कार्यक्रम ५- "उपनगरों में रहन-सहन
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(संगीतः डेव वारनर की ऐलबम द सबअर्बस में से सबअर्बन बोए)
स्यू सलेमनः
नमस्कार, रेडियो आस्ट्रेलिया पर वर्तमान आस्ट्रेलिया में स्यू सलेमन।
हमारा आज का कार्यक्रम उपनगरों के बारे में है- वह उपनगर¸ घरों वाले क्षेत्र जो आस्ट्रेलिया के प्रमुख शहरों के केन्द्रीय व्यापार के ज़िलों के आस पास हैं।
हालांकि आस्ट्रेलियाई लोगों का सोचना है कि उनके देश की धड़कन दूर स्थित कसबों में है परन्तु आंकड़ों के अनुसार आस्ट्रेलिया की लगभग ८० प्रतिशत जनता शहरों और उपनगरों में रहती है...
हयु मैकेयः
"यह कहना कि हम जंगलों से निकलकर शहरों में बस गए थे हमारे इतिहास से विरूद्ध है। हमने समुद्री तटों वाले क्षेत्रों में रहना शुरू किया था जो हमारे शहर बन गए¸ फिर कुछ लोग ग्रामीण इलाकों में चले गए। यह सत्य है कि पहले ग्रामीण इलाकों की जनसंख्या अधिक थी परन्तु अब कुछ लोगों का शहरों में फिर से आ जाना शुरू हो गया है। हम कभी भी ग्रामीण लोग नहीं थे।
स्यू सलेमनः
हयु मैकेय सिडनी में बसे लेखक तथा सामाजिक संशोधनकर्ता हैं¸ समाचार पत्रों में आप अपने साप्ताहिक लेखों के माध्यम से सम्कालीन आस्ट्रेलिया के नवीनतम बदलावों का विशलेषण करते हैं। मैकेय ने एक उपन्यास लिखा है जिसका मुख्य पात्र एक काउनसीलर¸ टाम का है। इस उपन्यास में मैकेय ने एक उपनगर का विवरण किया है जिसके मुख्य पात्र को यह देखकर बहुत हैरानी होती है कि आस्ट्रेलिया में उपनगरों के लोग भी उपनगरीय रहन-सहन का पालन नहीं करते।
हयु मैकेयः
"हम उपनगरों को तुच्छ समझते हैं¸ मेरे उपन्यास के पात्र 'मैडी'¸ जो टोम के लिए कार्य करती हैं¸ अपने उपनगर के घर को बेचकर केंद्रीय व्यापार ज़िले में अपने पति के साथ चली गई हैं तथा अन्य कई लोगों की तरह वे भी अब शहर की निवासी बन गई हैं¸ मैडी टोम में भी यही परिवर्तन लाने का प्रयत्न कर रही हैं। मैं आपको अपने उपन्यास में से एक भाग पढ़कर सुनाता हूँ जिससे ज़ाहिर होता है कि किस प्रकार टोम पर मैडी ज़ोर डाल रही हैं:
"मैडी उन नवीन लोगों की तरह बन गई हैं जो मानते हैं कि उपनगर में रहने वाले लोग भी उपमनुष्य होते हैं। उपनगरों में रहना बुरा माना जाता है जो उन करोड़ों लोगों के लिए अनुचित है जो उपनगरों में रहते हैं¸ उन लोगों को बार-बार कहा जाता है कि वे केवल उपनगरों से बाहर निकल कर ही पैसा कमा सकते हैं। आप केंद्रीय व्यापार ज़िले में आवास करें¸ बगीचे छोड़ कर केवल छोटी सी छत के नीचे रहने की आदत डालें और यदि आप ऐसा नहीं कर सकते तो किसी ग्रामीण क्षेत्र में बस जाएँ¸ वहाँ अंगूरों या लहसून की खेती करें। लोगों की सोच है कि उपनगर गावों तथा शहरों का सबसे अच्छा नहीं बल्कि सबसे बुरा मिश्रण होते हैं।"
स्यू सलेमनः
यह यथार्थ सत्य है कि हमने अपने उपनगरों से संबंधित पौराणिकता को बढ़ने नहीं दिया है जबकि उपनगरों में आस्ट्रेलियाई लोगों के एक चौथाई एकड़ ज़मीन के स्वामित्व तथा बड़े-बड़े हरियाली भरे भागों के सपने को साकार किया जा सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि हम उपनगरों को आस्ट्रेलियाई धारणा नहीं मानते¸ हम केवल जंगलों को ही आस्ट्रेलिया की विशेषता मानते हैं?
हयु मैकेयः
जी हाँ¸ आपका यह कथन बिल्कुल सही है¸ आस्ट्रेलियाई लोगों को अपने प्राकृतिक दृश्यों¸ अपनी विशिष्टता पर गर्व है। केवल यही नहीं¸ आस्ट्रेलियाई लोगों को तो अपने प्रतिकूल तथा उन क्षेत्रों पर भी गर्व है जहाँ सत्कार करना असम्भव होता है। भूमि से संबंधित यह विचार बहुत मज़बूत हैं कि हम जंगलों को काटने के स्थान पर किनारों पर ही बस जाते हैं। यह सही है कि हमारे उपनगर दुनिया के अन्य उपनगरों जैसे हैं परन्तु फिर भी हमारे उपनगरों का अनुपात अन्य उपनगरों की तुलना में ज़्यादा बड़ा है। आस्ट्रेलियाई लोगों का अपना एक चौथाई एकड़ का घर होने का सपना होता है¸ हालांकि उनके घर इससे थोड़े छोटे होते हैं परन्तु अपना घर होना एक राष्ट्रीय मानसिकता है तथा उपनगरों में रहने को तुच्छ समझे जाने के बावजूद भी यह सपना उपनगरों में ही पूरा हो सकता है जबकि अभी भी यदि किसी को तुच्छ कहना हो तो उसे उपनगरों से जोड़ दिया जाता है¸ उदाहरण के लिए यदि किसी वकील को हीन कहना हो तो उसे उपनगर का वकील कहकर पुकारा जाता है।
(गीत)
स्यू सलेमनः
तो क्या आस्ट्रेलियाई उपनगर अमरीकी उपनगरों (जिसका व्यंग्य पीट सीगर के गीत में किया गया है) या ब्रिटिश 'गार्डन एस्टेटस' से भिन्न होते हैं?
१९८० के वर्षों में ब्रिटेन से यहाँ आई स्यू टर्नबुल अब मेलबर्न के ला ट्रोब विश्वविद्यालय में मिडिया स्टडीज़ की प्राध्यापक हैं।
उनका मानना है कि आस्ट्रेलिया के उपनगरों में कुछ ऐसा विषेश है जो कि उन टेलिविज़न के धारावाहिकों में नहीं होता जो पूरी दुनिया में दिखाए जाते हैं।
स्यू टर्नबुलः
"मैंने ब्रिटिश तथा अमरीकी¸ दोनों ही देशों के उपनगरों के रहन-सहन का अनुभव किया है तथा मुझे लगता है कि आस्ट्रेलियाई उपनगर अमरीकी उपनगरों से ज़्यादा जुड़े हैं क्योंकि यहाँ पर भी घरों के बाहर बहुत ज़्यादा खुला स्थान होता है। ब्रिटिश लोगों के घरों या घरों के बाहर इतना खुला स्थान नहीं होता¸ उन्हें 'आउटडोर' से भी उनता लगाव नहीं है जितना आस्ट्रेलियाई लोगों को है। आस्ट्रेलियाई लोग अन्दर तथा बाहरी जीवन के बीच के संबन्ध को अमरीकियों से भी ज़्यादा आराम से निभाते हैं। इसलिए मेरे विचार से आस्ट्रेलिया का रहन-सहन कुछ अलग है¸ जो मैंने टेलिविज़न पर कभी नहीं देखा जो कुछ अलग प्रकार के ही घर तथा बाहर बने बाग दिखाते हैं। वैसे भी¸ स्टूडियो में उपनगरों तथा आउटडोरस को दिखाना बहुत कठिन है। द्वितीय महायुद्ध के बाद से आस्ट्रेलिया के उपनगरों के घरों में बहुत परिवर्तन हुए हैं। जब मैं १९८० के वर्षों में यहाँ आई थी तो मुझे सबसे ज़्यादा रोचक बात यह लगी कि आस्ट्रेलिया के लोग घर के बाहर की क्रियाओं में बहुत रूचि लेते हैं। आपको बाग़ नहीं बल्कि घर के बाहर मनोरंजन के क्षेत्र मिलेंगे। घर के भीतर बने रसोईघर और बाहर बने तंदूर यानी बारबेक्यू में सीधा संबन्ध होता है¸ जो कि घर के भोजन के साथ-साथ निवासियों के मनोरंजन का एक साधन होता है। इसलिए आस्ट्रेलिया के उपनगरों में रहने वाले लोगों के पास पश्चिमी और स्वदेशी सभ्यताओं का उत्कृष्ट मिश्रण है। जहाँ एक ओर स्वदेशी कसबों की घर के बाहर करने वाली क्रियाओं का चलन है¸ वहीं शहरों की सभ्यता¸ जो कसबों से भिन्न है¸ को भी अपनाया गया है। उपनगरों में इन दोनों का उत्कृष्ट मिलन पाया जाता है।"
स्यू सलेमनः इसलिए आप अपना घर अपनाने का सपना अपने दोस्तों तथा परिवार के साथ मिलकर देख सकते हैं?
स्यू टर्नबुलः बिल्कुल¸ पर एक बड़ी दीवार के पीछे ताकि पड़ोसी आपको न देख सकें।"
गाए हेन्सनः
"द्वितीय महायुद्ध के बाद आस्ट्रेलिया के घरों तथा शहरों के विकास में बहुत ज़्यादा परिर्वतन हुए। आज हम घर अपनाने या एक चौथाई एकड़ ज़मीन की जो बात करते हैं उसकी शुरूआत तब हुई जब बड़े-बड़े शहरों में हुए अर्द्ध-विभाजन की प्रक्रिया प्रारम्भ हुई तथा लोगों ने अपना घर बनाने के लिए मेहनत शुरू की। और फिर अपना घर अपनाने का सपना एक राष्ट्रीय पहचान बन गया।"
स्यू सलेमनः
गाए हेन्सन। द्वितीय महायुद्ध के अंत से १९६० के वर्षों तक आस्ट्रेलिया के ७० प्रतिशत लोगों के पास अपना घर था।
गाए राष्ट्रीय संग्रहालय में एक सहायक हैं जहाँ आप डाएनासोर के कंकाल तथा पुरानी मशीनें देखने की प्रत्याशा करेंगे परन्तु राष्ट्रीय संग्रहालय में आपको एक उपनगर के घर के चिन्ह जैसे कि बारबेक्यू देखने को मिलेंगे।
और जहाँ अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के यह सब देखकर हैरानी होती है¸ वहीं १९५० से प्रसिद्ध यह चिन्ह देखकर वृद्ध तथा जवान¸ सभी आस्ट्रेलियाई लोगों को बहुत अच्छा लगता है।
गाए हेन्सनः
"यह हमारे लिए बहुत रोचक स्थान होता है क्योंकि रसोई से हमारे उपनगरों का इतिहास तथा आस्ट्रेलियाई रहन-सहन का इतिहास जुड़ा हुआ है। यहाँ पर यह रसोई हमारी यादों की एक रंगशाला का स्वरूप है जहाँ लोग आते हैं तथा अपने बचपन तथा आस-पास के पर्यावरण की यादें ताज़ा करते हैं। संग्रहालय में रसोई को देखते ही उनकी यादें ताज़ा हो जाती हैं तथा वे पुराने तथा आज के आस्ट्रेलिया की बातें करने लगते हैं।
स्यू सलेमनः
मैंने देखा है कि बच्चों को भी १९५० के वर्षों से प्रसिद्ध वो लाल लकड़ी की अलमारियों के दरवाज़े खोलना अच्छा लगता है।
"बच्चो¸ क्या आप कुछ अलमारियाँ खोलकर¸ उनके अन्दर देखकर मुझे बताना चाहोगे कि इन अलमारियों में क्या है?
बच्चेः
"हाँ"
स्यू सलेमनः
"और उन १९५० के वर्षों के फ्रिज में क्या होता है?"
बच्चाः
"सुन्दर ग्लास और काफी बनाने की मशीन।"
स्यू सलेमनः
"वो सुन्दर ग्लास आस्ट्रेलिया के एक बहुत महत्वपूर्ण व्यक्ति के हैं¸ क्या आप जानते हैं कि वो कौन है?"
बच्चाः
"डेम ऐडना एवरेज"
स्यू सलेमनः
"आप डेम के बारे में क्या जानते हैं?"
बच्चाः
"ए एम पी विज्ञापनों में वे एक गृहस्वामिनी थीं।"
स्यू सलेमनः
"उन्होंने बहुत सारे नाटक भी किए हैं। क्या अब आप मुझे बता सकते हैं कि इस रसोई से आप क्या समझते हैं¸ क्या आपके घर में भी ऐसी रसोई है?"
बच्चाः
"नहीं यह तो पुराने ज़माने की रसोई है¸ यहाँ के रंग भी फीके हैं¸ अब ऐसी रसोईयों का फैशन नहीं है।"
बच्चाः
"यह पुराने ज़माने की है।"
स्यू सलेमनः
"क्या आपको यह देखकर हैरानी होती है कि यह देश कितना बड़ा है¸ क्या आप में से किसी के घर में इतनी बड़ी रसोई है?"
बच्चाः
"मेरे घर की रसोई बहुत बड़ी है।"
बच्चाः
"मेरी भी।"
स्यू सलेमनः
"क्या आपका परिवार रसोई में खाना खाता है?"
बच्चाः
"नहीं¸ रसाई में नहीं¸ खाने के कमरे में।"
स्यू सलेमनः
"क्या किसी का परिवार रसोई में खाना खाता है?"
बच्चाः
"हाँ¸ हमारी रसोई में एक छोटी सी मेज़ तथा एक बैंच है¸ हम थाली में अपना खाना परोस कर बैंच पर बैठ कर खाते हैं।"
बच्चाः
"हमारे घर में भी ऐसा ही होता है।"
स्यू सलेमनः
"यह चाय पीने की अच्छी जगह होती है?"
बच्चाः
"यह भी और बाहर की धूप भी।"
स्यू सलेमनः
हालांकि लगभग सभी आस्ट्रेलियाई लोग शहरों के शोर तथा प्रदूशण से दूर उपनगरों में अपने बच्चों को पालना पसंद करते हैं¸ परन्तु आस्ट्रेलियाई कलाकारों ने घास काटने वाली मशीन से अपने एक चौथाई एकड़ भूमि पर कटाई करते हुए पुरूषों को आज भी बुश में रहने वाले उन प्रसिद्ध लोगों का स्थान नहीं दिया है।
१९५० के बाद से बैरी हम्फरीस ने बहुत बार "श्रीमती ऐडना एवरेज" का हास्यास्पद अभिनय प्रस्तुत किया है¸ एक व्यंग्य चित्र के रूप में उन्हें "आम उपनगरीय गृहस्वामीनी" की तरह प्रस्तुत किया है। आज डेम ऐडना एक प्रसिद्ध गृहस्वामीनी हैं¸ वे आज भी आस्ट्रेलिया¸ ब्रिटेन तथा अब अमरीका में भी दर्शकों की मनपसंद नायिका हैं।
ऐडना एवरेजः
"मुझसे कई लोग पूछते हैं कि मेरी सफलता का क्या राज़ है¸ मेरे बोलने का तरीका या मेरा पहनावा? यह मेरा आत्मविश्वास है या मेरा व्यक्तित्व¸ परन्तु मैं जैसी दिखती हूँ¸ वही मेरी सबसे बड़ी ताकत है..."
स्यू सलेमनः
श्रीमती ऐडना एवरेज का प्रस्तुतीकरण बैरी हम्फरीस के माता-पिता की पीढ़ी में हुआ था¸ इस पीढ़ी के लोगों ने उपनगरों में अपने घर बनाए थे जो द्वितीय महायुद्ध के उपरान्त आस्ट्रेलिया के शहरों के आस-पास भी फैल गए थे।
सम्कालीन उपनगरीय लोग आज भी रंगशालाओं में जाकर ऐडना एवरेज पर हँस देते हैं¸ यह जानते हुए कि ऐडना एवरेज उनके साथ नहीं है परन्तु फिर भी उसकी झलक उन लोगों को अपने जीवन में देखने को मिलती है¸ उन लोगों के एक चौथाई एकड़ ज़मीन के स्वामित्व के सपने में...
स्यू टर्नबुलः
"सत्य यह है कि अधिकतर आस्ट्रेलियाई लोग उपनगरों में रहते हैं परन्तु ऐसा वे अपनी इच्छाओं के विरूद्ध करते हैं। उन्हें यह अहसास है कि उपनगरों में उन्हें खुली जगह तथा आज़ादी मिल सकती है¸ परन्तु इसके साथ-साथ उन्हें घुटन का अहसास भी होता है। घरों पर नारियों का अधिकार होता है और जैसे बढ़े हो जाने पर अपनी माँ से दूर होना ज़रूरी होता है¸ वैसे ही उपनगरों से दूर होने की आवश्यकता होती है।
स्यू सलेमनः
इस बात से बैरी हम्फरीस द्वारा प्रस्तुत श्रीमती ऐडना एवरेज की छवि उभर कर सामने आती है¸ जो केवल एक व्यंग्यात्मक ही नहीं बल्कि एक अधिकारों वाली महिला के व्यक्तित्व को दर्शाती हैं। वह किस प्रकार इस पद पर बनी रही हैं?
स्यू टर्नबुलः
वह इस पद पर बनी रही हैं क्योंकि वे उपनगरों में रहने के डर से जुड़ी हैं¸ डर अथार्थ लोग उपनगरों में रहना पसंद नहीं करते। वे उपनगरों के उस पड़ोसी को दर्शाती हैं जो दूसरों के बारे में सब कुछ जानना चाहती हैं¸ जो आपको कभी भी ऐकाँत में नहीं रहने देंगी और जिससे आप दूर रहना पसंद करते हैं। डेम ऐडना जैसी महिलाएँ गंदे कपड़े पहनती हैं तथा समाज के वर्गों में बंटे हुए होने में विश्वास रखती हैं। मेरा भी उपनगरों से परस्पर विरोधी इच्छाओं वाला संबंध रहा है¸ मेरा जन्म एक उपनगर में हुआ था तथा मैं भी उपनगर से निकल कर शहरों में रहना चाहती थी। हालांकि कोई भी उपनगरों में वापिस नहीं जाना चाहता¸ सभी लोगों के जीवन में एक समय आता है जब वे अपने बच्चों का एक सुरक्षित वातावरण में पालन-पोषण करने के लिए उपनगरों में रहना पसन्द करते हैं। परन्तु हम में से कई लोगों के लिए अभी भी उपनगर वो स्थान है जहाँ से दूर भागने में ही भलाई समझी जाती है।
स्यू सलेमनः प्रसिद्ध गृहस्वामिनी डेम ऐडना के निर्माता बैरी हम्फरीस यहाँ से निकलने में सफल हुए¸ वे लंबे समय तक आस्ट्रेलिया से बाहर रहे। क्या डेम ऐडना एवरेज और सैंडी स्टोन जैसे पात्र अब पुराने हो गए हैं?
स्यू टर्नबुलः
मेरे विचार से डेम ऐडना और सैंडी स्टोन जैसे पात्र आज की पीढ़ी से प्रासंगिक नहीं हैं। आज की पीढ़ी ऐ.बी.सी. के 'कैथ ऐंड किम' जैसे पात्रों से ज़्यादा प्रासंगिक है¸ यह एक धारावहिक नहीं है¸ यह पूर्ण रूप से हास्यास्पद कढ़ियाँ भी नहीं हैं¸ कैथ ऐंड किम एक 'रियेलिटी टीवी'¸ एक यथार्थ टेलिविज़न की तरह है जिसका जन्म १९९० में बने 'सिलवेनिया वॉटरस' से हुआ है। यह उपनगर में रहने वाले एक परिवार की कहानी है¸ कैथ की माँ सिलेवेनिया वॉटरस में नोलीन की तरह कई बार कैमरा की ओर देख कर बात करती हैं¸ वे कैमरा से सीधा शिकायत करती हैं। यह बार-बार याद दिलाया जाता है कि यह एक धारावाहिक ही नहीं बल्कि एक वित्त-चित्र है। परन्तु कैथ ऐंड किम आज की पीढ़ी के आदर्श हैं।"
(कैथ ऐंड किम से एक उदाहरण)
स्यू टर्नबुलः
"यह मूर्खतापूर्ण है¸ हास्यास्पद 'कैथ ऐंड किम' बिल्कुल उसी उपनगर को दर्शाते हैं जिससे हम दूर रहना चाहते हैं। मेरे विचार से यह सभी बातें हमारे रहन-सहन से जुड़ी हैं, आप कहीं पर भी देखें¸ उदाहरण के लिए किसी भी डॉक्टर के क्लिनिक में आपको मेज़ पर औरतों की पत्रिकाओं के साथ-साथ पड़े हुए सभी समाचार पत्रों तथा पत्रिकाओं में घर सजाने के तरीके मिलेंगे । आस्ट्रेलियाई लोगों को बार-बार यह याद दिलाया जाता है कि सभी रियेलिटी टीवी कार्यक्रमों में भी घर सजाने की ही बात की जाती है। इस के उदाहरण हैं बर्कस बैकयार्ड, बैकयार्ड बल्टिज़¸ होम इमप्रूवमेंटस¸ सभी अपना घर सजाने में व्यस्त हैं और हर बार हमें अपना घर सजाने के सुझाव दिए जाते हैं। वास्तविक रूप में कैथ ऐंड किम हमें समझाता है कि यदि हम अपने घर का ध्यान नहीं रखेंगे तो हमारा क्या नुकसान हो सकता है। तो यहाँ पर टेलिविज़न पूलिस की भूमिका निभाता है और हास्यास्पद रूप में हमें बताता है कि जब हम भूल करते हैं तो क्या होता है।"
स्यू सलेमनः
डाक्टर स्यू टर्नबुल मेलबर्न के ला ट्रोब विश्वविद्यालय में टेलिविज़न के बारे में पढ़ाती हैं और कैथ ऐंड किम आस्ट्रेलिया के सबसे प्रसिद्ध धारावाहिकों में से एक है तथा अब ऐसा ही एक और धारावाहिक बनाया जा रहा है।
आप रेडियो आस्ट्रेलिया पर वर्तमान आस्ट्रेलिया सुन रहे हैं- कार्यक्रम ५- उपनगरों में रहन-सहन।
द्वितीय महायुद्ध के बाद यहाँ आने वाले प्रवासी यहाँ पर सुरक्षा तथा स्थिरता चाहते थे तथा अपना घर होना उनका भी एक उद्देश्य बन गया।
बैरी योर्क तीन साल के थे जब उनके माता-पिता ने १९५४ में मेलबर्न में आप्रवासन किया।
उनके मालटा के पिता तथा ब्रिटिश माता लंदन के प्रदूषण से निकलकर एक नए देश में नया जीवन शुरू करना चाहते थे जहाँ उन्हें काम भी मिल सके।
और जहाँ आस्ट्रेलियाई लोग उपनगरों में अपने सपने का घर बनाने में व्यस्त थे¸ नए लोगों को भी अपना घर बनाने से पूर्व बहुत मेहनत करनी पड़ी।
बैरी योर्कः
"लोग अक्सर यह भूल जाते हैं कि आस्ट्रेलिया में १९५० के सुनहरे दशकों में भी बहुत मेहनत करनी पड़ती थी¸ विशेषकर उन लोगों को जो नए आप्रवासी थे या जो अभी भी अपना घर नहीं बना सके थे¸ अप्रवासियों के लिए तो रहने की जगह ढूँढ़नी भी कठिन थी। हम पहले पोर्ट मेलबर्न में मेरे अंकल जो के हॉक स्ट्रीट के छोटे से घर में रहे थे¸ मालटा से आने वाले सभी लोग अंकल जो तथा उनकी पत्नी डेसी के साथ रहते थे¸ परन्तु ऐसा बहुत देर के लिए नहीं होता था। इसलिए १९५४ से १९५६ तक हमने कई घर बदले¸ बौर्डिंग हाउस स्थानों पर हमारे पूरे परिवार को एक कमरा मिलता था तथा सभी परिवारों के लिए एक ही नहाने की जगह तथा रसोई होती थी। मेरे माता-पिता ओवरटाइम कार्य करते थे तथा हमें कहते थे कि अभी छुट्टियाँ तथा गाड़ी खरीदने को भूल कर एक-एक पैसा जोड़कर पहले हमें अपना घर बनाना होगा ताकि हम सुरक्षित हो सकें और यदि हम ऐसा नहीं कर सके तो हमारा यहाँ प्रवासित होने का उद्देश्य नहीं पूरा हो सकेगा।"
स्यू सलेमनः
शेमरोक स्ट्रीट जैसे उपनगरीय स्थानों पर अलग-अलग तरह के आप्रवासी लोग रहते थे...
बैरी योर्कः
"३० सालों तक शेमरोक स्ट्रीट में रहने पर मैंने आप्रवासन की कई लहरों को महसूस किया¸ हम १९५० के दशक में हुए आप्रवासन की लहर का हिस्सा थे जब मुख्यता ब्रिटेन¸ दक्षिणी युरोप¸ ग्रीस¸ ईटली तथा मालटा से लोग यहाँ आए थे। हमारी गली में डच तथा लेटवीय लोग भी रहते थे। आस्ट्रेलियाई लोग पुराने आइरिश योद्धाओं की तरह बन गए थे¸ वे डिपरेशन के दिनों में बहुत संघर्श कर रहे थे। हम सब लोग सामाजिक तथा आर्थिक रूप से छोटे वर्ग के लोग थे और यही कारण था कि दुनिया भर के विभिन्न भागों से आने के बावजूद भी हम लोगों में एकता थी। कुछ लोग नस्ल के आधार पर भेद-भाव करते थे परन्तु लोग चाहे सिसिलियन हों या लेटवियन¸ सभी को अपने पैसे चुकाने की चिंता लगी रहती थी। कुछ समय बाद 1970 के दशक में ब्रंज़विक तथा शेमरोक स्ट्रीट में तुर्की¸ लेबानन तथा वियतनाम से भी लोग बस गए थे। १९८० के पहले कुछ वर्षों में भी यह एक महँगी जगह नहीं थी¸ बहुत लोग यहाँ पर रहना पसंद करते थे और पश्चिमी ब्रंज़विक के स्कूलों में कुछ सामाजिक तथा आर्थिक रूप से छोटे वर्ग के लोगों के बच्चे भी पढ़ते थे।"
स्यू सलेमनः
जब मध्य तथा उच्च वर्ग के काम करने वाले लोगों को मेलबर्न के ब्रंज़विक¸ जहाँ बैरी योर्क का बचपन बीता था¸ जैसे केन्द्रीय व्यापार ज़िले में रहने से मिलने वाले आराम का पता चला तो यहाँ के अंदर के उपनगरों के घरों के दामों में बढ़ोत्री हुई।
हयु मैकेय का कहना है कि आज कल के युवा ३० वर्ष की उम्र तक अंदर के उपनगरों में रहना पसंद करते हैं और फिर बाहरी उपनगरों में चले जाते हैं जहाँ वे अपना घर और बगीचा बना सकें।
हयु मैकेयः
"आज कल की संतानों के लिए उन स्थानों पर घर खरीदना मुश्किल होता जा रहा हैं¸ जहाँ वे रहना चाहते हैं। हो सकता है कि उन्हें शहरों से दूर के बाहरी या तटीय ईलाकों में रहना पड़े। परन्तु आर्थिक स्थिति में बदलाव के साथ-साथ आज की पीढ़ी में एक मानसिक बदलाव भी देखा गया है कि वे ३० साल की उम्र से पहले अपना घर बनाने की नहीं सोचते। इसकी तुलना में उनके माता-पिता तो २० वर्ष की आयु में ही अपना घर बनाना शुरू कर देते थे। ज़्यादातर लोग अपने पहले बच्चे के जन्म के उपरान्त किराए के मकान में रहने के स्थान पर अपना घर ख़रीदना पसंद करते हैं। हो सकता है कि पहले वे लोग शहरों के पास रहना पसंद करें परन्तु अपने बच्चों का आस्ट्रेलियाई रूप से पालन पोषण करने के हेतु वे उपनगरों की ओर आकर्षित होते हैं।"
स्यू सलेमनः
जहाँ एक ओर द्वितीय महायुद्ध के उपरान्त आस्ट्रेलिया में उपनगरीय रहन-सहन का ही चलन रहा है¸ वहीं दूसरी ओर आस्ट्रेलिया के घरों में रहने वाले सदस्यों तथा परिवारों के आकार में बदलाव हुआ है। इस परिवर्तन का विवरण हयु मैकेय ने अपने उपन्यास 'विन्टर क्लोज़' में किया है...
हयु मैकेयः
"विन्टर क्लोज़ में अपने पड़ोसियों का टोम द्वारा विवरण इस प्रकार है। "क्रिसमस के दिनों में अपने घर के बाहर बैठ कर पड़ोसी ऐबलस तथा नगविनस की खिड़कियों में देखा¸ गली की दावत अब केवल एक सप्ताह दूर थी¸ मैं यहाँ के विभिन्न प्रकार के लोगों के लिए भी भावुक हूँ। दुनिया में बिल्कुल अकेले रहना तथा बिना परिवार के जीवन व्यतीत करना भी नाटकीय हो सकता है और घटते हुए जन्म अनुपात को देखते हुए लोगों को इसकी आदत डालनी होगी। परन्तु मुझे नहीं लगता कि हम एकांतवादी राष्ट्र बनेंगे¸ हम जितना एक तथा दो के जोड़ों में रहेंगे उतना ही हम एकत्रित हो के रहना सीखेंगे। यदि हमारे पास उठने-बैठने के लिए अपने परिवार- जन नहीं हैं तो हमें अपने लिए स्थानापन्न व्यक्तियों की तलाश करनी होगी। मेरे कई मित्रों के लिए यह केवल एकत्रित होकर करने वाला काम है परन्तु मेरे लिए यह विन्टर क्लोज़ है¸ यहाँ के लोग मेरे मित्र ही नहीं बल्कि मेरे परिवार-जन हैं¸ पड़ोसी नहीं।"
स्यू सलेमनः
हयु मैकेय का उपन्यास 'विनटर क्लोज़' उपनगरों पर केन्द्रित है।
अगले सप्ताह मुझे वर्तमान आस्ट्रेलिया की अगली कढ़ी 'कहाँ हैं आस्ट्रेलिया में काम' पर मिलें- तब तक मैं स्यू सलेमन आपसे विदा लेती हूँ।
