती तथा भूमि देख-रेख के अनुभव को अद्वितीय कहा।
आजकल¸ मैरी जोनसन फिलीपीनस में एक ऐग्रोफोरेस्ट्री के आय पैदावार की योजना पर कार्य कर रही हैं।
मैरी जोनसनः
"इस दल के साथ मेरा कार्य है आस्ट्रेलिया के भूमि देख-रेख प्रतिमान पर जानकारी हासिल करना ताकि हम यह जान सकें की किस प्रकार समुदायों तथा सरकार ने आस्ट्रेलिया में इस कार्यक्रम पर कार्य किया है तथा आस्ट्रेलिया के लैंडकेयर प्रतिमान की कौन सी खास विशेषताओं से अन्य लोग प्रेरणा ले सकते हैं। इसके अतिरिक्त हम आस्ट्रेलिया और फिलीपीनस पर्यावरण तथा भूमि से जुड़े अन्य कई विषयों पर चर्चा करते हैं। फिलीपीनस की पानी¸ मिट्टी तथा जंगलों के कटने जैसी कई समस्याएँ हैं जो आस्ट्रेलिया में भी देखने को मिलती हैं।
स्यू सलेमनः
क्या लोगों को आश्चर्य होता है कि आप एक महिला किसान हैं जो खेती तथा भूमि की देख-रेख की वृद्धि से जुड़ी हुई हैं?
मैरी जोनसनः
हाँ¸ उन्हें बहुत आश्चर्य होता है¸ मैं यह कार्य इसलिए करती हूँ क्योंकि वर्षों से मुझे इस कार्य में रूचि रही है। फिलीपीनस जाने पर तथा वहाँ की खेती-बाड़ी तथा 'अपलैंड फारमिंग' देखने के बाद मुझे वहाँ के किसानों से सहानुभूति होती है जब वे अपने उत्त्पादन¸ संचारना या बाज़ार से संबंधित समस्याएँ मुझे बताते हैं।
स्यू सलेमनः
हाँ¸ किसानों की कुछ समस्याएँ दुनिया भर में एक जैसी ही होती हैं?
मैरी जोनसनः
बिल्कुल
स्यू सलेमनः
अब मैं समझ सकती हूँ कि आस्ट्रेलिया ऐड ऐजेनसी का आस्ट्रेलिया ऐड प्रोजेक्टस फंड¸ आसऐड¸ महिलाओं तथा पर्यावरण को अपने ऐड प्रोजेक्टस में महत्व क्यों देती है। क्या आपको यह तर्क-संगत लगता है?
मैरी जोनसनः
हाँ¸ यह अत्यन्त तर्क-संगत है। उदाहरण के लिए¸ आस्ट्रेलिया की जनसंख्या में ५० प्रतिशत महिलाएँ हैं और महिलाओं को शामिल करना सही है। मैंने कई ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य किया है तथा इन लोगों में महिलाओं का बहुत अधिक योगदान था¸ एक गाँव के फारमरस कुओपरेटिव की तो प्रवक्ता भी एक महिला थीं। महिलाएँ एक धागे के रूप में समुदायों को जोड़ती तथा सींचती हैं और आस्ट्रेलिया तथा अन्य देशों के समुदायों के लिए यह अत्यन्त लाभकारी होता है।"
स्यू सलेमनः
मैरी जोनसन उन ओजस्वी महिलाओं में से एक हैं जो अंतरराष्ट्रीय भूमि देख-रेख के सेक्रेटेरिएट की निर्माता हैं। उसकी अध्यक्ष¸ स्यू मैरीयट ने बताया कि उनके पिता एक किसान थे तथा उनका विवाह भी एक किसान से ही हुआ। उनके विक्टोरिया के पश्चिमी क्षेत्र¸ जो ऊन की उपज के लिए प्रसिद्ध है¸ के अनुभव से उन्हें महसूस हुआ कि भूमि प्रबन्ध पर एक बार फिर सोच-विचार करने की आवश्यकता है।
वे भूमि देख-रेख अभियान में तब शामिल हुईं जब एक लोकोपकारी संस्था ने १५ क्षेत्रीय किसानों की सहायता की ताकि वे कम होती मिट्टी तथा बढ़ते हुए नमक जैसी समस्याओं को सुलझा सकें।
स्यू मैरीयटः
"मैं भूमि देख-रेख अभियान से जुड़ी हुई थी तथा मेरे पति जोन १९८५ से १९८८ के बीच स्थापित पोटटर फारमलैंड प्लैन जिसे इअन पोटटर फाउनडेशन से निधि प्राप्त होती है तथा जो पश्चिमी विक्टोरिया में १५ खेतों को चलाते हैं¸ से जुड़े हैं। यह कार्य किसानों को यह दिखाने के उद्देश्य से किया गया था कि वे सीख सकें कि खेती से क्या हासिल किया जा सकता है यदि खेती भूमि की क्षमता के अनुसार की जाए। इसलिए उन्होंने सबसे पहले उस क्षेत्र के पर्यावरण की जाँच की और फिर उस स्थान पर भेड़ें तथा गाय-बैल भेज दिए गए। पुराने ज़माने की खेती में¸ विशेषकर उन इलाकों में जहाँ ज़्यादा बरसात होती है¸ वहाँ दीवारें बना दी जाती थीं तथा मेलबर्न के सर्वेयर के दफ़्तर में एक नक्शे को देखते हुए पूर्व¸ पश्चिम¸ उत्तर तथा दक्षिण में लकीरें खींच दी जाती थीं¸ बिना सोचे कि किस क्षेत्र की भूमि किस प्रकार की हैं। इसका मतलब यह है कि दीवार किसी भी क्षेत्र में बन सकती है¸ चाहे वो बरसात वाला क्षेत्र हो या फिर पहाड़ी इलाका हो¸ और यदि आप अपने जानवरों को वहाँ पर रखें तो बरसात में वो ज़मीन खराब कर सकते हैं अथवा गर्मी में क्षेत्र में चरने से आँधी का कारण बन सकते हैं। इसलिए यदि आप भूमि की योग्यता अनुसार दीवारें बनाएँगे आपके जानवर तथा आपकी भूमि¸ दोनों ज़्यादा स्वस्थ होंगे। अब हम एक खेत की ओर चलते हैं¸ जिसका नाम है हेल्म वियू¸ इस खेत में पोटटर के दिनों में बहुत बदलाव किए गए थे परन्तु वर्तमान स्थिति में यह खेत वैसा नहीं है जैसा सोचा गया था। हमारा अंदाज़ा था कि खेतों के कारण १० से १५ प्रतिशत पेड़ कट जाएँगे परन्तु अब यहाँ ३० प्रतिशत पेड़ हैं।
स्यू सलेमनः
"लिन¸ हम विक्टोरिया के पश्चिमी ज़िले की बात कर रहे हैं¸ वह स्थान जहाँ सबसे अधिक भेड़ें होती हैं। परन्तु आपके यहाँ आने तथा इसे हरा भरा बनाने से पूर्व यह क्षेत्र बहुत घटिया हालत में था। क्या आप हमें बता सकते हैं कि यहाँ की भूमि आपके इस पर देख रेख का कार्य करने से पहले कैसी थी ?
लिन मिलनेः
हाँ¸ इन खेतों की हालत बहुत खराब थी क्योंकि डिपरेशन के दिनों में इन पेड़ों को रिंगबार्क यानी इन पेड़ों को इनकी जड़ों से अलग कर दिया गया था। किसानों को पेड़ों की जड़ें काटने के लिए १० पेन्स दिए जाते थे क्योंकि पुराने किसानों का मानना था कि पेड़ों के कारण घास उगाने में कठिनाई होती थी। वहाँ पर ५० रेड गम पेड़ थे तथा नालियों में नमक भरा हुआ था¸ इसके अतिरिक्त जानवरों तथा लोगों के लिए खाना नहीं था। यह स्थान काम करने के लिए उपयुक्त नहीं था।"
स्यू सलेमनः
लिन मिलने तथा उनके परिवार ने हेल्म वियू नामक उनकी गाय बैलों तथा भेड़ों की सम्पत्ति को भूमि देख रेख आन्दोलन का आदर्शस्वरूप बना दिया है।
लिन मिलनेः
"हम इसे भूमि को खोना नहीं मानते बल्कि अब तो हेल्म वियू में १५ से २० प्रतिशत पेड़ हैं परन्तु अब यह भूमि जानवरों के चरने के लिए उपलब्ध नहीं है।
स्यू सलेमनः
यह भेड़ तथा ऊन उत्पादन वाला क्षेत्र जो हरा भरा बनाने से पूर्व बहुत घटिया हालत में था आज आस्ट्रेलिया में सर्वोत्तम माना जाता है¸ ऐसे अच्छे चरागाह में आप कितनी भेड़ों को चरने देते हैं ? क्या यह कहा जा सकता है कि हरा भरा बनाए जाने के कारण इस क्षेत्र के उत्पादन में बढ़ोत्री हुई है ?
लिन मिलनेः
हाँ एक बार ऐसा हुआ था जब बेसिन नामक एक स्थान पर¸ जहाँ पर बहुत ज़्यादा नमक था तथा जो बिल्कुल भी उपजाऊ नहीं था¸ वहाँ पर हम एक एकड़ भूमि पर केवल एक भेड़ को ही चरवा रहे थे परन्तु फिर हमने वहाँ अमरीकी वीट घास लगाई जो नमक का सामना कर सकती है¸ हमने फिर उसके आस पास पेड़ लगाकर उन्हें सुरक्षित कर दिया। ऐसा करने के बाद वह स्थान ज़्यादा उपजाऊ बना दिया गया¸ अब हम वहाँ पर ५ से ६ भेड़ों को चरने देते हैं तथा अब वहाँ काम करना ज़्यादा अच्छा लगता है।
स्यू सलेमनः
बिल्कुल¸ पोटटर संस्था की सहायता से हरा भरा बनाने से पूर्व की तस्वीरों को देखकर लगता है कि अब इस क्षेत्र में कितनी हरियाली है। क्या आप हमें इस बारे में विस्तृत जानकारी दे सकते हैं¸ आपको कैसी मुश्किलों का सामना करना पड़ा ?
लिन मिलनेः
जब आप खेती के बारे में सोचें तो आपको सिर्फ एक वर्ग के बारे में ही नहीं बल्कि उन सभी विभिन्न आकारों के छोटे छोटे खेतों के बारे में सोचने की आवश्यकता होगी जो बिजली की दीवारों से अलग किए जा सकते हों। आपको बहुत ज़्यादा वृक्ष लगाने की आवश्यकता होगी क्योंकि हम एक ऊँचे जलग्रहण क्षेत्र की बात कर रहे हैं जहाँ से दो नालियों से आस पास के पड़ोसी क्षेत्रों में पानी जाता है। वहाँ पर हमें दीवारें बनानी पड़ीं तथा पेड़ लगाने पड़े ताकि वहाँ से जलग्रहण क्षेत्रों तथा बाँधों में पानी जा सके और वहाँ नमक एकत्रित न हो सके जिससे भूमि और अधिक उपजाऊ हो जाएगी।
स्यू सलेमनः
इसके नीचे के क्षेत्र की यदि हम बात करें तो लगता है कि यह कार्य तो कभी भी समाप्त नहीं होता क्योंकि आपने शियोकस¸ गम तथा अन्य कई स्थानीय बीज वहाँ पर लगाए हैं। क्या इससे आपको कुछ जानकारी मिलती है कि युरोपिए लोगों के आने से पहले यह स्थान कैसा रहा होगा ?
लिन मिलनेः
हाँ हेल्म वियू में एक स्थान है जहाँ हमने पेड़ लगाए हैं। यह एक कूरी मिडन (ऐबोरजीनी लोगों की पारंपरिक जगह) है और हम यहाँ पर ऐबोरजीनी लोगों के शियोकस¸ गम तथा वेटटल के पेड़ों के बीच चलने की कल्पना कर सकते हैं। हमारे यहाँ पर पेड़ लगाने से पहले यहाँ की हालत अच्छी नहीं थी। हमने इस स्थान को सम्मान देने के लिए यहाँ पर पेड़ लगाए हैं तथा अब यह जगह बहुत सुन्दर लगती है तथा इन पेड़ों को देखकर आप पुराने ज़माने को महसूस कर सकते हैं। हालांकि यह पेड़ ५०० से ६०० साल पुराने लाल गम के पेड़ों की तुलना में केवल १५ साल पुराने ही हैं।"
स्यू सलेमनः
आप रेडियो आस्ट्रेलिया पर वर्तमान आस्ट्रेलिया सुन रहे हैं¸ कार्यक्रम चार जंगल से खेतों की ओर।
डीन स्टूअर्टः
"अंतिम आईस ऐज केवल २०००० वर्ष पहले तक थी¸ आप यहाँ से न्यू गिनी तक पैदल भी जा सकते थे। ऐबोरजीनी लोग यहाँ पर थे¸ वे कंगारूओं का शिकार करते थे¸ कंगारू एक पर्णांग (छोटे से पेड़) जितने लंबे होते थे। पश्चिमी ज़िलों में सुबह जल्दी उठकर देखने पर वातावरण में ज्वालामुखियों से उठने वाला धूँआ दिखता था। पश्चिमी ज़िले के अंतिम ज्वालामुखी ऐबोरजीनी लोगों के दिनों में ही केवल ५०००० वर्ष पहले ही समाप्त हुए थे।"
स्यू सलेमनः
भूमि की देख रेख करना ऐबोरजीनी लोगों को बहुत अच्छे से आता है¸ जो विशेषकर उत्तरी¸ पश्चिमी तथा मध्य आस्ट्रेलिया में बहुत अच्छे से भूमि की देख रेख करते हैं।
डीन स्टूअर्ट ने दक्षिणी आस्ट्रेलिया में विक्टोरियन भूमि देख-रेख दलों के साथ उन स्थानों पर कार्य किया है जहाँ घास या किसी भी प्रकार के पेड़ों को भूमि की देख-रेख के लिए हटाना पड़ा। डीन को हैरानी होती है कि इंगलिश लॉनस तथा आकर्षक पेड़ों के लिए प्रसिद्ध मेलबर्न के रोएल बोटेनिकल र्गाडन में उन्हें कूरी हेरिटेज टूर करते हुए अब पाँच साल हो गए हैं।
डीन स्टूअर्टः
"मैं एक स्थानीय परिषद के पर्यावरण विभाग में कार्य करता था तथा भूमि देख-रेख दलों¸ समुदायों तथा कुछ मित्रों के साथ युरोपिए बीज निकालकर भूमि में सफेदे जैसे स्वदेशी बीज डालने का कार्य करता था। मुझे लगता है कि मैं अभी भी यही कार्य करता हूँ। मैं सभी पूर्वनिर्धारित धारणाओं तथा गलत विचारों को निकालकर स्वदेशी को बढ़ावा देने के बीज डालता हूँ¸ मैं स्वयं को यात्रा प्रर्दशक नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक व्याख्याकार बुलाता हूँ। और मैं लोगों को एक झलक के अतिरिक्त कुछ नहीं दे सकता¸ मैं उन्हें इतिहास से वैसी ही गूँज सुना सकता हूँ जैसी अभी कार्यक्रम के दौरान सुनाई दे रही है। मैं बस ९०००० साल पुरानी बातों को ९० मिनट में समझाने का प्रयत्न करता हूँ। आप यह सब एक कक्षा में भी कह सकते हैं परन्तु उसमें वास्तविकता नहीं होगी। रेड गम्स नदी के किनारे तथा पेड़ों की शीतल हवा और काले कोओं की आवाज़ के बीच में, इस भूमि के बारे में जानने का एक अलग ही अनुभव होता है।"
स्यू सलेमनः
डीन का कूरी हेरिटेज आस्ट्रेलियन रेनफॉरेस्ट वॉक की तरह है जहाँ बाग के एक हिस्से में स्वदेशी आस्ट्रेलियाई पेड़ लगाए गए हैं।
डीन स्टूअर्टः
"हम अभी जिस पथ पर हैं उसे रेनफॉरेस्ट बोरडर कहते हैं। पथ के पहले भाग में हम टेसमेनिया से क्वीनसलैंड तक के कुछ हज़ार कि. मी. पूरे करेंगे। यह पहला पेड़ ८० साल पुराना है¸ इसका नाम हूप पाईन है तथा मुरिस तथा क्वीनसलैंड के कुछ ऐबोरजीनी समुदाय इसे कुनुंग कहते हैं। ऐबोरजीनी लोग अपने पत्थरों की कुलहाड़ी से इस पेड़ की आकृति को छील कर इसकी गोंद को निकालते हैं। फिर वे इस गोंद में राख तथा कंगारू टट्टी मिलाकर बढ़िया गोंद बनाते हैं। विक्टोरिया में अब ऐसा नहीं होता परन्तु कुलीन ऐबोरजीनी समुदाए वेटल के पेड़ों से अभी भी गोंद निकालते हैं। वेटल पेड़ की गोंद की मुख्य बात यह है कि यदि उसमें अन्य वस्तुएँ न मिलाई जाएँ तो उसे खाया भी जा सकता है। तो अब मैं चींखना बंद करता हूँ और हम दूसरे दल से जुड़ जाते हैं। चिंता की कोई बात नहीं है। दो विभिन्न दलों के एक साथ चलने का यह अच्छा उदाहरण है। अब इसे अपने हाथों में मलो और उल्टा करो। क्या आप जानते हैं इसमें से किस चीज़ की गंध आ रही है? नहीं? पुदीने की? हाँ¸ इसे मिन्ट बुश यानी पुदीने का पेड़ कहा जाता है तथा इसका स्थानीय ऐबोरजीनी नाम कोरेनडर्क पेड़ है। इस पेड़ के भी कई उपयोग हैं । यह भी इस तरह के कई उपयोग वाले पेड़ों का अच्छा उदाहरण है¸ इसके बहुत से प्रयोग होते हैं¸ इसकी पत्त्तियों को आप सूँघ सकते हैं¸ इससे खाँसी¸ ज़ुकाम¸ साइनस तथा साँस लेने से संबंधित अन्य कई बीमारियों का इलाज किया जा सकता है। इससे माँसपेशियों का दर्द भी ठीक किया जा सकता है¸ टाईगर बाम और डेनकोरब की तरह। यहाँ पर आपको इसकी ज़्यादा पत्त्तियाँ इसलिए नहीं दिख रहीं क्योंकि मेरे साथ यहाँ कई वृद्ध लोग आते हैं और वे जैसे ही सुनते हैं कि इससे माँसपेशियों का दर्द ठीक होता है¸ वे इन पत्त्तियों को तोड़ लेते हैं। इसकी डालों के लगभग ३ फुट लंबे टुकड़े काटे जाते हैं जिन्हें मलने से आग जलाई जा सकती है। आग जलाने के लिए दो डालों की आवश्यकता होती है। इसलिए यदि आप ज़मीन से कोई डाल उठाएँगे तो आपके हाथों में छाले पड़ सकते हैं। यदि आप इन डालों को मलें तो आग जलाई जा सकती है। पुराने उपनिवेशी प्रतिवेदनों में २० से ३० सैकेंडस में आग शुरू करने की प्रक्रिया का विवरण है।"
स्यू सलेमनः
जब यहाँ पर युरोपिए लोग आ बसे तो उन्हें मालूम हुआ कि वे आग लगने से कितने असुरक्षित थे। आस्ट्रेलियाई ऐबोरजीनी लोग बुश आगों के लगने की अधिक संभावनाओं के बारे में अच्छे से जानते थे तथा हमेशा जंगलों को साफ कर देते थे ताकि यदि सूखे मौसम के कारण आग लगे तो उसका प्रभाव उनके घरों पर न पड़े।
टोम ग्रिफिथसः
"ऐबोरजीनी लोग जंगलों में खुला बनाने के लिए आग का प्रयोग करते थे¸ ताकि वे आसानी से शिकार कर सकें। वे आग से जलाए गए क्षेत्र को साफ क्षेत्र मानते थे तथा वे इसे अच्छा मानते थे। वे जंगल को साफ करने के साथ साथ वहाँ पर कुछ हरी हरी घास भी उगाते थे ताकि वहाँ पर शिकार के लिए कंगारूओं जैसे जानवर भी आएँ। वे आग का बहुत सृजनात्मक प्रयोग करते थे।"
स्यू सलेमनः
अधिकांश आस्ट्रेलियाई लोगों की तरह¸ टोम ग्रिफिथस भी यहाँ लगने वाली आग की कहानियों को सुनते हुए बड़े हुए हैं।
टोम केनबेरा के आस्ट्रेलियन नेश्नल विश्वविद्यालय में इतिहासकार हैं तथा मेलबर्न के ऊँचे माउनटेन ऐश जंगलों में बार बार लगने वाली आग पर आपने एक पुस्तक लिखी है।
टिम्बर का इस्तेमाल करने के लिए जहाँ युरोपिए लोगों ने जंगलों के बीच में रहना पसंद किया¸ वहीं स्थानीय ऐबोरजीनी लोगों ने घास वाले बाहरी क्षेत्रों में रहना पसंद किया।
टोम ग्रिफिथसः
"ऐबोरजीनी लोग उन जंगलों के बीच में नहीं रहते। वे जंगलों के किनारों को जलाकर वहाँ रहते थे तथा जंगलों के बीच में भी कुछ भाग जलाकर वहाँ पर आने जाने का रास्ता बना देते थे। परन्तु वे उन जंगलों के बीच में नहीं रहते थे और इसका कारण था कि दक्षिणी पूर्व आस्ट्रेलिया के ऊँचे माउनटेन ऐश जंगल गर्मी के मौसम में बहुत खतरनाक होते हैं विशेषकर उस वर्ष में जब अधिक बरसात न हुई हो। उनके पास सदा के लिए बसने के लिए कोई स्थान नहीं होता था। जब युरोपिए लोग यहाँ आए तो वे टिम्बर के पेड़ देखकर बहुत उत्सुक हो गए और बहुत कम समय में ही इन जंगलों का उपयोग करना चाहते थे। इसलिए जंगलों के बीच में आरा मशीनें लगाई गईं और कारणवश यहाँ पर अधिक आग लगने की संभावना बड़ गई।
स्यू सलेमनः
आपने इस तरह लगने वाली आग को सर्वनाशी आग का नाम दिया है। यह बहुत दहलाने वाला विवरण है और मेरे विचार से इसका सबसे अच्छा उदाहरण है विक्टोरिया की १९३९ में लगी आग। १९३९ की विक्टोरिया की आग का इस दक्षिणी व्यापार पर बहुत बुरा असर हुआ था। हमने भूमि व्यवस्था तथा किसानों द्वारा की जाने वाली भूमि देख रेख के बारे में इस उदाहरण से क्या सीख ली है ?
टोम ग्रिफिथसः
१९३९ के ब्लैक फ्राईडे के दिनों में कई सप्ताहों तक बहुत ज़्यादा गर्मी का मौसम रहा था¸ बहुत वर्षों तक सूखा पड़ा था¸ उस आग में ७१ लोगों की मृत्यु हुई थी¸ आरा मशीनों के कारखानों वाली ६९ बस्तियाँ नष्ट हो गईं तथा कई कसबे पूर्ण रूप से बरबाद हो गए थे। विक्टोरिया का १०.४ लाख वर्ग मीटर हिस्सा जल गया था। यह आग बहुत भयानक थी तथा जो लोग इसे देख चुके हैं¸ वे लोग इस आग को कभी नहीं भूल पाएँगे¸ वे हमेशा इसे याद रखेंगे। हैरानी की बात है कि १९३९ से सौ साल पहले से हम उन जंगलों का लकड़ी तथा पानी के लिए इस्तेमाल कर रहे थे। परन्तु १९३९ में यह जंगल पूर्ण रूप से नष्ट हो गए और हम इसकी वनस्पति को एक बार फिर उगाने पर सोच विचार करने लगे। पहले युरोपिए लोगों को इन पेड़ों तथा जंगलों के बारे में जानने में सौ साल लगे थे¸ उन्होंने माउनटेन ऐश के जंगलों के बारे में जानना चाहा, इसलिए १९४० तथा ५० के वर्षों में वनस्पति विशेषज्ञों तथा वैज्ञानिकों ने ऐश के पेड़ के बारे में जानना शुरू किया¸ उन्होंने जाना कि ऐश के पेड़ों के बढ़ने के लिए ऐसी ही विशाल आग की आवश्यकता होती है क्योंकि ऐश के पेड़ बढ़ने के लिए अंकुरों की एकमात्र आवश्यकता होती है। अन्य सफ़ेदे के पेड़ आग के बाद नई कोंपलें उगा सकते हैं परन्तु ऐश के पेड़ आग लगने के बाद धूप मिलने पर ही अंकुरित होते हैं तथा तब वे नए पौधों का ध्यान रखते हैं। इसलिए एक जंगल को पुनः जीवित होने के लिए आग की आवश्यकता होती है। परन्तु ब्लैक फ्राईडे ने हमें सोचने के लिए मजबूर कर दिया कि हम नए जंगलों का निर्माण कैसे करें¸ इससे हमें यह भी पता चला कि युरोपिए आप्रवासन से आस्ट्रेलियाई प्रकृति अस्थिर हो गई थी। १९३९ के विनाश के बाद आग के कारण जानने के लिए गठित रोएल कमिशन के न्यायाध्यक्ष जज लियोनार्ड स्टरेटन ने कहा कि युरोपिए लोग निर्दोश थे क्योंकि वे यहाँ पर ज़्यादा समय से नहीं रहते थे तथा वे नहीं जानते थे कि उन जंगलों में रहने से उन्हें क्या खतरा हो सकता है। इसलिए आप्रवासन के समय भी तथा आज भी ऐबोरजीनी लोगों से ज़्यादा सीख नहीं पाए। आज भी भीतरी तथा उत्तरी आस्ट्रेलिया में ऐबोरजीनी लोग रहते हैं तथा वे अभी भी पारंपरिक तरीकों से भूमि का इस्तेमाल करते हैं और अब हमनें उन लोगों से सीखना शुरू किया है। अभी भी देर नहीं हुई है¸ कुछ नुकसान हुआ है पर अभी भी हम सुधार कर सकते हैं। एक बहुत अच्छी बात यह हो रही है कि उत्तर के तथा राष्ट्रीय बागों में अब ऐबोरजीनी तथा युरोपिए लोग अब एक साथ देखभाल कर रहे हैं और मेरे विचार से यह एक बहुत अच्छी बात है।"
स्यू सलेमनः
टोम ग्रिफिथस की पुस्तक का नाम है फोरेस्टस ओफ ऐश-ऐन एनवाएरनमेनटल हिस्टरी।
और हालांकि आस्ट्रेलियाई लोगों का सोचना है कि उनके देश की धड़कन दूर स्थित कसबों में है परन्तु आंकड़ों के अनुसार आस्ट्रेलिया की लगभग ८० प्रतिशत जनता शहरों और उपनगरों में रहती है।
इसलिए अगले सप्ताह मुझसे यानी स्यू सलेमन से मिलें जब रेडियो आस्ट्रेलिया नज़र डालेगा एक चौथाई एकड ज़मीन पर एक घर के स्वामित्व के सपने पर।
मेलबोर्न के मोनेश विश्वविद्यालय के नेश्नल सेंटर फ़ॉर आस्ट्रेलियन स्टडीज़ को शैक्षिक सलाह तथा तकनीकी निर्देशन के लिए रेयान ईगन को मेरा धन्यवाद।
