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आस्ट्रेलिया इंडिया काऊन्सिल के सहयोग के द्वारा ।

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कार्यक्रम ८- ऐशिया को समझने की कोशिश

:: अंग्रेज़ी में सुनिए - विनडोज़ मिडिया प्लेएर : मिडिया-संबंधित सहायता

स्यू सलेमन :

नमस्कार मैं स्यू सलेमन हूँ और रेडियो आस्ट्रेलिया की कढ़ियाँ वर्तमान आस्ट्रेलिया में आपका स्वागत है।

आज प्रस्तुत है "एशिया को जानना" ।

शीघ्र ही हम आस्ट्रेलिया के तीन एशिया विद्वानों को सुनेंगे जो आस्ट्रेलियाई युवाओं की एशिया के बारे में अधिक जानने में सहायता कर रहे हैं। वे जो एशियाई अध्ययन पढ़ाते हैं, उनका मानना है कि आस्ट्रेलियाई लोगों के इस क्षेत्र के बारे में ज्ञान में वृद्धि से केवल क्षेत्र की समृद्धि तथा क्षेत्रीय सुरक्षा बढ़ ही सकती है ।

और यह एक संदेश है जिसे आस्ट्रेलियाई कोषाध्यक्ष तथा उप-प्रधान मंत्री ने 2002 के बाली बम विस्फोट के बाद ज़ोर देकर दोहराया था। पीटर कोस्टेला ने आस्ट्रेलिया वासियों से बाली में हुई भयावह घटनाओं से एक महत्वपूर्ण सीख लेने का आह्वान किया जो यह है कि उन्हें एशिया के साथ अपने संबंधों को -कमज़ोर नहीं - मज़बूत करना चाहिए।

पीटर कोस्टेलों :

" पिछले सप्ताहंत की घटनाओं ने हम सभी को पुनः बहुत स्पष्ट तथा बहुत ही दर्दनाक तरीके से यह स्मरण कराया है कि किस प्रकार आस्ट्रेलिया तथा एशिया परस्पर रूप में अलग न हो सकने वाली स्थिति में जुड़े हुए है। एशिया की सुरक्षा समस्याएं हमारी सुरक्षा समस्याएं है, एशिया का भविष्य हमारे भविष्य को प्रभावित करेगा और इस क्षेत्र के देश अपने समक्ष मौजूद असीम चुनौतियों से जिस तरीके से निपटेंगे उसमें आस्ट्रेलिया की सक्रिय रूचि है। "

स्यू सलेमन :

आस्ट्रेलिया के लिए एशिया के सामरिक महत्व को रेखांकित करने के लिए आस्ट्रेलियाई कोषाध्यक्ष ने एशिया समाज के आस्ट्रेलिया केन्द्र में एक सभा को यह स्मरण कराया कि आस्ट्रेलिया के वस्तुओं तथा सेवाओं के निर्यात का लगभग 58 प्रतिशत पूर्वी एशिया को होता है- जिसमें जापान आस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है ।

इसी प्रकार आस्ट्रेलिया में होने वाले आयात में पूर्वी एशिया समूह की अर्थव्यवस्थाओं का हिस्सा 47 प्रतिशत है। और पारस्परिक प्रभाव व्यापार से कहीं अधिक है; 2001 की जनगणना में 1.3 मिलियन से अधिक आस्ट्रेलिया वासियों ने अपने को एशियाई मूल का बताया।

आस्ट्रेलिया के एशिया के साथ संबंध के महत्व को आस्ट्रेलियाई एशियाई अध्ययन संस्था द्वारा बनाई गई आस्ट्रेलिया के एशियाई ज्ञान को अधिकतम करना शीर्षक वाली एक रिपोर्ट में और बढाया गया था।

संस्था के अध्यक्ष तथा रिपोर्ट के लेखकों में से एक टेस्सा मौरिस सूज़ूकी संस्था के इस मत को प्रतिबिम्बित करती हैं कि आस्ट्रेलिया को अपने नागरिकों को विश्व के किसी अन्य भाग से अधिक एशिया के बारे में शिक्षित करने के लिए विशेष प्रयास करने चाहिए।

टेस्सा मौरिस सूज़ूकी :

" यह काफ़ी लंबे समय से सत्य है कि आस्ट्रेलिया इस क्षेत्र का एक भाग है, हमारा आर्थिक भविष्य, हमारा सुरक्षा भविष्य इस क्षेत्र के साथ अभिन्न रूप से जुड़ा है। और फिर भी आस्ट्रेलिया में कई लोगों को अमरीका अथवा ब्रिटेन के बारे में जानने की तुलना में एशियाई देशों के बारे में जानने के लिए थोड़े अधिक प्रयास की आवश्यकता होती है क्योंकि उदाहरण के लिए हमें स्वत ही अमरीकी टी.वी. तथा ब्रिटिश टी.वी. से काफ़ी जानकारी मिल जाती है। हमें एशिया से यह बहुत कम मिलती है। इसलिए यह हमेशा सत्य रहा है कि एशिया अत्यधिक महत्वपूर्ण है परंतु मैं यह सोचता हूँ कि यह हाल की घटनाओं से स्पष्ट हुआ है। आतंकवादी खतरे का प्रतिउत्तर देने में स्पष्ट रूप से क्षेत्र में क्या हो रहा है कि विस्तृत जानकारी की आवश्यकता होती है, परंतु वृहत अर्थ में मैं यह सोचता हूँ सुरक्षा भय के बिना जीवन जीना भी है और ऐसा करने के लिए वास्तव में समूचे आस्ट्रेलियाई समूह के लोगों के लिए एशिया की अच्छी जानकारी होना महत्वपूर्ण है क्योंकि आप उससे डरते है जो आप नहीं जानते तथा जिसे आप अच्छी तरह नहीं समझते।"

स्यू सलेमन :

प्रोफेसर टेस्सा मौरिस सूज़ूकी, एक जापानी वक्ता जो कैनबरा में आस्ट्रेलियाई राष्ट्रीय विश्वविद्यालय में एशियाई इतिहास पढ़ाती हैं ।

आस्ट्रेलियाई एशियाई अध्ययन संस्था की रिपोर्ट एशिया की ओर काफ़ी पुराने विद्वतापूर्ण रूचि की ओर इशारा करती है और उन लोगों की प्रशंसा करती है जिन्होंने अनुसंधान तथा व्यक्तिगत संपर्क की नींव को रखा।

सी.पी. फिटज़जेरआल्ड एक आस्ट्रेलियाई विद्वान थे जिनका चीन की क्रांति का ब्यौरा चीनी राजनैतिक इतिहास के विद्यार्थियों हेतु मानक मूल-पाठ बन गया है। प्रोफेसर जॉन फिटज़जेरआल्ड (कोई संबंध नहीं) उनके बारे में स्मरण करते हैं.......

जॉन फिटज़जेरआल्ड :

" युद्ध के तुरंत बाद ; और हाँ हमें युद्ध को ध्यान में रखना चाहिए, द्वितीय विश्व युद्ध तथा प्रशांत युद्ध आस्ट्रेलिया के लिए एक मुख्य सुरक्षा मुद्दा था। युद्ध के तुरंत बाद कई आस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों ने आस्ट्रेलियाई सरकार की सहायता से एशिया तथा इसकी भाषाओं के अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए भारी मात्रा में निवेश किया था। उनमें से एक आस्ट्रेलियाई राष्ट्रीय विश्वविद्यालय था, वह संस्थान जो बाद में ए.एन.यू बन गया, जिसने प्रोफेसर चार्लस पैट्रिक फिटज़जेरआल्ड, सी.पी. फिटज़जेरआल्ड, को इस देश में चीनी इतिहास के अध्ययन को प्रारंभ करने के लिए आस्ट्रेलिया आने के लिए आमंत्रित किया था। ऐसा हुआ कि सी.पी. की पृष्ठभूमि एक पेशेवर इतिहासकार की नहीं थी बल्कि एक ऐसे व्यक्ति की थी जो कई वर्षों तक चीन में रहा था और वहाँ कार्य किया है, जिसने स्वयं एक शौकिया रूप में चीनी इतिहास का अध्ययन किया और जिसने चीन के दक्षिण के स्थानीय समुदायों तथा पहाड़ी जनजातियों पर कुछ किताबें लिखी थी। परंतु चुंकिंग तथा बाद में नानकिंग में सर कीथ वालेस, सर फ़्रेड्रिक एगलेसरन, कीथ ऑफिसर जैसे कई आस्ट्रेलियाई राजनयिक के साथ उनकी मित्रता थी और मैं यह मानता हूँ कि वह अपने संबंधों के माध्यम से आस्ट्रेलियाई के विदेशी मामलों तथा सुरक्षा नेटवर्क में यह मनवा सका कि आस्ट्रेलिया को एक देश के रूप में, आस्ट्रेलिया के लोगों को चीन, जापान तथा क्षेत्र के अन्य देशों को जानने की बहुत वास्तविक आवश्यकता है। चार्लस पैट्रिक फिटज़जेरआल्ड की उस समय चीनी क्रांति के प्रति बहुत अधिक सहानुभूति थी, जबकि विश्व के अन्य भागों में, मैं मुख्यत: उत्तरी अमरीका के बारे में कह रहा हूँ, चीनी क्रांति से सहानुभूति रखने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कुछ धर-पकड़ जैसा चल रहा था और अमरीका में उत्कृष्ट चीनी विद्वानों को उनके पदों से हटा दिया गया था। आस्ट्रेलिया में ऐसा नहीं था, आस्ट्रेलिया चीन पर विशेषज्ञता वाला अपना स्वंय का स्वतंत्र विद्वतापूर्ण नेटवर्क स्थापित करने में समर्थ रहा और इसने प्रारंभ से ही क्षेत्रीय मुद्दों पर गंभीरता दिखाते हुए तथा चीन में क्रांति को विदेशी शक्तियों द्वारा एक सदी तक अपमान तथा आक्रमण के पश्चात कई तरीकों से आम लोगों की आकांक्षाओं की पूर्ति करने वाली एक क्रांति मानते हुए इससे सहानुभूति रखी और अपने को उत्तरी अमेरीकी तथा यूरोपीय विद्वता से अलग रखा । और एक इतिहासकार के रूप में आस्ट्रेलिया में उनकी पहली पुस्तक, " आधुनिक चीन का उदय" अंतर्राष्ट्रीय रूप से बहुत-बहुत प्रभावशाली रही और इसने वस्तुत: अंग्रेज़ी-बोले जाने वाले विश्व के अन्य भाग से आ रही अप्रिय प्रकार की विद्वता को रोकने में सहायता की।"

स्यू सलेमन: जॉन फिटज़जेरआल्ड, एक मंदारिन वक्ता जो मेलबर्न के ला ट्रोब विश्वविद्यालय में एशियाई अध्ययन के प्रोफेसर है।

जहाँ आस्ट्रेलिया के एशिया विद्वान आस्ट्रेलिया के भीतर एशिया की बेहतर समझ को बढ़ाने के लिए कार्य कर रहे हैं, वहीं एशिया में आस्ट्रेलिया के प्रति विचार प्राय: बहुत पुराने है।

प्रोफेसर रॉबिन जेफ़री, जो हिन्दी जानते हैं तथा जो ला ट्रोब में राजनीति शास्त्र पढ़ाते है, नियमित रूप से भारत जाते हैं जहाँ कई लोग मानते है कि "श्वेत आस्ट्रेलियाई नीति", प्रतिबंधित आप्रवास का कार्यक्रम, अभी भी लागू है - भले ही इसे 1970 के दशक के प्रारंभ में अधिकारिक रूप से समाप्त कर दिया गया था।

रॉबिन जेफ़री :

" मैं नहीं समझता कि इस समय भारत में आस्ट्रेलिया का अधिक सम्मान है। आज भी अक्सर लोग आपके साथ श्वेत आस्ट्रेलिया का विशेषण लगाएंगे क्योंकि लोगों को अच्छी तरह इस बात का पता है कि, भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान इस तथ्य का अच्छी तरह प्रचार किया गया था कि आस्ट्रेलिया में एक नसलीय आप्रवास नीति है। और मैं सोचता हूँ कि यह विरासत अभी भी भारत में विद्यमान है परंतु आस्ट्रेलिया-भारत संबंधों में एक विचित्र विरोधाभास है, वह यह है कि यद्यपि यह संबंध आधुनिक समय में कई सौ वर्षों से चल रहे हैं तथा यद्यपि भाषाएँ समान हैं और परस्पर क्रिया-कलापों के बहुत अधिक होने के लिए कारण हैं, फिर भी यह परस्पर क्रिया-कलाप अधिकांशत: पूर्ति के संभव स्तरों पर पहुंचते हुए प्रतीत नहीं होते। और यह एक विरोधाभास तथा समस्या है, जो क्यों है को किसी ने भी संतोषजनक रूप से स्पष्ट नहीं किया है, इसके लिए कई सिद्धांत प्रस्तुत किए गए परंतु इनमें से कोई भी निर्णायक नहीं है।"

स्यू सलेमन :

" टेस्सा, जापान में आस्ट्रेलिया का बोध - क्या हमें अभी भी किसी दूर की श्वेत बस्ती के रूप में देखा जाता है?

टेस्सा मौरिस सूज़ूकी :

हाँ, मैं सोचती हूँ जो जापान में हुआ वह काफ़ी दिलचस्प है । मैं मानती हूँ कि लोकप्रिय स्तर पर जापान में आस्ट्रेलिया के प्रति मुख्य बोध पर्यटन, वन्यजीव, प्रकृति, कोअलास तथा कुछ हद तक खेल का है । इयन थोर्प जापान में अत्यधिक लोकप्रिय हैं । पर एक थोड़े अधिक शैक्षिक स्तर पर हाल ही में जापान में आस्ट्रेलियाई बहुसंस्कृतिवाद तथा जिन तरीकों से आस्ट्रेलिया एशिया के साथ संबंध बना रहा है, में वास्तव में काफ़ी रूचि दिखाई जा रही है क्योंकि जापान की भी एशिया के साथ संबंध बनाने में अपनी समस्याएं हैं और यद्यपि परंपरागत रूप से जापान को एक बहुत समजात आबादी वाले देश के रूप में देखा जाता है परन्तु वास्तव में यहाँ भी विदेशी निवासी बढ़ रहे हैं तथा बहुसंस्कृतिवाद के प्रश्न उठ रहे हैं । इस तरह मेरे लिए यह देखना काफ़ी दिलचस्प है कि कई विद्वान यह पता लगाने के लिए यहाँ आए हैं कि आस्ट्रेलिया में बहुसंस्कृतिवाद के रूप में क्या हो रहा है । पर यह भी है कि पिछले कुछ वर्षों में कुछ हद तक आस्ट्रेलिया में बहुसंस्कृतिवाद के संबंध में वह सक्रियता देखने को नहीं मिलती है जो पहले दिखाई देती थी । और मुझे इसका पता तब लगा जब कुछ सप्ताह पहले मेरा एक मित्र एक जापानी विश्वविद्यालय से आस्ट्रेलिया भ्रमण के लिए आया तो हम एक पुस्तकों की दुकान में गए और वहाँ उसने इधर-उधर देखा तथा फिर गहरी निराशा के साथ कहा कि बहुसंस्कृतिवाद पर सारी पुस्तकें कहाँ हैं ? यहाँ बहुत सारी पुस्तकें हुआ करती थीं परंतु अब नहीं है । इसलिए मैं सोचती हूँ कि जापान में आस्ट्रेलिया की तस्वीर आज थोडी सी उभयभावी है ।

स्यू सलेमन :

जॉन यदि मैं आपसे बात करूँ तो स्पष्टतः आस्ट्रेलिया के भीतर हमारे पास काफ़ी महत्वपूर्ण चीनी प्रवासी लोग रह रहे हैं । क्या आप सोचते हैं कि यह चीन के भीतर आस्ट्रेलिया के सामान्य बोध में प्रतिबिम्बित होता है ?

जॉन फिटज़जेरआल्ड :

सम्भवतः इस क्षेत्र के अन्य देशों से अधिक । यह सत्य है कि चीन में भी कई लोग पॉलीन हैनसन के उदाहरण को याद करते हैं जिसने 6 वर्ष पूर्व कई टिप्पणियाँ दी थीं और एक लोक आन्दोलन का नेतृत्व किया था, जिसका भले ही 120 सदस्यों की राष्ट्रीय संसद में केवल एक बार ही एक सदस्य था, जो बिल्कुल भी बहुत लोकप्रिय नहीं था फिर भी इसने दक्षिण-पूर्व तथा पूर्वी एशिया में यह व्यापक विचार उत्पन्न किया कि श्वेत आस्ट्रेलियाई नीति मौजूद है तथा ठीक-ठाक चल रही है । और लोगों को अन्यथा मनाना बहुत मुश्किल है । वस्तुतः मेरे विचार में इस देश में एशिया के अध्ययन को बढ़ाने का औचित्य आस्ट्रेलियाई लोगों को एशियाई आस्ट्रेलिया के बारे में क्या सोचते हैं में लगाने, उसे समझने तथा उसमें जहाँ सुधार की आवश्यकता है वहाँ सुधार करने को प्रोत्साहित करने के लिए है । अब यह दिलचस्प है जब आप कहते हैं कि चीन से कई लोग आस्ट्रेलिया आए हैं, आस्ट्रेलिया में रहते हैं, इन के सम्बन्धी आस्ट्रेलिया में हैं और उदाहरण के लिए यदि चीन के लोगों के साथ मेरी यात्राओं अथवा मेरे विद्यार्थी अनुभवों में कोई श्वेत आस्ट्रेलिया का सन्दर्भ है तो प्रतिउत्तर शीघ्र ही यह कहना होता है कि 'अच्छा, आपका वहाँ कोई मित्र नहीं है ?' और 'अच्छा, मेरा एक मित्र मेलबर्न में है' और हाँ वह चीनी वंशाक्रम वाले (यानी जिनके पूर्वज चीन से यहाँ आये थे) उन पाँच सौ हज़ार लोगों में से एक है जो अब आस्ट्रेलिया में रहते हैं । और एक बार लोग इन दो तथ्यों को एक साथ रखें, 1 - यह कि आस्ट्रेलिया का स्पष्ट नस्लवाद का एक इतिहास है और यह निश्चित रूप से तथ्य है कि इसका इतिहास ऐसा है, परन्तु 2 - इस देश में चीनी वंशक्रम वाले 500 हज़ार लोग हैं जो यहाँ कार्य कर रहे हैं, रह रहे हैं, सामना कर रहे हैं तथा यहाँ खुशी-खुशी रह रह हैं और जो चीन तथा दक्षिण-पूर्व एशिया में अपने मित्रों तथा संबंधियों के साथ लगातार सम्बन्ध बनाए हुए हैं । और मैं यह मानता हूँ कि यह भाव धीरे-धीरे बदलता है जो इस देश में चीनी आस्ट्रेलियाई लोगों की कई भूमिकाओं और उनकी आस्ट्रेलिया तथा क्षेत्र के अन्य देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका के कारण हैं ।"

स्यू सलेमन :

आस्ट्रेलिया के एशियाई ज्ञान को अधिकतम करने की रिपोर्ट जिसे आस्ट्रेलियाई एशियाई अध्ययन संस्था द्वारा तैयार किया गया था इस तथ्य को र्दशाती है कि बड़ी संख्या में आस्ट्रेलियाई लोगों के लिए एशिया के देशों के साथ परस्पर संबंध जीवन की एक वास्तविकता बन गयी है - चाहे यह व्यापार हो अथवा सरकारी कारोबार, पर्यटन, अध्ययन अथवा प्रवास के लिए ।

परन्तु रॉबिन जेफ़री जिन्होंने रिपोर्ट का समन्वयन किया यह चेतावनी देते हैं कि एशिया के अध्ययन के लिए आस्ट्रेलिया में 1980 तथा 1990 के दशक में आई तेज़ी को हमें कम नहीं आंकना चाहिए ।

रॉबिन जेफ़री :

" हमने एक काफ़ी निम्न आधार से प्रारम्भ किया । 1980 के दशक के अन्त में जब हमारे जैसा ही पिछला सर्वेक्षण किया गया था तो आधार पूर्व-स्नातकों का दो अथवा तीन प्रतिशत के लगभग था, 80 के दशक के अन्त में तथा 90 के दशक के प्रारम्भ में कुछ क्षेत्रों में काफ़ी सुधार हुआ था और उसके बाद जो हुआ, वह मैं सोचता हूँ कि सम्भवतः दो अथवा तीन गुना था । पहला- एशियाई आर्थिक उलट-फेर से एशिया से आस्ट्रेलियाई लोकप्रिय विचार हटना शुरू हुआ क्योंकि मैं सोचता हूँ कि अभिभावक तथा विद्यालयों में पेशा शिक्षक यह कह रहे थे कि इससे आपको कोई रोज़गार तो नहीं मिलेगा इसलिए विश्वविद्यालय का विकल्प मत चुनिए । दूसरे तत्व के भीतर आस्ट्रेलिया विश्वविद्यालयों में पिछले 6 अथवा 7 वर्षों में एक गम्भीर वित्तीय समस्या है जिससे स्टाफ में कटौती हुई है विशेषकर सामाजिक विज्ञान तथा मानविकी और भाषा शिक्षण के क्षेत्रों में, इस तरह उपलब्धता कम हुई है क्योंकि उनके शिक्षण में समर्थ व्यक्ति कम हुए हैं । और इन सबको मिलाकर एक तीसरा कारण बनता है, जो पिछले 6 या 7 वर्षों में आस्ट्रेलियाई सार्वजनिक जीवन में एशियाई वास्तविकता को सांकेतिक रूप से कम करने का है और यह राजनीतिज्ञों तथा विश्वविद्यालय प्रशासनों की ओर से भी अप्रत्यक्ष रूप से है क्योंकि उन्होंने पैसा बचाने के लिए कुछ कार्यक्रमों के कुछ विशेष अंशों को समाप्त कर दिया था, जो उन्हें करना ही था । इस प्रकार ये तीनों आस्ट्रेलिया के विश्वविद्यालयों में एशिया के अध्ययन के कुछ क्षेत्रों में इस स्थिरता में और कुछ अन्य में वास्तविक कमी के रूप में परिणित हुए हैं ।

स्यू सलेमन :

हाँ, जैसा कि आपने एशियाई वित्तीय संकट का उल्लेख किया और मैं सोचती हूँ कि आप समझ सकते हैं कि वे विद्यार्थी जिन्होंने यह सोचा होगा कि इस क्षेत्र में किसी एशियाई भाषा से उन्हें कोई रोज़गार अथवा कार्य मिल जाएगा, उन्हें अब इस योजना को समाप्त करना पड़ेगा । पर जॉन जब आप इस क्षेत्र में अर्थशास्त्र पर और चीन शक्तिगृह बन रहा है पर विचार करें, तो यह आपको अभी भी थोड़ा-बहुत ना समझा जा सकने वाला लगता है ?

जॉन फिटज़जेरआल्ड :

मैं मानता हूँ कि पहली बात तो यह है कि आंकड़े समान नहीं है । हम इन्डोनेशियाई अध्ययन में अपेक्षाकृत कमी देखते हैं परन्तु चीन के अध्ययन में उससे मिलता-जुलता कुछ नहीं मिलता । चीन ने कठिन समय में भी काफ़ी अच्छा कार्य किया है । क्यों ? क्योंकि चीन को एक ऐसे स्थान के रूप में देखा जाता है जहाँ से हमारे पहले मित्रों में से कई आए, कई आस्ट्रेलियाई चीनी पृष्ठभूमि के हैं और उनके इस समुदाय में मित्र हैं और वे उनके साथ चीनी में बात करना चाहते हैं । दूसरा, आस्ट्रेलिया और चीन के मध्य बहुत आना-जाना है जैसा कि सौ-हज़ार आस्ट्रेलियाई लोग हर वर्ष चीन जाते हैं और यह 25 सालों से चल रहा है, यह आस्ट्रेलियाई लोगों की काफ़ी संख्या है । यह अब एक तथ्य है कि कुछ ही वर्षों में सौ-हज़ार चीनी पर्यटक प्रत्येक वर्ष आस्ट्रेलिया आएँगे । निश्चित रूप से व्यापारी लोगों के प्रतिनिधि मण्डल और कुछ व्यक्ति यहाँ का कई वर्षों से भ्रमण कर रहे हैं परन्तु पर्यटन एक अलग उद्योग है, एक अन्य सांस्कृतिक उद्यम, जो लोगों के आदान-प्रदान में परिणित होता है, जिससे भाषा-अध्ययन प्रोत्साहित होता है । और तीसरा - बच्चे अपने माता-पिता तथा अपने आस-पास के परिवेश में अपने दोस्तों से सीखते हैं कि चीन, ताइवान और हाँगकांग में रोज़गार हैं ।

रॉबिन जेफ़री :

"जॉन जो कह रहे हैं वह सही है पर फिर से हमें व्यापक रूप से सोचना होगा । 2002 में आस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों में लगभग 830 हज़ार विद्यार्थी अंश-कालिक अथवा पूर्ण-कालिक तौर पर शामिल थे । पिछले वर्ष चीनी पढ़ने वाले अधिक से अधिक 6 हज़ार विद्यार्थी थे । इस तरह यह पूरे दस्ते का एक छोटा सा भाग है, चीनी अन्यों से बेहतर कर रहे हैं परन्तु वह दस्ता बहुत छोटा है, यह किसी एशियाई भाषा को पढ़ रहे पूर्व-स्नातक का तीन प्रतिशत या कम है, इस तरह 830 हज़ार का तीन प्रतिशत कुछ हज़ार होता है पर मुझे आशंका है कि स्विस अथवा डच या स्वीडिश जो अंग्रेज़ी अथवा भले ही जर्मन या फ़्रेंच अथवा रूसी का अध्ययन करते हों उनकी संख्या इतनी नहीं होती है ।"

स्यू सलेमन :

क्या हम जापान की ओर रूख करें, टेस्सा, एशियाई वित्तीय संकट से पहले जापान आस्ट्रेलिया के सबसे बड़े व्यापार साझेदारों में से एक था, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, यहाँ आने वाले जापानी पर्यटकों की संख्या को तो छोड़ ही दीजिए । जापानी भाषा के अध्ययन का क्या हुआ है?

टेस्सा मौरिस सूज़ूकी :

" जापानियों के साथ कहानी थोड़ी बहुत मिश्रित रही है । इसने कुछ अन्य क्षेत्रों में तो इतना खराब प्रदर्शन नहीं किया है पर स्पष्ट रूप से 80 के दशक के अंत में तथा 90 के दशक के प्रारंभ में जापानियों तथा जापानी अध्ययनों में हुई बड़ी वृद्धि कम हो गई है । और निश्चित रूप में इसे थोड़ा बहुत जापानी अर्थव्यवस्था के उलट-फेर से जोड़ा जाता है । मैं सोचती हूँ कि यह कुछ हद तक संभवतः इस वास्तविकता को भी प्रतिबिम्बित करता है कि शुरू के वर्षों में जो लोग जापानी का अध्ययन करने गए उनमें से कुछ में थोड़ा बहुत अति-आशावाद था । मैं सोचती हूँ कि कुछ लोगों ने इसे इस विचार के साथ प्रारम्भ किया कि वे कुछ वर्षों तक जापानी का अध्ययन करेंगे और लगभग बढ़िया जापानी बोलना सीख लेंगे तथा उन्हें एक अच्छे वेतन वाला रोज़गार मिल जाएगा । और इनमें से कुछ भी घटित नहीं हुआ । पर फिर भी यदि मैं रॉबिन द्वारा एशियाई विद्यार्थियों में भरती के अपेक्षाकृत कम स्तर के कारणों के बारे में कही गई कुछ बातों में थोडा और जोड़ सकूँ तो मैं सोचती हूँ कि एक समस्या यह थी कि अस्सी के दशक के अंत में तथा 90 के दशक के प्रारम्भ में एशियाई अध्ययनों में बहुत अधिक वृद्धि हुई और इस समझ की एक प्रवृत्ति आई कि हमने ये कर दिया है, हम यहाँ हैं, हमने वो कर दिया है, अब अन्य वस्तुओं की ओर बढ़ने का समय है । और जिस पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया वह यह था कि यह वास्तव में एक दीर्घावधि प्रयास है और एक अधिक लंबे समय तक एशियाई अध्ययनों को विकसित करते रहने के लिए एक नेतृत्व तथा प्रोत्साहन की आवश्यकता है क्योंकि जैसा कि रॉबिन ने कहा कि हम एक छोटे से आधार से शुरू कर रहे थे । और यह कठिन है मेरे कहने का अर्थ है कि एक जन्मजात अंग्रेज़ी बोलने वाले के लिए चीनी अथवा जापानी सीख पाना बहुत कठिन है इसलिए उसके लिए सामान्य अवधि से लंबी अवधि के लिए उस ज़ोर तथा उस उत्साह को बनाए रखना ज़रूरी है और मैं अनुमान लगाती हूँ कि इस रिपोर्ट को बनाते समय हमारे द्वारा ध्यान रखे गए विचारों में से यह वास्तव में एक था ।"

स्यू सलेमन :

यह वर्तमान आस्ट्रेलिया कार्यक्रम 8 - "एशिया को जानना" है ।

स्यू सलेमन :

" क्या प्राथमिक विद्यालयों के स्तर पर एशियाई भाषाओं की शिक्षा देना एक स्वस्थ बहुसंस्कृतिवाद, हमारे अपने समुदाय, जिसमें स्पष्ट रूप से नस्लीय विविधता बढ़ रही है, के मध्य स्वस्थ संबंधों को बढ़ावा देने के लिए भी महत्वपूर्ण नहीं है, टेस्सा ? "

टेस्सा मौरिस सूज़ूकी :

जी, हाँ, मैं सोचती हूँ कि यह बहुत महत्वपूर्ण है । मैं सोचती हूँ कि यह एक प्रकार के वृहतर शैक्षणिक उद्देश्य के लिए महत्वपूर्ण है और वह है कि विदेशी भाषाओं को सीखना, विशेषकर वे जो आपके द्वारा सामान्यतः कक्षा में बोली जाने वाली भाषाओं से बहुत भिन्न है, मस्तिष्क को बहुत ज्यादा खोलने का एक अनुभव है । यह आपको अपने बारे में जानना सिखाता है, यह आपको बहुत सी ऐसी वस्तुओं, जिन पर आप ध्यान नहीं देते थे, को एक नई रोशनी में देखना सिखाती है । मैं सोचती हूँ कि इस तरह से यह उन विद्यार्थियों के लिए भी, जो इन भाषाओं का अध्ययन उच्चतर स्तरों पर नहीं करेंगे, एक वास्तव में महत्वपूर्ण शैक्षणिक अनुभव है ।"

स्यू सलेमन :

ठीक है जॉन हम इस विषय पर आपको समाप्त करने के लिए कहेंगे कि एक ऐसे संसार में जहाँ धर्म, संस्कृति देशों में जीवन तथा मृत्यु का मामला हो सकता है । क्या वर्तमान वातावरण में सही अन्तर-सांस्कृतिक संचार और एक-दूसरे की संस्कृति तथा धर्म की समझ आवश्यक हो जाती है ?

जॉन फिटज़जेरआल्ड :

हाँ, यह सत्य है, वस्तुतः हम एक बहु-सांस्कृतिक समुदाय में रहते हैं और हमारे लिए आवश्यक अन्तर-सांस्कृतिक संचार को विद्यालय में ही बहुत आसानी से सीखा जा सकता है । जब मैं अपने बच्चों के विद्यालय के बारे में सोचता हूँ, वे मेलबर्न में एक आंतरिक शहर विद्यालय में पढ़ते हैं, जहाँ 50 प्रतिशत बच्चे एशियाई पृष्ठभूमि वाले हैं, वे एशियाई आस्ट्रेलियाई है । यह एक सरकारी विद्यालय है और जितना वो एशिया के बारे में अथवा कोई एशियाई भाषा पढ़कर सीखते हैं, उससे कहीं अधिक वे अपने मित्रों के साथ घुल-मिल कर तथा बातें करके जान सकते हैं, वे मित्र जो पूरे संसार भर से हैं परन्तु विशेषकर भारत तथा पाकिस्तान, श्री लंका, चीन, हाँगकांग, ताइवान, मलेशिया, सिंगापुर तथा इंडोनेशिया से है । और इस तरह से एशिया का अध्ययन हमारे विद्यालयों में सामान्य रूप से हो रहा है, यह बच्चों द्वारा आपस में रखे जाने वाले सामान्य संबंधों का एक भाग है । अब यह भी विद्यालयों में एशिया के अध्ययन को प्रोत्साहन देने की कार्यनीति है । वस्तुतः एशियाई इतिहास तो हमेशा ही रहा है पर अब एक तरह से यह मात्र इतिहास है जिसमें एशिया है । इस तरह वहाँ अब गणित है जिसमें एशिया है, विज्ञान है जिसमें एशिया है, पिछले दस वर्षों में ऐसी सामग्री को विकसित करने की यह नई प्रवृत्ति है जो एशिया के अध्ययन को सामान्य पाठयक्रम में लाती है ताकि ऐसा लगे कि वो वहीं की है तथा वे किसी ऐसे विदेशी स्थान के बारे में नही है जिसे समझने के लिए हमें और जानना पड़े । विद्यालयों में एशिया के अध्ययन को सामान्य रूप में लाने पिछले दस वर्षों में हुई एक बहुत अच्छी घटना है और हमें भरोसा है कि यह भविष्य के अगले 10-20 वर्षों में इसी गति से चलता रहेगा ।

स्यू सलेमन :

यदि आपकी संस्था की समीक्षा एक संकट की अनुभूति के कारण हुई तो क्या आप दोनों महसूस करते हैं कि आस्ट्रेलिया के एशिया के ज्ञान में संकट के समाधान के लिए कुछ करने का अवसर है ?

रॉबिन जेफ़री :

" मेरा मानना है कि इसके समान एक उदाहरण 1957 में विश्व में स्पुटनिक का है, स्पुटनिक का अमरीकी शिक्षा पर उत्प्रेरक प्रभाव पड़ा, यह अगले वर्ष राष्ट्रीय शिक्षा रक्षा अधिनियम में परिणित हुआ जिससे अगले 30 वर्षों में अमरीका में एशियाई क्षेत्रीय अध्ययन चले । और कई लोग कहेंगे कि इसने बहुत अच्छा किया, कई बेहद प्रतिभावान अमरीकी विद्वान, कुटनीतिज्ञ, व्यापारी उत्पन्न किए, और काफ़ी अंतर्राष्ट्रीय समझ बढ़ाई । मैं सोचता हूँ कि आस्ट्रेलिया को भी ऐसा ही कुछ चाहिए और यह संकट, खतरे, अवसर से निकलने वाली अच्छी वस्तुओं में से एक हो सकती है ।

स्यू सलेमन :

टेस्सा, युद्ध-पश्चात की अवधि में जापान के साथ हमारे लंबे स्थायी संबंध रहे हैं । उस शक्तिगृह की जानकारी बनाए रखना हमारे लिए कितना महत्वपूर्ण है ?

टेस्सा मौरिस सूज़ूकी :

" मैं सोचती हूँ कि यह अत्यधिक महत्वपूर्ण है और यदि मैं इसे थोड़े वृहतर संदर्भ में रख सकूँ तो मैं सोचती हूँ कि अगले कुछ वर्षों में उत्तर-पूर्व एशिया में जो कुछ होगा वह इस क्षेत्र के लिए पूर्णतः अत्यधिक महत्वपूर्ण होगा । फिर से यह काफ़ी हद तक संकट तथा अवसर है, विशेषकर कोरियाई प्रायद्वीप के चालू मुद्दों के संबंध में, जापान तथा उत्तरी कोरिया के बीच के संबंधों के सामान्य होने का प्रश्न, जो वर्तमान में अत्यधिक तनावपूर्ण स्थिति में है । और उन सभी क्षेत्रों में आस्ट्रेलिया एक सकारात्मक भूमिका अदा कर सकता है, यह जापान तथा दक्षिण कोरिया जैसे देशों के साथ कुछ मुद्दों से निपटने के लिए कार्य कर सकता है । मैं सोचती हूँ कि संपूर्ण एशियाई क्षेत्र को भी सारा संकट इतना महत्वपूर्ण बना देता है कि आस्ट्रेलियाई न केवल सरकार के स्तर पर बल्कि समाज के भीतर कई श्रेणी के स्तरों पर भी न केवल तत्काल सुरक्षा समस्याओं से निपटने के तरीकों के बारे में परन्तु विकास तथा मानवाधिकार के दीर्घकालीन मुद्दों से भी निपटने के लिए एक दूसरे से बात करते हैं और इस तरह इस पर सुरक्षा तथा आतंकवाद के आस-पास वर्तमान संकट की अनुभूति प्रदर्शित होती है ।

स्यू सलेमन :

यह काफ़ी विडंबना है कि हम एशिया के बारे में ऐसे बात कर रहे हैं जैसे एशिया बाहर कहीं हो जबकि वास्तव में एशिया के बड़े भाग यहाँ आस्ट्रेलिया में बढ़ते हुए प्रवासी, चीनी समुदाय, बढ़ते हुए भारतीय समुदाय तथा यहाँ पढ़ रहे कई एशियाई विद्यार्थियों में मौजूद हैं । जॉन क्या यह हमारे क्षेत्र के साथ आगामी संबंधों के लिए अच्छा है ?

जॉन फिटज़जेरआल्ड :

यह है, यह हमारे सामने मौजूद अवसर का एक भाग है । हम तीन शिक्षाविद यहाँ बैठे हैं जिन्होंने अब तक 10 से 20 वर्ष के मध्य अलग-अलग वर्ष एशिया के अध्ययन के बढ़ावा देने के लिए लगाए हैं और हमारे द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट "आस्ट्रेलियाइयों के एशियाई ज्ञान को अधिकतम करना " इस वास्तविकता को इंगित करती है कि हमें अपने को बदलने की आवश्यकता है । यह कि आस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों में एशियाई शिक्षकों तथा अनुसंधानकर्ताओं की वर्तमान पीढ़ी को अपने से उन्हें बदलने के लिए नई पीढ़ी को प्रशिक्षित करना होगा । और वास्तव में हम चीन, पूर्वी एशिया तथा दक्षिण-पूर्वी एशिया से कई प्रवासियों के मध्य हम अपने श्रेष्ठ विद्यार्थी पाते हैं और हम आस्ट्रेलिया की एशियाई विशेषज्ञता वाली अगली पीढ़ी को स्वयं एशियाई पृष्ठभूमि वाला पाएंगे, जो इस देश में एशिया के अध्ययन में एक महत्वपूर्ण घटना होगी । हम ही इसका स्वागत कर सकते हैं और हम ही इसे प्रोत्साहित कर सकते हैं और यह एक अवसर है जिसको नींव बनाकर हमें आगे बढ़ना है । वास्तव में, यदि एशिया तथा इसकी भाषाओं के इर्द-गिर्द अध्ययन करवा रहे आस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों में संकट है, तो एक तरीके से विश्वविद्यालयों को इसे स्वयं सुलझाना है, इस अवसर का लाभ नई पीढ़ी को एशिया तथा आस्ट्रेलिया के अध्ययन के लिए तथा इन क्षेत्र में आस्ट्रेलिया की और समझ को बढ़ाने के लिए प्रशिक्षित करने तथा उन्हें इसके लिए प्रतिबद्ध करने के लिए प्रोत्साहित करना हमारे तथा देश के हमारे साथियों के हाथ में है ।"

स्यू सलेमन :

इसके साथ ही मेलबर्न के ला ट्रोब विश्वविद्यालय से प्रोफेसर जॉन फिटज़जेरआल्ड तथा रॉबिन जेफ़री और केनबरा में आस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी से प्रोफेसर टेस्सा मौरिस सूज़ूकी के साथ चर्चा समाप्त होती है ।

और जो रिपोर्ट उन्होंने मिलकर आस्ट्रेलियाई एशियाई अध्ययन संस्था के लिए लिखी वह "आस्ट्रेलिया के एशियाई ज्ञान को अधिकतम करना" कहलाती है ।

आशा करती हूँ कि आप रेडियो आस्ट्रेलिया से स्यू सलेमन के साथ हमारे अगले कार्यक्रम - " महान जनसंख्या वाद-विवाद " में मेरे साथ होंगे ।

19वीं सदी में आस्ट्रेलिया में "जनसंख्या बढ़ाओ अथवा मिट जाओ " का नारा प्रचलित था और सम्कालीन (वर्तमान) आस्ट्रेलिया में प्रवास कार्यक्रम मध्यम जनसंख्या वृद्धि बनाए रखता है।

मेलबर्न के मोनेश विश्वविद्यालय के नेश्नल सेंटर फार आस्ट्रेलियन स्टडीज़ को शैक्षिक सलाह के लिए तथा तकनीकी निर्देशन के लिए रेयान ईगन को मेरा धन्यवाद।